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Cave on Moon: चांद पर मिले भूमिगत गुफा के सबूत; भविष्य में खोजकर्ताओं के आश्रय के लिए किया जा सकता है प्रयोग

Mon, 15 Jul 2024 09:43 PM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, फ्लोरिडा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, फ्लोरिडा Published by: शिव शुक्ला Updated Mon, 15 Jul 2024 09:43 PM IST
सार

शोधकर्ताओं ने बताया कि चंद्रमा पर सबसे गहरे ज्ञात गड्ढे से एक बड़ी गुफा तक पहुंचने के सबूत मिले हैं। यह अपोलो 11 के लैंडिंग स्थल से केवल 250 मील (400 किलोमीटर) दूर, ट्रैंक्विलिटी सागर पर स्थित है।
 

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Cave on Moon: Evidence of underground cave found on Moon; Can be used to shelter explorers in future
चांद पर मिले गुफा होने के सबूत - फोटो : Istock

विस्तार

Cave On Moon: चांद पर एक ऐसी गुफा मिली है, जो भविष्य में खोजकर्ताओं का ठिकाना बन सकती है। इटली के नेतृत्व वाली अंतरिक्ष शोधकर्ताओं के एक दल ने यह दावा किया है। इन शोधकर्ताओं ने बताया कि ये गुफा उस जगह से ज्यादा दूर नहीं है जहां 55 साल पहले नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन उतरे थे। उनका ये भी कहना है कि  वहां ऐसी  सैकड़ों और गुफाएं हैं जिनमें भविष्य के अंतरिक्ष यात्री रह सकते हैं।

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शोधकर्ताओं ने बताया कि चंद्रमा पर सबसे गहरे ज्ञात गड्ढे से एक बड़ी गुफा तक पहुंचने के सबूत मिले हैं। यह अपोलो 11 के लैंडिंग स्थल से केवल 250 मील (400 किलोमीटर) दूर, ट्रैंक्विलिटी सागर पर स्थित है।
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बता दें कि शोधकर्ताओं ने नासा के चंद्र टोही ऑर्बिटर द्वारा रडार माप का विश्लेषण किया। फिर इसके परिणामों की तुलना पृथ्वी पर लावा ट्यूब्स से की। जिसके बाद यह निष्कर्ष निकला। वैज्ञानिकों का कहना है कि रडार डेटा भूमिगत गुफा के केवल शुरुआती भाग के बारे में ही मिला है, लेकिन अनुमान है कि यह कम से कम 130 फीट (40 मीटर) चौड़ा और कई   मीटर लंबा है।
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वैज्ञानिकों के अनुसार अधिकांश गड्ढे चंद्रमा के प्राचीन लावा मैदानों में स्थित प्रतीत होते हैं। कुछ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भी हो सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि स्थायी रूप से छाया वाले गड्ढों में जमा हुआ पानी जमा होता है जो पीने का पानी और रॉकेट ईंधन प्रदान कर सकता है।


चांद की गुफाओं में भी जीवन संभव...
नासा का मानना है कि भविष्य में चंद्रमा की गुफाओं में रहना भी संभव हो सकता है। ये गुफाएं अनिवार्य रूप से लावा ट्यूब की होंगी, जो पृथ्वी पर भी पाई जाती हैं। लावा ट्यूब तब बनते हैं जब पिघला हुआ लावा ठोस लावा के नीचे बहता है या बहते लावा के ऊपर एक क्त्रस्स्ट बनता है, जिससे एक खोखली सुरंग बनती है। यदि एक ठोस लावा ट्यूब की छत गिरती है, तो यह एक गड्ढा बनाती है।

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