पाकिस्तान के मेडिकल स्टाफ में तेजी से बढ़े कोरोना के मामले, आठ स्वास्थ्य कर्मियों की मौत
- एक हफ्ते में 75 फीसदी केस पॉजिटिव, 444 मेडिकल कर्मचारी कोरोना पीड़ित
- सरकार ने अपने बनाए पीपीई किट उपलब्ध करवाने का किया दावा
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पाकिस्तान में कोरोना का संक्रमण मेडिकल कर्मचारियों के बीच कहर बनकर टूटा है। पिछले एक हफ्ते में ही स्वास्थ्य कर्मियों में संक्रमण के 75 फीसदी मामले बढ़े हैं और ये संख्या 253 से बढ़कर 444 हो गई है। यानी 23 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच ही 191 कर्मचारी कोरोना से संक्रमित हो गए।
पाकिस्तान की नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर ने ये ताजा आंकड़े 30 अप्रैल को जारी किए। इसके मुताबिक 29 अप्रैल तक 216 डॉक्टर्स, 67 नर्स और 161 हेल्थकेयर स्टाफ कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।
इनमें से 204 को अपने-अपने घरों में क्वारंटाइन किया गया गए, जबकि 138 को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 94 मेडिकल स्टाफ इससे ठीक भी हो चुके हैं। अब तक आठ मेडिकल स्टाफ की कोरोना से मौत हो चुकी है।
पाकिस्तान के मेडिकल स्टाफ के बीच कोरोना का पहला मामला मार्च में गिलगिट बालटिस्तान में दर्ज हुआ था, जब एक युवा डॉक्टर उज्मा रियाज में इसका संक्रमण पाया गया था। पिछले हफ्ते पेशावर के हायताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स में कोविड-19 वार्ड में काम करने वाले एक सीनियर डॉक्टर इसके शिकार हुए थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल 444 मामलों में से 138 ऐसे हैं, जो कोविड-19 के गहन चिकित्सा केंद्रों में काम कर रहे थे, जबकि 306 अस्पताल के दूसरे वार्ड में ड्यूटी पर थे। इनसे संपर्क में आने वालों के 136 मामले पॉजिटिव पाए गए जबकि अभी 289 मामलों की जांच रिपोर्ट आनी बाकी है।
उधर सरकार ने दावा किया है कि मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा के लिए जल्दी ही वहां कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य सलाहकार डॉ जफर मिर्जा ने कहा कि सरकार को अपने मेडिकल स्टाफ की गंभीर चिंता है।
उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान इन मेडिकल कर्मचारियों के लिए अपना पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विप्मेंट (पीपीई) खुद बना रहा है, लेकिन अभी वह ठीक तरह से सभी तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसे उपलब्ध कराने से लेकर इसके सही इस्तेमाल की ट्रेनिंग के लिए सरकार मजबूती से कदम उठा रही है।