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आतंक के खिलाफ पाक सरकार की कार्रवाई, हाफिज सईद का साला गिरफ्तार
Wed, 15 May 2019 04:12 PM IST
Shilpa Thakur
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shilpa Thakur
Updated Wed, 15 May 2019 04:12 PM IST
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हाफिज सईद
- फोटो : File Photo
मुंबई आतंकी हमले के मारटरमाइंड और प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा के संस्थापक हाफिज सईद का साला पाकिस्तान में गिरफ्तार हो गया है। उसपर पाकिस्तानी सरकार की निंदा करने और नफरत से भरा भाषण देने का आरोप है।
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अब्दुल रहमान मक्की, जमात-उद-दावा के राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विंग का हेड और फलाह-ए-इंसानियत का चेयरमैन है। जियो न्यूज की रिपोर्ट ने आंतरिक मंत्रालय का हवाला देते हुए बताया है कि सरकार की गैर कानूनी संगठनों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के दौरान मक्की को गिरफ्तार किया गया है।
इस मामले पर पाकिस्तान की पंजाब प्रांत की पुलिस का कहना है कि मक्की की गिरफ्तारी मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर एक्ट के तहत की गई है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि फाइनेंशल एक्शन टास्ट फोर्स (एफएटीएफ) के दिशा निर्देशों के तहत सरकार जो कदम उठा रही है, मक्की ने उनकी आलोचना की थी।
सईद पर दिसंबर 2008 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रतिबंध लगाया था। उसे नवंबर 2017 में पाकिस्तान में नजरबंदी से रिहा किया गया था।
फरवीर में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखना जारी रखा था। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान आतंकी संगठनों जैसे जैश-ए-मोहम्मद, जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा की आर्थिक मदद को रोक पाने में असफल रहा।
हाल ही में पाकिस्तान ने उन 11 संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिनके प्रतिबंधित संगठनों से संपर्क हैं। जम्मू कश्मीर के पुलावामा में हुए आत्मघाती हमले के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि वह किसी भी संगठन को अन्य देशों पर हमला करने के लिए पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल नहीं करने देंगे। पाकिस्तान में फलाह-ए-इंसानियत और जमात-उद-दावा भी प्रतिबंधित है। हाल ही में यहां सरकार ने घोषणा कर 30 हजार से अधिक मदरसों को सरकारी नियंत्रण में लाने की बात भी कही है।
हाफिज सईद आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है। भारत के विरुद्ध भी इस संगठन ने कई हमले किए हैं। शुरू में इस संगठन का उद्देश्य अफगानिस्तान से सोवियत सैनिकों को बाहर निकालना था लेकिन बाद में इस संगठन का उद्देश्य कश्मीर को भारत से अलग करना हो गया।
पहले तो ये संगठन अपने किए सभी हमलों की जिम्मेदारी लेता था लेकिन बाद में इसने हमलों की जिम्मेदारी लेना भी बंद कर दिया। ये संगठन बाद में जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन नाम से सक्रिय हो गया। जिससे यह धन जुटाता था।
इसका मकसद धन जुटाना, नेटवर्क/स्लीपर सेल बनाना और युवाओं को आतंकवाद में शामिल होने के लिए प्रेरित करना था।