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BRI Project: बेल्ट एंड रोड पर पाकिस्तान ने मान ली हैं चीन की तमाम नई शर्तें?

Fri, 28 Oct 2022 03:48 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 28 Oct 2022 03:48 PM IST
सार

BRI Project: शरीफ एक नवंबर को दो दिन की यात्रा पर चीन पहुंचेंगे। उनके साथ पाकिस्तान का एक उच्चस्तरीय प्रतिधिनिमंडल भी आएगा, जिसमें विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी भी होंगे...

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BRI Project: Pakistan accepted all the new conditions of China on Belt and Road
Xi Jinping and Shahbaz Sharif - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बीजिंग यात्रा के दौरान चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजना पर फिर से तेज गति से अमल शुरू करने का मुद्दा बातचीत के एजेंडे में सबसे ऊपर रहेगा। इस बात के संकेत दोनों देशों के सूत्रों ने दिए हैं। शरीफ एक नवंबर को दो दिन की यात्रा पर यहां पहुंचेंगे। उनके साथ पाकिस्तान का एक उच्चस्तरीय प्रतिधिनिमंडल भी आएगा, जिसमें विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी भी होंगे।

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शरीफ की यात्रा से पहले गुरुवार को दोनों देशों के अधिकारियों के बीच एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। इससे यह संकेत मिला है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने बीआरआई के बारे में चीन की सभी नई मांगों को स्वीकार कर लिया है। इनमें रेलवे निर्माण परियोजना की लागत में वृद्धि भी है। बताया जाता है कि चीन की मुख्य चिंता में पाकिस्तान में किए गए अपने निवेश को सुरक्षित बनाना है।

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गुरुवार को चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) की संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) की बैठक रखी गई। यह इस समिति की 11वीं बैठक थी। इसके पहले इसी महीने लाहौर स्थित चीन के वाणिज्य दूत झाओ शिरेन ने पत्रकारों से कहा था कि जेसीसी की बैठक के बाद सीपीईसी पर काम की रफ्तार तेज हो जाएगी। सूत्रों ने कहा है कि इस बारे में रही-सही अड़चनों को शहबाज शरीफ की यात्रा के दौरान दूर किया जाएगा। सीपीईसी चीन की महत्त्वाकांक्षी बीआरआई परियोजना का ही हिस्सा है। इस परियोजना के तहत कराची से पेशावर तक 1,733 किलोमीटर की रेल लाइन को अपग्रेड किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को एमएल-1 के नाम से जाना जाता है।

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सीपीईसी से जुड़े एक अधिकारी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम को बताया- ‘पाकिस्तान एलएल-1 की लागत को 6.8 बिलियन डॉलर से बढ़ा कर 9.85 बिलियन डॉलर करने पर राजी हो गया है। लागत बढ़ाने की मांग चीन ने की थी। चीन की दलील है कि पहले तय हुई लागत अब व्यावहारिक नहीं रह गई है।’ कुछ अन्य सूत्रों ने इस वेबसाइट को बताया है कि दोनों देशों में कराची सर्कुलर रेलवे और काराकोरम हाईवे री-एलाइंगमेंट के निर्माण की लागत पर भी सहमति बन गई है। कराची की परियोजना पर 1.33 बिलियन और काराकोरम परियोजना पर 1.8 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा। समझा जाता है कि जेसीसी की बैठक में बिजली परियोजनाओं से जुड़े मसलों पर भी चर्चा हुई।

इसके बावजूद कई विशेषज्ञों को यह नहीं लगता कि सीपीईसी पर काम तेज करना आसान होगा। अमेरिकी थिंक टैंक विल्सन सेंटर में साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के निदेशक माइकल कुलेलमैन के मुताबिक पाकिस्तान के आर्थिक संकट में फंसने के कारण परियोजना पर काम धीमा हुआ है। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने निक्कईएशिया से कहा- ‘पाकिस्तान के आर्थिक संकट और खुद चीन की आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट को देखते हुए इस परियोजना में नई गतिविधियां शुरू हो पाने की ना के बराबर संभावना है।’

पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसीलिए शहबाज शरीफ की चीन यात्रा को बहुत अहम माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस यात्रा के दौरान शरीफ चीन से 10 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता मांगेंगे। चीन इसके लिए आसानी से तैयार हो जाए, इसीलिए जेसीसी की बैठक उनकी यात्रा से पहले बुलाई गई, जिसमें बताया जाता है कि चीन के मनमाफिक फैसले हुए।

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