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US: चार्ली किर्क को शहीद बताने पर गहराया विवाद, अश्वेत पादरियों ने जताया एतराज; नस्लवाद और हिंसा पर जताई चिंता

Wed, 24 Sep 2025 12:35 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 24 Sep 2025 12:35 PM IST
सार

कंजर्वेटिव नेता चार्ली किर्क की हत्या के बाद उन्हें शहीद बताए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अश्वेत चर्चों के पादरियों ने उनकी विचारधारा और उनकी बयानों पर विरोध जताया है। उनका कहना है कि उनकी हत्या भले ही दुखद है, लेकिन यह उनकी जीवनभर की नफरत और विभाजनकारी राजनीति को सही नहीं ठहरा सकती।

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Black pastors say Charlie Kirk not martyr, while decrying racism and political violence
चार्ली किर्क को शहीद बताने पर विवाद (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका में कंजर्वेटिव कार्यकर्ता चार्ली किर्क की हत्या के बाद उन्हें 'ईसाई धर्म का शहीद' बताने को लेकर गहरा विवाद छिड़ गया है। खासकर अश्वेत चर्चों के पादरी इस बात का जोरदार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि किर्क की हत्या दुखद जरूर है, लेकिन यह उनके जीवनभर के बयानों और कार्यों को पवित्र या सही नहीं ठहरा सकती। चार्ली किर्क की हत्या का मामला और उसके बाद हुई प्रतिक्रियाओं ने अमेरिका में राजनीति, नस्ल और धर्म की खाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है। बीते रविवार को एक तरफ एरिजोना के बड़े फुटबॉल स्टेडियम में हजारों लोग इकट्ठा होकर किर्क को श्रद्धांजलि दे रहे थे, तो दूसरी तरफ देशभर के अश्वेत चर्चों में पादरी उनके विचारों और भाषणों की कड़ी आलोचना कर रहे थे।
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मौत, गलतियों को नहीं धो सकती- अश्वेत चर्च का संदेश
वर्जीनिया के प्रसिद्ध अल्फ्रेड स्ट्रीट बैपटिस्ट चर्च के पादरी रेव. हावर्ड-जॉन वेस्ले ने अपने ऑनलाइन प्रवचन में कहा, 'चार्ली किर्क की हत्या नहीं होनी चाहिए थी। किसी के विचारों का जवाब हिंसा नहीं है। लेकिन मैं यह देखकर दुखी हूं कि देशभर में झंडे आधे झुका दिए गए हैं और उन्हें ऐसा व्यक्ति बताया जा रहा है जिसने ईसाई धर्म के लिए बलिदान दिया। सच्चाई यह है कि उन्होंने जीवनभर नफरत और विभाजन फैलाया।' वेस्ले का यह उपदेश सोशल मीडिया पर लाखों बार देखा गया। उन्होंने कहा कि 'कैसे आप जीते हैं, वही आपकी असली पहचान है। मौत उसे नहीं बदल सकती।'
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अश्वेत पादरियों का चार्ली किर्क पर आरोप
चार्ली किर्क की छवि कंजर्वेटिव और ईसाई राष्ट्रवादी आंदोलन के बड़े नेता के रूप में थी। लेकिन अश्वेत पादरियों का आरोप है कि उन्होंने अपने मंच का इस्तेमाल अश्वेत लोगों, अप्रवासियों, मुस्लिमों, महिलाओं और एलजीबीटीक्यू+ समुदाय को नीचा दिखाने के लिए किया। न्यूयॉर्क की मिडल कोलेजिएट चर्च की पादरी रेव. जैक्वी लुईस ने कहा, 'सदियों से सत्ता ने धर्म का इस्तेमाल नस्लवाद और भेदभाव को सही ठहराने के लिए किया है। चार्ली किर्क की विचारधारा भी उसी परंपरा का हिस्सा है। यह ईसाई धर्म नहीं, बल्कि यीशु के नाम पर लिपटा हुआ श्वेत राष्ट्रवाद है।'

विशाल सभा, राजनीतिक संदेश
रविवार को एरिजोना के स्टेडियम में आयोजित स्मृति समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और हजारों समर्थक मौजूद थे। यह कार्यक्रम श्रद्धांजलि से ज्यादा राजनीतिक रैली जैसा था। जेडी वेंस ने किर्क को 'अमेरिका का नायक और ईसाई धर्म का शहीद' बताया। केंटकी के पादरी रेव. जोएल बोमन ने कहा, 'यह देखना चिंताजनक है कि ईसाई प्रतीकों और दक्षिणपंथी राजनीति को इस तरह मिलाया जा रहा है। पिछले दस वर्षों में यह 'क्रिश्चियन नेशनलिज्म' की पहचान बन गया है।'


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मार्टिन लूथर किंग से तुलना पर नाराजगी
वहीं चार्ली किर्क के समर्थकों ने उनकी तुलना नागरिक अधिकारों के महान नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर से की। लेकिन अश्वेत पादरियों ने इसे बेहद आपत्तिजनक करार दिया। जॉर्जिया के न्यू बर्थ मिशनरी बैपटिस्ट चर्च के पादरी रेव. जमाल ब्रायंट ने अपने प्रवचन में कहा, 'कैसे कोई चार्ली किर्क को मार्टिन लूथर किंग से तुलना कर सकता है? दोनों में एकमात्र समानता यह है कि दोनों को श्वेत व्यक्ति ने मारा। इसके अलावा कुछ भी समान नहीं।' डलास के फ्रेंडशिप वेस्ट बैपटिस्ट चर्च के पादरी रेव. फ्रेडी हेन्स तृतीय ने कहा, 'मैं राजनीतिक हिंसा का विरोध करता हूं। किर्क को जिंदा रहना चाहिए था। लेकिन उनके विचार खतरनाक, नस्लवादी और घृणा से भरे थे। उन्हें नायक बताना इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है।'

कुछ पादरियों ने किर्क का किया समर्थन
हालांकि, सभी अश्वेत पादरी किर्क के खिलाफ नहीं हैं। नॉर्थ कैरोलिना के पादरी पैट्रिक एल. वुडन ने किर्क की पारंपरिक ईसाई सोच और रूढ़िवादी मूल्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विविधता और समावेशन की नीतियों ने कई मेहनतकश अश्वेत अमेरिकियों को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने हिंसा की निंदा करते हुए कहा, 'अगर आप किसी के विचारों से असहमत हैं, तो बहस करें। जवाब गोली से नहीं दिया जा सकता।'
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