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ब्रह्मांड की एक और गुत्थी सुलझी: ब्लैक होल की टक्करों से हो रहा पिंडों का जन्म, सितारों की टक्कर से बने जोड़

Mon, 11 May 2026 07:42 AM IST
राकेश कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला। Published by: राकेश कुमार Updated Mon, 11 May 2026 07:42 AM IST
सार

नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित एक शोध ने विशालकाय ब्लैक होल के निर्माण की गुत्थी सुलझा ली है। वैज्ञानिकों ने 153 ब्लैक होल विलय का विश्लेषण कर पाया कि भारी ब्लैक होल सीधे सितारों के ढहने से नहीं, बल्कि घने तारा समूहों के भीतर छोटे ब्लैक होल की बार-बार होने वाली टक्करों से बनते हैं। और क्या-क्या खुलासे हुए हैं? खबर में जानिए...

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black hole merger mystery solved gravitational waves nature astronomy
ब्रह्मांड के बड़े रहस्य से उठा पर्दा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

ब्रह्मांड के सबसे विशालकाय ब्लैक होल के निर्माण की एक बड़ी गुत्थी को सुलझा लिया गया है। हालिया एक शोध में वैज्ञानिकों का दावा है कि कॉस्मिक जायंट्स यानी विशालकाय खगोल पिंड घने तारा समूहों में होने वाली हिंसक टक्करों के परिणामस्वरूप बन रहे हैं।
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नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया कि गुरुत्वाकर्षण तरंगों ने इन ब्लैक होल के पिंडों के निर्माण के रहस्य से पर्दा उठाया है। कार्डिफ यूनिवर्सिटी के फैबियो एंटोनिनी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने एलआईजीओ, केएजीआरए और वर्गो डिटेक्टरों की मदद से दर्ज किए गए 153 ब्लैक होल विलय का विश्लेषण किया। ये तरंगें, जिन्हें पहली बार 1915 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने जनरल रिलेटिविटी के सिद्धांत के तहत प्रस्तावित किया था। 
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अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि क्या भारी ब्लैक होल सीधे बड़े सितारों के ढहने से बनते हैं या छोटे ब्लैक होल के बार-बार आपस में जुड़ने से। अध्ययन में ब्लैक होल्स की दो स्पष्ट श्रेणियां देखी गईं इसमें पहली कम द्रव्यमान वाले ब्लैक होल और दूसरी वो जो सुपरनोवा विस्फोट के बाद सितारों के कोर के ढहने से बने थे।
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उच्च द्रव्यमान वाले हैं ब्लैक होल: शोधकर्ता
शोधकर्ताओं ने पाया कि भारी ब्लैक होल की स्पिन तेज और विभिन्न दिशाओं में थी। टीम की सदस्य इसाबेल रोमेरो-शॉ के अनुसार, यह तेज और घूमने उल्टी-पुल्टी दिशा बताती है कि ये ब्लैक होल घने तारा समूहों के भीतर बार-बार हुई टक्करों से पैदा हुए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, सूर्य के द्रव्यमान से 45 गुना बड़े सितारे मरने पर ब्लैक होल बनने के बजाय पूरी तरह से फट जाते हैं, जिससे पीछे कुछ नहीं बचता। इसे वर्जित द्रव्यमान सीमा कहा जाता है।

45 ब्लैक होल पहले से मौजूद ब्लैक होल के आपस में मिलने से बने। वैज्ञानिकों के मुताबिक, 45 सौर द्रव्यमान से बड़े ब्लैक होल का अस्तित्व केवल तभी संभव है जब वे पहले से मौजूद ब्लैक होल के आपस में मिलने से बने हों। यह खोज न केवल ब्लैक होल के बढ़ने की प्रक्रिया को स्पष्ट करती है, बल्कि सितारों और गैलेक्सी के विकास को समझने के नए मार्ग भी खोलती है।

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