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अमेरिका: चेहरा पहचान तकनीक पर रोक लगाने वाला विधेयक पेश
Thu, 17 Jun 2021 03:09 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, वाशिंगटन।
एजेंसी, वाशिंगटन।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 17 Jun 2021 03:09 AM IST
सार
सांसदों का कहना है कि यह तकनीक नागरिकों की निजता का उल्लंघन करती है तथा पुलिस प्रणाली में नस्ली भेदभाव को बढ़ाती है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Twitter
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विस्तार
भारतीय-अमेरिकी कांग्रेस सदस्य प्रमिला जयपाल की अगुवाई में सांसदों के एक समूह ने सरकार को चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक समेत बायोमैट्रिक तकनीक के इस्तेमाल से रोकने के लिए एक विधेयक दोनों सदनों में पेश किया है।
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अमेरिकी संसद में ‘दि फेशियल रिकॉग्निशन एंड बायोमेट्रिक टेक्नोलॉजी मोरेटोरियम एक्ट’ पेश किया गया। इसका आधार वे खबरें हैं जिनमें कहा गया है कि सैकड़ों स्थानीय, सरकारी और संघीय प्रतिष्ठान समेत कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने चेहरे की पहचान करने वाली तकनीकों का अनियंत्रित तरीके से इस्तेमाल किया।
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एक शोध में पता चला कि अमेरिका के वयस्क लोगों में से करीब आधे ‘फैशियल रिकॉग्निशन डेटाबेस’ में पहले से मौजूद हैं। जयपाल, आयना प्रेसली तथा रशीदा तलैब ने यह विधेयक प्रतिनिधि सभा (निचले सदन) में पेश किया वहीं सीनेटर एडवर्ड जे मार्की, जैफ मकर्ली, बर्नी सैंडर्स, एलिजाबेथ वॉरेन और रॉन विडेन ने इस विधेयक को सीनेट (उच्च सदन) में पेश किया।
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अश्वेतों के खिलाफ हो रहा तकनीक का इस्तेमाल
यह विधेयक यदि कानून का रूप लेता है तो संघीय प्रतिष्ठानों द्वारा चेहरे की पहचान संबंधी तकनीक तथा अन्य बायोमेट्रिक तकनीक के इस्तेमाल पर रोक लग जाएगी और इस रोक को केवल संसद ही हटा सकेगी। जयपाल ने कहा, चेहरे की पहचान करने संबंधी तकनीक न केवल हस्तक्षेपकारी है बल्कि यह गलत और अनियमित भी है।
कानून प्रवर्तन में इसका अश्वेत लोगों के खिलाफ देशभर में इस्तेमाल हो रहा है। बर्नी सैंडर्स ने कहा कि चेहरे की पहचान की तकनीक निजता और नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करती है और पुलिस प्रणाली में नस्ली भेदभाव को और गहरा करती है।