{"_id":"6a64520a17bff07d210f8034","slug":"bill-introduced-in-us-senate-seeks-3-year-pause-on-h-1b-visas-codify-usd-100k-fee-2026-07-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमेरिका में H-1B पर तीन साल तक रोक लगाने की तैयारी?: सीनेट में पेश गया बिल; भारतीय पेशेवरों पर क्या होगा असर?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
अमेरिका में H-1B पर तीन साल तक रोक लगाने की तैयारी?: सीनेट में पेश गया बिल; भारतीय पेशेवरों पर क्या होगा असर?
Sat, 25 Jul 2026 11:36 AM IST
निर्मल कांत
एएनआई/पीटीआई, वाशिंगटन डीसी।
एएनआई/पीटीआई, वाशिंगटन डीसी।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 25 Jul 2026 11:36 AM IST
सार
अमेरिका में एच-1बी वीजा पर सख्ती की तैयारी शुरू हो गई है। एक सांसद ने तीन साल तक नए वीजा रोकने और 1 लाख डॉलर शुल्क को कानूनी मान्यता देने का प्रस्ताव रखा है। इससे भारतीय पेशेवरों पर क्या असर पड़ सकता है। पढ़िए रिपोर्ट-
विज्ञापन
अमेरिकी कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
अमेरिका की सीनेट में एक सांसद ने ऐसा विधेयक पेश किया है, जिसमें तीन साल तक नए एच-1बी वीजा जारी करने पर रोक लगाने की मांग की गई है। इसमें ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को कानून में शामिल करने का भी प्रस्ताव है। इस शुल्क को एक संघीय अदालत पहले रद्द कर चुकी है।
किसने पेश किया विधेयक?
मोंटाना से रिपब्लिकन सांसद टिम शीही ने यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ऐसे वीजा जारी नहीं करने चाहिए, जिनसे अमेरिकी कर्मचारियों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाने में आसानी हो।
किन देशों के कर्मचारियों पर निर्भर अमेरिकी कंपनियां?
एच-1बी वीजा के तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष क्षेत्रों में काम करने वाले अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों को नौकरी दे सकती हैं। इन नौकरियों में सैद्धांतिक या तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होती है। अमेरिकी तकनीकी कंपनियां हर साल भारत और चीन जैसे देशों से हजारों कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस वीजा पर निर्भर रहती हैं। अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ एच-1बी वीजा के जरिये काम करते हैं।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: ट्रंप ने न्यूक्लियर डील के बदले रखी अब्राहम समझौते की शर्त, सऊदी पर क्यों दबाव बना रहे अमेरिकी राष्ट्रपति?
सांसद टिम शीही ने क्या कहा?
शीही ने गुरुवार को एक बयान में कहा, एच-1बी कार्यक्रम की शुरुआत विशेष और कठिन पदों के लिए कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए की गई थी, न कि सस्ते विदेशी श्रमिकों के जरिए योग्य और मेहनती अमेरिकियों की जगह लेने के लिए।
उन्होंने कहा, मेरा कानून एच-1बी के दुरुपयोग को खत्म करेगा और इस कार्यक्रम को उसके असली उद्देश्य के मुताबिक चलाने में मदद करेगा। यह उन खामियों को दूर करेगा, जो इसके गलत इस्तेमाल को बढ़ावा देती हैं। साथ ही सुरक्षा उपायों को मजबूत करेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।
शीही ने 'एच-1बी दुरुपयोग रोकने वाला विधेयक, 2026' को अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा, एच-1बी में धोखाधड़ी रोकने और उन राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एक अहम और पहले से उठाया गया कदम बताया, जो उनके अनुसार कमजोर सुरक्षा नियमों के कारण वर्षों से चल रहे इस कार्यक्रम से पैदा हुए हैं।
विधेयक में क्या है?
इस प्रस्तावित विधेयक को इमिग्रेशन अकाउंटेबिलिटी प्रोजेक्ट और फेडरेशन फॉर अमेरिकन इमिग्रेशन रिफॉर्म (फेयर) का समर्थन मिला है। इस विधेयक में तीन साल तक नए एच-1बी वीजा जारी करने पर रोक लगाने और इसके बाद ज्यादा सख्त नियमों और सीमाओं के साथ कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव है। इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हर एच-1बी आवेदन पर लगाए गए 1 लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को भी कानून का हिस्सा बनाने की मांग की गई है।
विज्ञापन
किसने पेश किया विधेयक?
मोंटाना से रिपब्लिकन सांसद टिम शीही ने यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ऐसे वीजा जारी नहीं करने चाहिए, जिनसे अमेरिकी कर्मचारियों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाने में आसानी हो।
विज्ञापन
किन देशों के कर्मचारियों पर निर्भर अमेरिकी कंपनियां?
एच-1बी वीजा के तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष क्षेत्रों में काम करने वाले अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों को नौकरी दे सकती हैं। इन नौकरियों में सैद्धांतिक या तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होती है। अमेरिकी तकनीकी कंपनियां हर साल भारत और चीन जैसे देशों से हजारों कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस वीजा पर निर्भर रहती हैं। अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ एच-1बी वीजा के जरिये काम करते हैं।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: ट्रंप ने न्यूक्लियर डील के बदले रखी अब्राहम समझौते की शर्त, सऊदी पर क्यों दबाव बना रहे अमेरिकी राष्ट्रपति?
सांसद टिम शीही ने क्या कहा?
शीही ने गुरुवार को एक बयान में कहा, एच-1बी कार्यक्रम की शुरुआत विशेष और कठिन पदों के लिए कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए की गई थी, न कि सस्ते विदेशी श्रमिकों के जरिए योग्य और मेहनती अमेरिकियों की जगह लेने के लिए।
उन्होंने कहा, मेरा कानून एच-1बी के दुरुपयोग को खत्म करेगा और इस कार्यक्रम को उसके असली उद्देश्य के मुताबिक चलाने में मदद करेगा। यह उन खामियों को दूर करेगा, जो इसके गलत इस्तेमाल को बढ़ावा देती हैं। साथ ही सुरक्षा उपायों को मजबूत करेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।
शीही ने 'एच-1बी दुरुपयोग रोकने वाला विधेयक, 2026' को अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा, एच-1बी में धोखाधड़ी रोकने और उन राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एक अहम और पहले से उठाया गया कदम बताया, जो उनके अनुसार कमजोर सुरक्षा नियमों के कारण वर्षों से चल रहे इस कार्यक्रम से पैदा हुए हैं।
विधेयक में क्या है?
इस प्रस्तावित विधेयक को इमिग्रेशन अकाउंटेबिलिटी प्रोजेक्ट और फेडरेशन फॉर अमेरिकन इमिग्रेशन रिफॉर्म (फेयर) का समर्थन मिला है। इस विधेयक में तीन साल तक नए एच-1बी वीजा जारी करने पर रोक लगाने और इसके बाद ज्यादा सख्त नियमों और सीमाओं के साथ कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव है। इसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हर एच-1बी आवेदन पर लगाए गए 1 लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को भी कानून का हिस्सा बनाने की मांग की गई है।