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बिल गेट्स के ‘परोपकार’ का कोविड टीके से बड़ा इम्तिहान
Fri, 27 Nov 2020 07:22 AM IST
Jeet Kumar
न्यूयार्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन।
न्यूयार्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 27 Nov 2020 07:22 AM IST
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बिल और मेलिंडा गेट्स
- फोटो : Twitter
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बीते दो दशक से भी ज्यादा समय से आर्थिक रूप से कमजोर देशों तक सस्ते टीके पहुंचाने में माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स अलग पहचान बना चुके हैं।
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कोविड-19 के टीके को विकसित करने के लिए भी वह भारत, अमेरिका समेत कई देशों की कंपनियों और संगठनों को लाखों-करोड़ों डॉलर की मदद दे चुके हैं। इन दिनों वह सफल टीके के भंडारण और वितरण को लेकर दवा कंपनियों के अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं, तो साथ ही नेताओं से वित्तीय प्रतिबद्धता पर भी बात कर रहे हैं।
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जानकारों का कहना है कि कोरोना महामारी खत्म करने के लिए प्रभावी टीका बनाना बड़ा कदम जरूर है, लेकिन असली सफलता पिछड़े और विकासशील देशों के आम नागरिकों तक इसकी पहुंच पर निर्भर करेगी। अगर गेट्स की पहल गरीब लोगों को महामारी से जल्दी सुरक्षित करने में कामयाब रहती है तो उनके परोपकारी कामकाज पर दुनिया की बड़ी मुहर लगेगी। लेकिन अगर उनकी रणनीति कमजोर साबित हुई तो उनके परोपकार पर उठ रहे सवाल और बढ़ जाएंगे। ‘बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन’ के स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ते वर्चस्व पर नियंत्रण और कार्यशैली में व्यापक सुधार की मांग भी जोर पकड़ सकती है।
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टीकों की आपूर्ति के ताकतवर खिलाड़ी
गेट्स ने अभी तक विकासशील देशों तक टीके पहुंचाने के लिए अरबों रुपये खर्च किए हैं। फार्मा कंपनियों के साथ काम करते हुए उन्होंने टीकों के बाजार को बदल दिया है। आज वह वैश्विक स्वास्थ्य पर हो रहे काम में निजी क्षेत्र के बहुत बड़ी शख्सियत हैं।
अमेरिका में नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रोफसर और नीति विश्लेषक ब्रुक बेकर का कहना है कि गेट्स की दीर्घकालिक रणनीतियां टीके की आपूर्ति पर कॉरपोरेट नियंत्रण के साथ खड़ी नजर आती हैं। मौजूदा महामारी पर नियंत्रण में यह भी बड़ी समस्या हो सकती है।
जल्दी महामारी रोकना ही सफलता का पैमाना
कुछ जनस्वास्थ्य पैरोकार गेट्स के कदम में कॉरपोरेट जगत की चाल भी देखते हैं। उनका कहना है कि गेट्स कोविड टीके तक सभी की बराबर पहुंच के लिए बस जरा-सा काम कर रहे हैं। उनकी फार्मा कंपनियों से मिलीभगत है। हालांकि, इस बीच गेट्स ने कहा कि वैश्विक स्तर पर टीके की सफलता आंकने का एक ही पैमाना होगा कि हमने कोरोना महामारी को कितनी जल्दी रोका।
90 के दशक से सक्रिय, कई जीवन रक्षक टीके पहुंचाए
बिल गेट्स ने टीकों की आपूर्ति के क्षेत्र में 1990 के आखिर में दिलचस्पी दिखानी शुरू किया। उस दौरान इस बाजार में मुनाफा न देखते हुए कई कंपनियों ने टीके बनाना ही छोड़ दिया था। लेकिन गेट्स ने अपनी फंडिंग से एक नया कारोबारी मॉडल खड़ा किया, जिसमें सब्सिडी, उन्नत बाजार प्रतिबद्धता और बड़ी मात्रा में आपूर्ति की गारंटी थी। इसके चलते कई फार्मा कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में हाथ आजमाना शुरू किया। इस प्रयास से कमजोर लोगों तक जीवन रक्षक टीके पहुंचने लगे।
सवाल भी उठ रहे
कई विशेषज्ञ बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की प्राथमिकताओं से असहमत हैं। उनका कहना है कि उन्हें सीधे स्वास्थ्य तंत्र में पैसा खर्च करना चाहिए था। वहीं, कुछ जानकार जन स्वास्थ्य में गेट्स के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। कई देशों की सरकारों और विश्व स्वास्थ्य संगठन में कुछ अधिकारियों ने भी उनकी बढ़ती पहुंच पर चिंता जाहिर की है।