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US: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को झटका, न्यायाधीश ने चुनाव के लिए नागरिकता प्रमाण वाले आदेश पर लगाई रोक
Fri, 25 Apr 2025 04:30 AM IST
शुभम कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 25 Apr 2025 04:30 AM IST
सार
गुरुवार को एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन के वोटर फॉर्म में नागरिकता प्रमाण अनिवार्य करने वाले आदेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप के इस आदेश को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी।
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : PTI
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विस्तार
गुरुवार को एक संघीय न्यायाधीश ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को उस आदेश को तुरंत लागू करने से रोक दिया, जिसमें फेडरल वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म (मतदाता पंजीकरण फॉर्म) में नागरिकता प्रमाण दिखाना अनिवार्य किया गया था। बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप ने मार्च में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके अमेरिकी चुनावों में कई बदलावों की मांग की थी। उनका तर्क था कि अमेरिका चुनाव सुरक्षा के मामले में दूसरे देशों से पीछे है। लेकिन जज कोलीन कोलार-कोटेली ने इस आदेश के उस हिस्से को अस्थायी रूप से रोक दिया, जिसमें नागरिकता के प्रमाण की जरूरत को शामिल किया गया था।
क्या था ट्रंप का आदेश?
बीते महीने में ट्रंप ने चुनाव में बदलाव के लिए आदेश दिया था कि जो लोग सरकारी सहायता जैसे फूड स्टैम्प, दवाईयां आदि के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने से पहले अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। ट्रंप प्रशासन ने मेल बैलट (डाक से वोटिंग) की समयसीमा सख्त की जाने के साथ-साथ होमलैंड सिक्योरिटी और अन्य एजेंसियों को इमिग्रेशन डेटाबेस और राज्य की वोटर लिस्ट की तुलना करने का निर्देश दिया गया था।
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डेमोक्रेटिक पार्टी ने दी थी चुनौती
हालांकि ट्रंप प्रशासन के इस निर्देश पर डेमोक्रेटिक पार्टी और कई अन्य नागरिक संगठनों ने इस आदेश को अदालत में चुनौती दी। उनका कहना था कि ट्रंप प्रशासन का ये निर्देश संविधान के चुनाव खंड का उल्लंघन है, क्योंकि चुनाव संचालन का अधिकार राज्यों को है, न कि राष्ट्रपति को। साथ ही यह आदेश उन संगठनों के लिए बाधा बन जाएगा जो सार्वजनिक जगहों पर लोगों को वोटर रजिस्ट्रेशन में मदद करते हैं। इतना ही नहीं डेमोक्रेटिक पार्टी ने इसे यू.एस. इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के अधिकारों में दखल भी बताया था।
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न्यायाधीश ने क्या कहा?
मामले में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश कोलार-कोटेली ने ट्रंप के आदेश पर प्रारंभिक रोक लगाते हुए कहा कि मुकदमा चलते रहने तक इसे लागू नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने डेमोक्रेट्स की हर मांग को नहीं माना। उन्होंने मेल बैलट की समयसीमा कड़ी करने के आदेश को फिलहाल रोकने से इनकार किया। साथ ही डेटाबेस की समीक्षा से जुड़े हिस्से को भी फिलहाल रोकने से इनकार कर दिया। वहीं न्यायाधीश के फैसले पर सरकारी वकील माइकल गेट्स ने कहा कि अभी आदेश लागू नहीं हुआ है, और नागरिकता प्रमाण की अनिवार्यता *कई महीनों* तक लागू नहीं होगी, इसलिए रोक की ज़रूरत नहीं है।
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क्या था ट्रंप का आदेश?
बीते महीने में ट्रंप ने चुनाव में बदलाव के लिए आदेश दिया था कि जो लोग सरकारी सहायता जैसे फूड स्टैम्प, दवाईयां आदि के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने से पहले अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। ट्रंप प्रशासन ने मेल बैलट (डाक से वोटिंग) की समयसीमा सख्त की जाने के साथ-साथ होमलैंड सिक्योरिटी और अन्य एजेंसियों को इमिग्रेशन डेटाबेस और राज्य की वोटर लिस्ट की तुलना करने का निर्देश दिया गया था।
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डेमोक्रेटिक पार्टी ने दी थी चुनौती
हालांकि ट्रंप प्रशासन के इस निर्देश पर डेमोक्रेटिक पार्टी और कई अन्य नागरिक संगठनों ने इस आदेश को अदालत में चुनौती दी। उनका कहना था कि ट्रंप प्रशासन का ये निर्देश संविधान के चुनाव खंड का उल्लंघन है, क्योंकि चुनाव संचालन का अधिकार राज्यों को है, न कि राष्ट्रपति को। साथ ही यह आदेश उन संगठनों के लिए बाधा बन जाएगा जो सार्वजनिक जगहों पर लोगों को वोटर रजिस्ट्रेशन में मदद करते हैं। इतना ही नहीं डेमोक्रेटिक पार्टी ने इसे यू.एस. इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के अधिकारों में दखल भी बताया था।
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न्यायाधीश ने क्या कहा?
मामले में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश कोलार-कोटेली ने ट्रंप के आदेश पर प्रारंभिक रोक लगाते हुए कहा कि मुकदमा चलते रहने तक इसे लागू नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने डेमोक्रेट्स की हर मांग को नहीं माना। उन्होंने मेल बैलट की समयसीमा कड़ी करने के आदेश को फिलहाल रोकने से इनकार किया। साथ ही डेटाबेस की समीक्षा से जुड़े हिस्से को भी फिलहाल रोकने से इनकार कर दिया। वहीं न्यायाधीश के फैसले पर सरकारी वकील माइकल गेट्स ने कहा कि अभी आदेश लागू नहीं हुआ है, और नागरिकता प्रमाण की अनिवार्यता *कई महीनों* तक लागू नहीं होगी, इसलिए रोक की ज़रूरत नहीं है।