Bangladesh Mecca Pact: बांग्लादेश के लिए क्यों खतरा बन सकता है मक्का समझौता? रिपोर्ट में ईरान-होर्मुज का जिक्र
बांग्लादेश के मक्का समझौते में शामिल होने की चर्चा के बीच एक रिपोर्ट ने इसके संभावित खतरों को लेकर चेताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य गठबंधन में शामिल होने से बांग्लादेश ऐसे संघर्षों में फंस सकता है, जिनसे उसका सीधा कोई लेना-देना नहीं है। खास चिंता ईरान के साथ संभावित भविष्य के टकराव और होर्मुज व बाब अल-मंदेब जैसे समुद्री रास्तों पर निर्भरता को लेकर जताई गई है। ऐसे में क्या ढाका को सैन्य गुट से दूरी बनाए रखनी चाहिए? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
बांग्लादेश के मक्का समझौते या किसी ऐसे सैन्य गठबंधन में शामिल होने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे गठबंधन का हिस्सा बनने पर ढाका को उन अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जिनमें उसका कोई सीधा हित नहीं है। रिपोर्ट ने कहा कि बांग्लादेश की विदेश और सुरक्षा नीति स्वतंत्र रहनी चाहिए और उसे हर संकट पर अपने राष्ट्रीय हित के आधार पर फैसला लेना चाहिए।
मक्का समझौता किन देशों के बीच हुआ है और इसमें क्या प्रावधान है?
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने सात अगस्त को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें सामूहिक रक्षा का प्रावधान है। यानी किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सभी सदस्यों पर हमला माना जा सकता है। रिपोर्ट ने इसकी तुलना नाटो के अनुच्छेद पांच से की है। ऐसे प्रावधान के कारण किसी एक सदस्य का संघर्ष दूसरे सदस्य को भी उसमें खींच सकता है।
ईरान के साथ संघर्ष हुआ तो बांग्लादेश पर क्या असर पड़ेगा?
रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश का ईरान के साथ कोई क्षेत्रीय विवाद या सैन्य संघर्ष नहीं है। इसलिए ढाका की ऐसी किसी लड़ाई में शामिल होने में कोई सीधा हित नहीं है। लेकिन अगर भविष्य में सऊदी अरब और ईरान के बीच टकराव होता है और बांग्लादेश मक्का समझौते का सदस्य बन चुका होता है, तो उस पर किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने का दबाव बन सकता है। इससे उसके सऊदी अरब और ईरान दोनों के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
होर्मुज और बाब अल-मंदेब क्यों महत्वपूर्ण हैं?
रिपोर्ट ने बांग्लादेश के आर्थिक और ऊर्जा हितों को लेकर भी चिंता जताई है। देश समुद्री व्यापार के लिए होर्मुज और बाब अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर निर्भर है। अगर खाड़ी क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है तो इन रास्तों पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में बांग्लादेश के व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक हितों पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए रिपोर्ट ने सैन्य गठबंधन में शामिल होने से पहले इन जोखिमों को गंभीरता से समझने की सलाह दी है।
क्या बांग्लादेश को सैन्य गुटों से दूरी रखनी चाहिए?
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बांग्लादेश को किसी ऐसे समझौते का हिस्सा नहीं बनना चाहिए, जिसमें किसी दूसरे देश का दुश्मन उसका भी दुश्मन बन जाए। इसके बजाय ढाका को सभी देशों के साथ अपने हितों के आधार पर संबंध रखने और हर संकट पर स्वतंत्र फैसला करने की नीति जारी रखनी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश की विदेश नीति का केंद्र उसके अपने राष्ट्रीय हित, रणनीतिक प्राथमिकताएं और स्वतंत्र निर्णय होने चाहिए।