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अमेरिकाः प्रोग्रेसिव धड़े के दबाव में ‘लेफ्ट टर्न’ ले रही है डेमोक्रेटिक पार्टी

Tue, 02 Mar 2021 05:55 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 02 Mar 2021 05:55 PM IST
सार

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक अगर ये टैक्स लगा, तो उससे एक लाख अति धनी अमेरिकी परिवारों पर अतिरिक्त बोझ आएगा। उससे एक दशक में तीन खरब डॉलर की आमदनी सरकारी खजाने में होगी...

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Biden on sunday openly endorsed the right of Amazon Company workers to form unions in the state of Alabama
जो बाइडन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

प्रगतिशील आर्थिक नीतियां अपनाने के लिए जो बाइडन प्रशासन पर दबाव बनाने के मकसद से डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। उनके एजेंडे में 15 डॉलर प्रति घंटे न्यूनतम मजदूरी के लिए विधेयक तुरंत पारित कराना, धनी लोगों पर वेल्थ टैक्स लगाना, और ट्रेड यूनियन गठन की प्रक्रिया तेज करना शामिल है। इस धड़े के अभियान का राष्ट्रपति जो बाइडन पर असर होता भी दिख रहा है।

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बाइडन ने रविवार को अलाबामा राज्य में अमेजन कंपनी के मजदूरों के यूनियन बनाने के अधिकार का खुला समर्थन किया था। इसके लिए उन्होंने एक वीडियो जारी किया। उसमें कंपनी अधिकारियों को चेतावनी दी गई कि उन्हें यूनियन गठन के सवाल पर हो रहे मतदान में अनुचित तरीके नहीं अपनाने दिया जाएगा। राष्ट्रपति के इस दखल को प्रोग्रेसिव धड़े के दबाव का असर समझा गया है।
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इस बीच हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के प्रोग्रेसिव सदस्यों ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने के सवाल पर नया मोर्चा खोल दिया है। सदन के 23 सदस्यों ने राष्ट्रपति बाइडन और उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को चिट्ठी कर न्यूनतम मजदूरी का बिल सीनेट में तुरंत पास कराने की मांग की है। सीनेट के रिपब्लिकन सदस्यों ने पिछले हफ्ते राष्ट्रपति बाइडन के कोरोना राहत पैकेज के तहत न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव पास नहीं होने दिया था। अब प्रोग्रेसिव सदस्यों का कहना है कि इसके लिए अलग से बिल लाया जाए और उप राष्ट्रपति उस पर अपना निर्णायक वोट दें। सदन में दोनों पार्टियों के 50-50 सदस्य हैं, इसलिए इसके पास होने के लिए उप राष्ट्रपति के मत की जरूरत है।
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इस बीच मैसाचुसेट्स से डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में इसी पार्टी की सदस्य प्रमिला जयपाल ने धनी लोगों पर नए टैक्स लगाने का प्रस्ताव सामने रखा है, ताकि अतिरिक्त संसाधन जुटाए ज सकेँ। इन सदस्यों ने इस प्रस्ताव से संबंधित विधेयक का नाम अल्ट्रा मिलिनेयर टैक्स एक्ट रखा है। इसके तहत प्रस्ताव है कि जिन घरों की कुल संपत्ति पांच करोड़ से एक अरब डॉलर तक है, उन पर दो फीसदी का सालाना कर लगाया जाए। इससे अधिक की संपत्ति वाले घरों पर तीन फीसदी अतिरिक्त कर लगे।

इस प्रस्ताव को सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने भी अपना समर्थन दिया है, जो सीनेट में बजट समिति के अध्यक्ष हैं। सैंडर्स ने 2019 में यूनिवर्सल मेडिकल कवरेज, बाल देखभाल की फंडिंग बढ़ाने और ऐसे कई दूसरे प्रस्ताव सामने रखे थे। तब उन्होंने उन योजनाओं के लिए अरबपतियों पर अतिरिक्त कर लगाने की बात कही थी। तब सैंडर्स ने कहा था कि दरअसल, अरबपति होने ही नहीं चाहिए।

वॉरेन ने सोमवार को एक बयान में कहा- जिस समय कांग्रेस (अमेरिकी संसद) अर्थव्यवस्था की मदद करने के लिए अतिरिक्त योजनाएं बना रही है, उस समय वेल्थ टैक्स उसके एजेंडे में सबसे ऊपर होना चाहिए, ताकि नई योजनाओं के लिए धन जुटाया जा सके। वॉरेन ने कहा कि इस टैक्स से जो रकम हासिल होगी, उसे बाल देखभाल, शिक्षा, इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि पर खर्च किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये तमाम बातें राष्ट्रपति बाइडन और डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक अगर ये टैक्स लगा, तो उससे एक लाख अति धनी अमेरिकी परिवारों पर अतिरिक्त बोझ आएगा। उससे एक दशक में तीन खरब डॉलर की आमदनी सरकारी खजाने में होगी। कैलिफोर्निया स्थित बर्कले यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों इमैनुएल साएज और गैब्रियल जुकमैन ने इस बारे में खास अध्ययन किया है। उनका कहना है कि देश में आर्थिक गैर-बराबरी घटाने के लिए यह टैक्स जरूर लगाया जाना चाहिए।

इस बीच एक ताजा सर्वे रिपोर्ट से सामने आया है कि अमेरिकी जनता में राष्ट्रपति बाइडन के कोरोना राहत पैकेज को भारी समर्थन हासिल है। राष्ट्रपति के पैकेज में न्यूनतम मजदूरी बढाने की बात भी थी। मॉर्निंग कंसल्ट एजेंसी के मुताबिक ये सर्वे 19 से 22 फरवरी तक किया गया। उसमें 76 फीसदी लोगों ने पैकेज का समर्थन किया। सिर्फ 17 फीसदी लोगों ने इसका पूरा विरोध किया। विरोधियों में ज्यादातर वे लोग शामिल थे, जो रिपब्लिकन पार्टी के वोटर हैं।


बाइडन के पैकेज में छात्र ऋण की वसूली रोकने, बाल देखभाल के लिए खर्च बढ़ाने और मुफ्त भोजन देने की योजना की अवधि बढ़ाने की बातें भी शामिल हैं। बाइडन ने सैंडर्स समर्थक प्रगतिशील मतदाताओं के वोट हासिल करने के लिए अपने वादों में इन बातों को शामिल किया था। अब प्रोग्रेसिव धड़ा उन पर अमल करने के लिए दबाव बना रहा है। इससे डेमोक्रेटिक पार्टी वामपंथी नीतियों की तरफ झुकती नजर आ रही है। 

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