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Xenophobic: बाइडन ने भारत को 'जेनोफोबिक देश' बताया, आखिर क्या होता है इस शब्द का अर्थ, पहले कब चर्चा में रहा?
Fri, 03 May 2024 08:46 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 03 May 2024 08:46 PM IST
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जेनोफोबिक शब्द की कहानी
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
इस वक्त दुनियाभर में एक शब्द की खूब चर्चा हो रही है। यह शब्द है 'जेनोफोबिक' जिसका जिक्र अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने किया है। दरअसल, बाइडन ने भारत, जापान, चीन और रुस को 'जेनोफोबिक राष्ट्र' करार दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह बात अप्रवासियों के मुद्दे पर बात करते हुए कही है।आइये जानते हैं कि आखिर जो बाइडन ने भारत समेत अन्य देशों के बारे में क्या कहा है? बाइडन ने जिस 'जेनोफोबिक' शब्द का जिक्र किया है उसका मतलब क्या है? पहले कब-कब चर्चा में रहा यह शब्द?
जो बाइडन
- फोटो :
ANI
बाइडन ने भारत समेत अन्य देशों के बारे में क्या कहा है?
अमेरिका में इस साल राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं। यह मुकाबला राष्ट्रपति जो बाइडन और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच है। चुनाव को देखते हुए दोनों नेताओं ने प्रचार अभियान भी शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत राष्ट्रपति जो बाइडन ने चुनाव के लिए फंड जुटाने वाले एक कार्यक्रम में शिरकत किया। इसी दौरान प्रवासियों का जिक्र करते हुए बाइडन ने भारत, जापान, रूस और चीन को 'जेनोफोबिक राष्ट्र' कह दिया।
बाइडन ने अपने समर्थकों से कहा, ‘यह चुनाव आजादी, अमेरिका और लोकतंत्र के बारे में है। आप जानते हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ने का एक कारण आप लोगों की वजह से है। क्योंकि हम अप्रवासियों का स्वागत करते हैं।’ बाइडन ने आगे कहा कि चीन आर्थिक रूप से बुरी तरह क्यों रुक रहा है? जापान, रूस और भारत को क्यों परेशानी हो रही है? क्योंकि वे जेनोफोबिक हैं। वे अप्रवासियों को नहीं चाहते हैं। हम इसलिए आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि हम प्रवासियों का स्वागत करते हैं।'
अमेरिका में इस साल राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं। यह मुकाबला राष्ट्रपति जो बाइडन और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच है। चुनाव को देखते हुए दोनों नेताओं ने प्रचार अभियान भी शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत राष्ट्रपति जो बाइडन ने चुनाव के लिए फंड जुटाने वाले एक कार्यक्रम में शिरकत किया। इसी दौरान प्रवासियों का जिक्र करते हुए बाइडन ने भारत, जापान, रूस और चीन को 'जेनोफोबिक राष्ट्र' कह दिया।
बाइडन ने अपने समर्थकों से कहा, ‘यह चुनाव आजादी, अमेरिका और लोकतंत्र के बारे में है। आप जानते हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ने का एक कारण आप लोगों की वजह से है। क्योंकि हम अप्रवासियों का स्वागत करते हैं।’ बाइडन ने आगे कहा कि चीन आर्थिक रूप से बुरी तरह क्यों रुक रहा है? जापान, रूस और भारत को क्यों परेशानी हो रही है? क्योंकि वे जेनोफोबिक हैं। वे अप्रवासियों को नहीं चाहते हैं। हम इसलिए आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि हम प्रवासियों का स्वागत करते हैं।'
बाइडन ने जिस 'जेनोफोबिक' शब्द का जिक्र किया उसका मतलब क्या?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने जिस जेनोफोबिक शब्द का जिक्र किया है वह यूनानी मूल का शब्द है। कैम्ब्रिज डिक्शनरी के अनुसार, जेनोफोबिक का अर्थ 'विदेशी लोगों के प्रति अत्यधिक नापसंदगी या डर दिखाना' होता है। वहीं, मरियम बेबस्टर की परिभाषा के मुताबिक, जेनोफोबिया का अर्थ 'अजनबियों या विदेशियों या किसी भी अजीब या विदेशी चीज से डर और नफरत' होता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने जिस जेनोफोबिक शब्द का जिक्र किया है वह यूनानी मूल का शब्द है। कैम्ब्रिज डिक्शनरी के अनुसार, जेनोफोबिक का अर्थ 'विदेशी लोगों के प्रति अत्यधिक नापसंदगी या डर दिखाना' होता है। वहीं, मरियम बेबस्टर की परिभाषा के मुताबिक, जेनोफोबिया का अर्थ 'अजनबियों या विदेशियों या किसी भी अजीब या विदेशी चीज से डर और नफरत' होता है।
पहले कब-कब चर्चा में रहा 'जेनोफोबिक' शब्द?
यह कोई पहली बार नहीं है जब बाइडन ने इस शब्द का इस्तेमाल किया है। इससे पहले 18 अप्रैल, 2024 को राष्टपति बाइडन ने चीन के आर्थिक संकटों पर बात करते हुए उसे 'जेनोफोबिक कहा था। उन्होंने पेंसिल्वेनिया राज्य में एक चुनाव अभियान के दौरान अमेरिकी आर्थिक ताकत की तुलना भी की थी।
इसी साल जनवरी में फ्रांस में विवादास्पद फ्रांसीसी आव्रजन कानून के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस विरोध में शामिल हुए फ्रेंच सांसदों ने 'जेनोफोबिक' शब्द का इस्तेमाल किया था। ला फ्रांस इंसौमिस (एलएफआई) नामक राजनीतिक दल से जुड़े सांसद ऑरेली ट्रौवे ने कानून को 'नस्लवादी, जेनोफोबिक और बेवकूफी भरा' बताया था।
मार्च 2019 में दक्षिण अफ्रीका ने जेनोफोबिया, नस्लवाद और भेदभाव से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू की थी। यह कदम जेनोफोबिक और लिंग-आधारित हिंसा और भेदभाव के चलते हो रहे मानवाधिकारों के हनन को रोकने करने की दिशा में उठाया गया था। पंचवर्षीय योजना सरकार और नागरिकों के बीच परामर्श से बनाई गई थी।
यह कोई पहली बार नहीं है जब बाइडन ने इस शब्द का इस्तेमाल किया है। इससे पहले 18 अप्रैल, 2024 को राष्टपति बाइडन ने चीन के आर्थिक संकटों पर बात करते हुए उसे 'जेनोफोबिक कहा था। उन्होंने पेंसिल्वेनिया राज्य में एक चुनाव अभियान के दौरान अमेरिकी आर्थिक ताकत की तुलना भी की थी।
इसी साल जनवरी में फ्रांस में विवादास्पद फ्रांसीसी आव्रजन कानून के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस विरोध में शामिल हुए फ्रेंच सांसदों ने 'जेनोफोबिक' शब्द का इस्तेमाल किया था। ला फ्रांस इंसौमिस (एलएफआई) नामक राजनीतिक दल से जुड़े सांसद ऑरेली ट्रौवे ने कानून को 'नस्लवादी, जेनोफोबिक और बेवकूफी भरा' बताया था।
मार्च 2019 में दक्षिण अफ्रीका ने जेनोफोबिया, नस्लवाद और भेदभाव से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू की थी। यह कदम जेनोफोबिक और लिंग-आधारित हिंसा और भेदभाव के चलते हो रहे मानवाधिकारों के हनन को रोकने करने की दिशा में उठाया गया था। पंचवर्षीय योजना सरकार और नागरिकों के बीच परामर्श से बनाई गई थी।