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Benjamin Netanyahu: न्यायिक सुधारों के खिलाफ इस्राइल में बढ़ रहा विरोध, लगातार 11वें हफ्ते जारी हैं प्रदर्शन
Sun, 19 Mar 2023 09:47 AM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Sun, 19 Mar 2023 09:47 AM IST
सार
तेल अवीव के डिजेंगॉफ स्क्वायर में हजारों प्रदर्शनकारियों ने इस्राइल के नीले और सफेद झंडे और साथ ही एलजीबीटीक्यू समुदाय के इंद्रधनुषी झंडे को भी लहराया। शहरों से निकले प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर जाम लगा दिया।
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इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी।
- फोटो : Social Media
विस्तार
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कट्टर-दक्षिणपंथी सरकार की न्यायिक सुधार योजनाओं के खिलाफ लगातार 11वें सप्ताह विरोध प्रदर्शन जारी हैं। शनिवार को फिर कस्बों और शहरों में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। नेतन्याहू की सरकार ने पदभार ग्रहण करने के कुछ दिनों बाद जनवरी में सुधारों की घोषणा की थी, जिसे लेकर पूरे इस्राइल में नियमित रूप से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हा रहा है।
इस्राइली मीडिया के अनुसार, हाइफा, येरुशलम और बेर्शेबा सहित 100 से अधिक कस्बों और शहरों में हजार प्रदर्शनकारी निकले। दरअसल, प्रदर्शनकारियों को डर है कि पहले से ही संसद के माध्यम से चल रहे प्रस्तावित सुधार, अदालतों पर राजनेताओं की शक्ति में वृद्धि करेंगे, जो इस्राइली लोकतंत्र के लिए खतरा है।
लहराए गए इस्राइल और LGBTQ समुदाय के झंडे
तेल अवीव के डिजेंगॉफ स्क्वायर में, हजारों प्रदर्शनकारियों ने इस्राइल के नीले और सफेद झंडे और साथ ही एलजीबीटीक्यू समुदाय के इंद्रधनुषी झंडे को भी लहराया। शहरों से निकले प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर जाम लगा दिया। एएफपी के एक फोटोग्राफर ने केंद्रीय तेल अवीव में विरोध प्रदर्शन कर लोगों के हाथों में एक बैनर देखा जिस पर लिखा था: "देशद्रोही वामपंथी"।
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इस्राइल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन पर क्या बोले लोग?
तेल अवीव में मुख्य रैली में शामिल होने वाले हर्जलिया शहर के एक सेवानिवृत्त 64 वर्षीय नामा मजोर ने कहा कि वह "खुद के लिए नहीं, बल्कि अपनी बेटियों और पोते-पोतियों के लिए चिंतित हैं"। उन्होंने एएफपी को बताया, "हम इस्राइल को लोकतांत्रिक, बेशक यहूदी, लेकिन उदार रखना चाहते हैं। हम बहुत चिंतित हैं कि यह एक तानाशाही बनने जा रहा है। यहां कोई आधा लोकतंत्र नहीं है। हम या तो लोकतंत्र हैं या तानाशाही। बीच में कुछ भी नहीं है।"
तेल अवीव के 46 वर्षीय सगीव गोलान ने कहा कि सरकार नागरिक अधिकारों, महिलाओं के अधिकारों, एलजीबीटीक्यू अधिकारों और हर उस चीज़ को नष्ट करने की कोशिश कर रही है जिसके लिए लोकतंत्र खड़ा है। उन्होंने आगे कहा- हम लोकतंत्र की आवाज़ दिखाना चाहते हैं।
अशदोद शहर में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए विपक्षी नेता यायर लापिड ने प्रस्तावित समझौते को खारिज करने के लिए सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि गठबंधन के सदस्य "बातचीत नहीं चाहते, वे कानून के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं और इस्राइल को एक अलोकतांत्रिक राज्य में बदलना चाहते हैं।"
विपक्ष ने नेतन्याहू को घेरा
एक पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि तेल अवीव के उत्तर में हर्जलिया में कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों के एक समूह में अपनी कार चलाने पर एक 57 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। वहीं एक एक अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विपक्षियों ने नेतन्याहू पर संभावित निर्णयों को खत्म करने के लिए सुधारों का उपयोग करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने इन आरोप को खारिज कर दिया है।
इस्राइल में गहराती दरार पर चिंता जताते हुए राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने बुधवार को एक प्रस्तावित समझौता पेश किया, लेकिन सरकार ने इसे तुरंत खारिज कर दिया। हर्ज़ोग ने कहा, "जो भी यह सोचता है कि मानव जीवन के साथ गृहयुद्ध एक ऐसी रेखा है जिस तक हम कभी नहीं पहुंच सकते, वह नहीं जानता कि वह किस बारे में बात कर रहा है।" विपक्षी दलों के नेताओं ने गुरुवार को एक संयुक्त समाचार सम्मेलन में कहा कि उन्होंने हर्ज़ोग की रूपरेखा का समर्थन किया।
अति-रूढ़िवादी यहूदी और अति-दक्षिणपंथी दल वाले सत्तारूढ़ गठबंधन का तर्क है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों और इस्राइल की शीर्ष अदालत के बीच इस असंतुलन को ठीक करने के लिए प्रस्तावित सुधार आवश्यक हैं। सुधार, अन्य बातों के अलावा, सांसदों को एक साधारण बहुमत से सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों को रद्द करने की अनुमति देगा।
अन्य प्रस्ताव सरकार को उस समिति में अधिक महत्व देंगे जो न्यायाधीशों का चयन करती है और सर्वोच्च न्यायालय को तथाकथित बुनियादी कानूनों, इस्राइल के अर्ध-संविधान में किसी भी संशोधन को रद्द करने के अधिकार से वंचित कर देगी।
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इस्राइली मीडिया के अनुसार, हाइफा, येरुशलम और बेर्शेबा सहित 100 से अधिक कस्बों और शहरों में हजार प्रदर्शनकारी निकले। दरअसल, प्रदर्शनकारियों को डर है कि पहले से ही संसद के माध्यम से चल रहे प्रस्तावित सुधार, अदालतों पर राजनेताओं की शक्ति में वृद्धि करेंगे, जो इस्राइली लोकतंत्र के लिए खतरा है।
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लहराए गए इस्राइल और LGBTQ समुदाय के झंडे
तेल अवीव के डिजेंगॉफ स्क्वायर में, हजारों प्रदर्शनकारियों ने इस्राइल के नीले और सफेद झंडे और साथ ही एलजीबीटीक्यू समुदाय के इंद्रधनुषी झंडे को भी लहराया। शहरों से निकले प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर जाम लगा दिया। एएफपी के एक फोटोग्राफर ने केंद्रीय तेल अवीव में विरोध प्रदर्शन कर लोगों के हाथों में एक बैनर देखा जिस पर लिखा था: "देशद्रोही वामपंथी"।
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इस्राइल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन पर क्या बोले लोग?
तेल अवीव में मुख्य रैली में शामिल होने वाले हर्जलिया शहर के एक सेवानिवृत्त 64 वर्षीय नामा मजोर ने कहा कि वह "खुद के लिए नहीं, बल्कि अपनी बेटियों और पोते-पोतियों के लिए चिंतित हैं"। उन्होंने एएफपी को बताया, "हम इस्राइल को लोकतांत्रिक, बेशक यहूदी, लेकिन उदार रखना चाहते हैं। हम बहुत चिंतित हैं कि यह एक तानाशाही बनने जा रहा है। यहां कोई आधा लोकतंत्र नहीं है। हम या तो लोकतंत्र हैं या तानाशाही। बीच में कुछ भी नहीं है।"
तेल अवीव के 46 वर्षीय सगीव गोलान ने कहा कि सरकार नागरिक अधिकारों, महिलाओं के अधिकारों, एलजीबीटीक्यू अधिकारों और हर उस चीज़ को नष्ट करने की कोशिश कर रही है जिसके लिए लोकतंत्र खड़ा है। उन्होंने आगे कहा- हम लोकतंत्र की आवाज़ दिखाना चाहते हैं।
अशदोद शहर में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए विपक्षी नेता यायर लापिड ने प्रस्तावित समझौते को खारिज करने के लिए सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि गठबंधन के सदस्य "बातचीत नहीं चाहते, वे कानून के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं और इस्राइल को एक अलोकतांत्रिक राज्य में बदलना चाहते हैं।"
विपक्ष ने नेतन्याहू को घेरा
एक पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि तेल अवीव के उत्तर में हर्जलिया में कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों के एक समूह में अपनी कार चलाने पर एक 57 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। वहीं एक एक अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विपक्षियों ने नेतन्याहू पर संभावित निर्णयों को खत्म करने के लिए सुधारों का उपयोग करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने इन आरोप को खारिज कर दिया है।
इस्राइल में गहराती दरार पर चिंता जताते हुए राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने बुधवार को एक प्रस्तावित समझौता पेश किया, लेकिन सरकार ने इसे तुरंत खारिज कर दिया। हर्ज़ोग ने कहा, "जो भी यह सोचता है कि मानव जीवन के साथ गृहयुद्ध एक ऐसी रेखा है जिस तक हम कभी नहीं पहुंच सकते, वह नहीं जानता कि वह किस बारे में बात कर रहा है।" विपक्षी दलों के नेताओं ने गुरुवार को एक संयुक्त समाचार सम्मेलन में कहा कि उन्होंने हर्ज़ोग की रूपरेखा का समर्थन किया।
अति-रूढ़िवादी यहूदी और अति-दक्षिणपंथी दल वाले सत्तारूढ़ गठबंधन का तर्क है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों और इस्राइल की शीर्ष अदालत के बीच इस असंतुलन को ठीक करने के लिए प्रस्तावित सुधार आवश्यक हैं। सुधार, अन्य बातों के अलावा, सांसदों को एक साधारण बहुमत से सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों को रद्द करने की अनुमति देगा।
अन्य प्रस्ताव सरकार को उस समिति में अधिक महत्व देंगे जो न्यायाधीशों का चयन करती है और सर्वोच्च न्यायालय को तथाकथित बुनियादी कानूनों, इस्राइल के अर्ध-संविधान में किसी भी संशोधन को रद्द करने के अधिकार से वंचित कर देगी।