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Belarus Election : राष्ट्रपति लुकाशेंको के खिलाफ बदलाव की प्रतीक बन कर उभरी है ये महिला

Sun, 09 Aug 2020 11:28 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मिंस्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मिंस्क Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 09 Aug 2020 11:28 PM IST
सार

यूरोपीय देश बेलारूस में रविवार राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान हुआ। चुनाव प्रचार के दौरान अभी तक निर्विरोध रूप से चुनाव जीतते आए राष्ट्रपति लुकाशेंको को पहली बार किसी प्रत्याशी से चुनौती मिली है। खास बात यह कि आजादी के बाद से अब तक राष्ट्रपति की कुर्सी पर काबिज लुकाशेंको को चुनौती देने वाली स्वेतलाना तिखानोव्स्काया को राजनीति का कोई अनुभव नहीं है। जानिए कौन हैं स्वेतलाना और उनकी राजनीति में आने की कहानी...

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Belarus Election : know all about Svetlana Tikhanovskaya who challenged President Lukashenko
चुनाव अभियान के दौरान स्वेतलाना तिखानोव्स्काया - फोटो : ट्विटर

विस्तार

14 जुलाई को बेलारूस के केंद्रीय निर्वाचन आयोग (सीईसी) ने आगामी राष्ट्रपति चुनावों के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी करने की घोषणा की। इस सूची में वर्तमान राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के अलावा जिन लोगों का नाम शामिल था, उनमें से एक नाम है स्वेतलाना तिखानोव्स्काया। अंग्रेजी की शिक्षिका रहीं स्वेतलाना को राजनीति का कोई अनुभव नहीं है।  

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स्वेतलाना करीब 26 साल से बेलारूस में राज कर रहे लुकाशेंको की सत्ता को चुनौती देने वाली प्रत्याशी के रूप में उभर कर आई हैं। बेलारूस की राजनीति के विशेषज्ञों ने कहा था कि नौ अगस्त का चुनाव यहां की राजनीति के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी स्वेतलाना को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। बता दें कि बेलारूस में राष्ट्रपति चुनाव लुकाशेंको के अलावा कोई नहीं जीता है। 
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पति को हुई जेल तो किया नामांकन, धमकियां भी मिलीं
दो बच्चों की मां स्वेतलाना (37) को उनके चुनाव लड़ने का फैसला लेने के बाद से ही धमकियां मिल रही हैं। इसके चलते उन्हें अपने बच्चों को दादी के साथ देश के बाहर भेजना पड़ा। वह राजनीति के मामले में अनुभवहीन होने पर कहती हैं कि उन्होंने यह फैसला अनायास ही लिया था। दरअसल, उनके पति को गिरफ्तार किया गया था जो एक प्रसिद्ध यूट्यूबर हैं। उन्होंने भी चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी बनने की कोशिश की थी। 
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स्वेतलाना को उम्मीद थी कि चुनाव के लिए नामांकन करने से उनके पति की गिरफ्तारी के मामले को ओर ध्यान जाएगा और वह रिहा हो सकेंगे। लेकिन, उन्हें यह उम्मीद बिल्कुल नहीं थी कि अधिकारी उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दे देंगे। यहां तक तो सब ठीक था लेकिन इसके बाद जो हुआ उससे स्वेतलाना के साथ-साथ बेलारूस के अधिकारियों और राजनीति को भी चौंका दिया। 

जनता का मिला जोरदार समर्थन, रैलियों में जुटी भारी भीड़
उनकी उम्मीदवारी तय होने के कुछ दिनों के बाद ही पूरे देश में उनकी रैलियों में भारी भीड़ जमा होने लगी। 30 जुलाई को मिंस्क में हुए एक आयोजन में करीब 63 हजार लोग शामिल हुए थे। यहां तक कि उन छोटे प्रांतीय कस्बों में भी हजारों की संख्या में लोग उनकी रैलियों में शामिल हुए, जहां अभी तक कोई विपक्षी उम्मीदवार समर्थन तो दूर ठीक तरीके से कदम तक नहीं जमा पाया था। 

अलजजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार लंदन की शोधार्थी और पूर्व सोवियत देशों की सलाहकार रहीं काटिया ग्लॉड कहती हैं, 'अपने अभियान की शुरुआत में स्वेतलाना काफी कमजोर दिख रही थीं। असल में वह बहुत ज्यादा दबाव में थीं, वह बहुत डरी हुई थीं। अधिकारियों को लगा कि वह कमजोर हैं और उन पर आसानी से दबाव बनाया जा सकता है और हराया जा सकता है। लेकिन उनका अनुमान गलत साबित हुआ।'

मई के अंत में जब स्वेतलाना अपने नामांकन के लिए समर्थन एकत्र कर रही थीं, लुकाशेंको ने एक भाषण में कहा था कि उन्हें पूरा भरोसा है बेलारूस का अगला राष्ट्रपति एक पुरुष ही होगा। उन्होंने कहा था, 'हमारा संविधान महिलाओं के लिए नहीं है। हमारा समाज इतना परिपक्व नहीं है कि महिलाओं को वोट दे।' लेकिन बेलारूस की जनता ने स्वेतलाना को जिस तरह से समर्थन दिया है, उसने लुकाशेंको के माथे पर चिंता की लकीरें जरूर खींच दी हैं। 

चुनाव के लिए अयोग्य ठहराए गए प्रत्याशी भी आए साथ
स्वेतलाना को उम्मीदवारी के दस्तावेज मिलने के तीन दिन बाद अयोग्य ठहराए गए दो विपक्षी प्रत्याशियों ने उन्हें समर्थन दिया। ये प्रत्याशी थे विक्टर बाबरिको और वैलेरी सेपकालो। अभियान के दौरान दो और महिलाएं उनसे जुड़ीं इनमें से एक बारबरिको की कैंपेन मैनेजर मारिया कोलेस्निकोवा थीं और दूसरी सेपकाले की पत्नी वेरोनिका थीं। इन्होंने स्वेतलाना को संगठनात्मक और लॉजिस्टिकल सहायता उपलब्ध कराई।

इन्होंने जनता के सामने एक सकारात्मक विजन रखा, जो अभी तक के पारंपरिक विपक्षी प्रत्याशियों के विजन से कहीं अलग था। ग्लॉड कहती हैं कि ये सभी लोग जो हैं ये विपक्ष नहीं हैं, ये तीसरी शक्ति (थर्ड फोर्स) हैं। ये वो लोग हैं जिन्होंने जनता का समर्थन प्राप्त करने में सफलता हासिल की थी। इन्होंने स्वेतलाना का समर्थन किया और स्वेतलाना इनका प्रतीक और बदलाव की वाहक बन गईं।


आजादी के बाद से ही राष्ट्रपति बने हैं लुकाशेंको
बेलारूस पहले सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था। 25 अगस्त 1991 को यह सोवियत संघ से अलग हुआ और स्वतंत्र देश बना। इसके बाद यहां का अलग संविधान बना जो 1994 में आया। इसके तहत देश में राष्ट्रपति शासन की व्यवस्था तय की गई। जून 1994 को बेलारूस में पहला राष्ट्रपति चुनाव हुआ, जिसमें लुकाशेंको ने जीत हासिल की। तब से अब तक वही राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठे हैं। अब तक बेलारूस में पांच चुनाव हो चुके हैं लेकिन जीत लुकाशेंको को ही मिली है।

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