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Bangladesh: 'अभिव्यक्ति की आजादी नहीं, जान बचाना सबसे बड़ा मुद्दा..', दफ्तरों पर हमलों को लेकर बोले पत्रकार
Mon, 22 Dec 2025 11:37 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 22 Dec 2025 11:37 PM IST
सार
Bangladesh: बांग्लादेश के प्रमुख अखबारों के दफ्तरों पर भीड़ के हमलों के बाद पत्रकारों ने कहा कि अब जीवित रहना अभिव्यक्ति की आजादी से बड़ा मुद्दा बन गया है। अंतरिम सरकार ने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा कि मामले में नौ लोगों की गिरफ्तारी की गई है।
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बांग्लादेश में हिंसा के बाद तनावपूर्ण माहौल
- फोटो : एएनआई-पीटीआई
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विस्तार
बांग्लादेश के प्रमुख अखबारों के संपादकों ने सोमवार को कहा कि देश का मीडिया अब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों का 'जीवित रहने का अधिकार' अब अभिव्यक्ति की आजादी से बड़ा मुद्दा बन गया है। उनकी यह प्रतिक्रिया तब सामने आई है, जब गुरुवार रात राजधानी ढाका में प्रथम आलो और द डेली स्टार अखबारों के दफ्तरों पर भीड़ ने हमला किया। दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई। इस दौरान कई पत्रकार और कर्मचारी घंटों तक इमारत के अंदर फंसे रहे। शुरुआत में पुलिस और दमकल विभाग की टीमों को मौके पर पहुंचने से रोक दिया गया।
'द डेली स्टार' के संपादक और प्रकाशक महफूज अनाम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अब अभिव्यक्ति की आजादी मुख्य मुद्दा नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि पत्रकार सुरक्षित रह पाएंगे या नहीं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई वरिष्ठ नेता, कारोबारी और मीडिया जगत के लोग मौजूद थे।
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पत्रकारों की जान लेने के इरादे से किए गए हमले: महफूज अनाम
अनाम ने कहा कि बांग्लादेश का मीडिया इस समय अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये हमले किसी अखबार के विरोध में नहीं, बल्कि पत्रकारों और कर्मचारियों की जान लेने के इरादे से किए गए थे। उन्होंने कहा कि अगर भीड़ का मकसद केवल विरोध होता, तो आग लगाने से पहले लोगों को बाहर निकलने का मौका दिया जाता। इसके बजाय द डेली स्टार की इमारत की छत पर 26 से 27 मीडिया कर्मी फंस गए थे और दमकल विभाग को वहां तक पहुंचने नहीं दिया गया। अनाम ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश सामने आए हैं, जिनमें दोनों अखबारों के पत्रकारों को उनके घरों में खोजकर मारने की बातें कही गई थीं।
इस बीच, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) ने कार्रवाई में देरी पर सफाई दी है। पुलिस का कहना है कि तुरंत हस्तक्षेप करने से हालात और बिगड़ सकते थे। डीएमपी के अतिरिक्त आयुक्त नजरुल इस्लाम ने कहा कि पुलिस का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि किसी की जान न जाए।
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मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने बताया कि इन हमलों के मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन हमलों में दोनों अखबारों के अलावा सांस्कृतिक संगठनों छायानट और उदीची शिल्पी गोष्ठी के दफ्तरों को भी निशाना बनाया गया। ये घटनाएं धुर दक्षिणपंथी युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हुईं। हमलावरों ने आरोप लगाया कि ये अखबार भारत और अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के हित में काम कर रहे थे। 32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी भारत के आलोचक थे और पिछले साल हुए लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। इसी आंदोलन के बाद पांच अगस्त 2024 को शेख हसीना की अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हुई थी।
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'द डेली स्टार' के संपादक और प्रकाशक महफूज अनाम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अब अभिव्यक्ति की आजादी मुख्य मुद्दा नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि पत्रकार सुरक्षित रह पाएंगे या नहीं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई वरिष्ठ नेता, कारोबारी और मीडिया जगत के लोग मौजूद थे।
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पत्रकारों की जान लेने के इरादे से किए गए हमले: महफूज अनाम
अनाम ने कहा कि बांग्लादेश का मीडिया इस समय अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये हमले किसी अखबार के विरोध में नहीं, बल्कि पत्रकारों और कर्मचारियों की जान लेने के इरादे से किए गए थे। उन्होंने कहा कि अगर भीड़ का मकसद केवल विरोध होता, तो आग लगाने से पहले लोगों को बाहर निकलने का मौका दिया जाता। इसके बजाय द डेली स्टार की इमारत की छत पर 26 से 27 मीडिया कर्मी फंस गए थे और दमकल विभाग को वहां तक पहुंचने नहीं दिया गया। अनाम ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश सामने आए हैं, जिनमें दोनों अखबारों के पत्रकारों को उनके घरों में खोजकर मारने की बातें कही गई थीं।
इस बीच, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) ने कार्रवाई में देरी पर सफाई दी है। पुलिस का कहना है कि तुरंत हस्तक्षेप करने से हालात और बिगड़ सकते थे। डीएमपी के अतिरिक्त आयुक्त नजरुल इस्लाम ने कहा कि पुलिस का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि किसी की जान न जाए।
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मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने बताया कि इन हमलों के मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन हमलों में दोनों अखबारों के अलावा सांस्कृतिक संगठनों छायानट और उदीची शिल्पी गोष्ठी के दफ्तरों को भी निशाना बनाया गया। ये घटनाएं धुर दक्षिणपंथी युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हुईं। हमलावरों ने आरोप लगाया कि ये अखबार भारत और अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के हित में काम कर रहे थे। 32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी भारत के आलोचक थे और पिछले साल हुए लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। इसी आंदोलन के बाद पांच अगस्त 2024 को शेख हसीना की अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हुई थी।
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