फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Bangladesh: Why did fight for reservation in Bangladesh turn against Sheikh Hasina? Know how situation changed

Bangladesh: बांग्लादेश में आरक्षण की लड़ाई क्यों शेख हसीना के खिलाफ हुई? जानें महीने भर में ही कैसे बदले हालात

Mon, 05 Aug 2024 03:21 PM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 05 Aug 2024 03:21 PM IST
सार

बांग्लादेश में छात्र नेताओं ने शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर सविनय अवज्ञा आंदोलन की घोषणा की। विरोध कर रहे छात्रों के समूह ने नागरिकों से टैक्स या अन्य बिल जमा नहीं करने की अपील की। छात्रों ने कारखानों और सार्वजनिक परिवहन को बंद किए जाने का भी आह्वान किया। छात्रों की मांग है कि सिर्फ इस्तीफे से काम नहीं चलेगा, उनके खिलाफ हत्या, लूट और भ्रष्टाचार का मुकदमा चलाना चाहिए।

विज्ञापन
Bangladesh: Why did fight for reservation in Bangladesh turn against Sheikh Hasina? Know how situation changed
Sheikh hasina - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब मुल्क में अंतरिम सरकार कार्यभार संभालने जा रही है। बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां ने सोमवार को इसकी घोषणा की। एलान ऐसे वक्त किया गया, जब पिछले दो दिनों में शेख हसीना की सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हसीना के देश छोड़कर चले जाने की खबरों के बीच सेना प्रमुख ने कहा कि मैं देश की सारी जिम्मेदारी ले रहा हूं। कृपया सहयोग करें। इस बीच शेख हसीना के लंदन रवाना होने की जानकारी मिली है। मामले के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने सोमवार को नई दिल्ली में यह जानकारी दी। इससे पहले ऐसी अटकलें थीं कि वह भारत के किसी शहर के लिए रवाना हो गई हैं। 

विज्ञापन


बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबर रहमान की 76 वर्षीय बेटी हसीना 2009 से सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस दक्षिण एशियाई देश की बागडोर संभाल रही थीं। उन्हें जनवरी में हुए 12वें आम चुनाव में लगातार चौथी बार और कुल पांचवीं बार प्रधानमंत्री चुना गया। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उसके सहयोगियों ने चुनाव का बहिष्कार किया था।
विज्ञापन


पिछले दो दिनों में हसीना सरकार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में 100 से अधिक लोग मारे गए हैं। देश में विवादास्पद आरक्षण प्रणाली के खिलाफ उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसके तहत 1971 के मुक्ति संग्राम में लड़ने वालों के परिवारों के लिए 30 प्रतिशत नौकरियां आरक्षित हैं। देश भर में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच सेना प्रमुख ने कहा कि उन्होंने सेना और पुलिस दोनों से गोली न चलाने को कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इससे पहले सैकड़ों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के सरकारी आवास ‘गणभवन’ में घुस गए। फुटेज में प्रदर्शनकारियों को हसीना के सरकारी आवास में लूटपाट करते दिखाया गया और उनमें से कुछ को ‘गणभवन’ आवास से कुर्सियां और सोफा ले जाते हुए देखा गया। राजधानी के 3/ए धानमंडी स्थित हसीना के पार्टी कार्यालय को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया। गृह मंत्री असदुज्जमां खान के घर में प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों ने हसीना के पिता मुजीबुर रहमान की प्रतिमा को भी हथौड़ों से तोड़ दिया और प्रधानमंत्री की विदाई का जश्न मनाया।

बीते दिन क्या हुआ?
इससे पहले रविवार को बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में प्रधानमंत्री हसीना के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और सत्तारूढ़ अवामी लीग समर्थकों के बीच झड़पें हुईं, जिसके कारण अधिकारियों को मोबाइल इंटरनेट बंद करना पड़ा और अनिश्चित काल के लिए देशव्यापी कर्फ्यू लागू करना पड़ा। रविवार को हुई झड़पों में 14 पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 101 लोग मारे गए। झड़पें ऐसे समय में हुईं, जब कुछ दिन पहले ही पुलिस और छात्र प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों में 200 से अधिक लोग मारे गए थे। 

क्यों शुरू हुए थे प्रदर्शन?
प्रदर्शनकारी विवादास्पद आरक्षण प्रणाली को समाप्त करने की मांग कर रहे थे, जिसके तहत 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में लड़ने वालों के रिश्तेदारों के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। प्रदर्शन की शुरुआत तो आरक्षण को लेकर हुई थी, लेकिन देखते हर देखते इसने सरकार विरोधी आंदोलन का रूप ले लिया। आखिर ऐसा क्यों हुआ? आइए जानते हैं...

पहले विरोध के बारे में जानिए
बांग्लादेश में छात्र नेताओं ने शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर सविनय अवज्ञा आंदोलन की घोषणा की। विरोध कर रहे छात्रों के समूह ने नागरिकों से टैक्स या अन्य बिल जमा नहीं करने की अपील की। छात्रों ने कारखानों और सार्वजनिक परिवहन को बंद किए जाने का भी आह्वान किया। छात्रों की मांग है कि सिर्फ इस्तीफे से काम नहीं चलेगा, उनके खिलाफ हत्या, लूट और भ्रष्टाचार का मुकदमा चलाना चाहिए।

बता दें कि विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में बांग्लादेश की आरक्षण व्यवस्था है। इस व्यवस्था के तहत स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों के लिए सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण का प्रावधान था। 1972 में शुरू की गई बांग्लादेश की आरक्षण व्यवस्था में तब से कई बदलाव हो चुके हैं। 2018 में जब इसे खत्म किया गया, तो अलग-अलग वर्गों के लिए 56% सरकारी नौकरियों में आरक्षण था। समय-समय पर हुए बदलावों के जरिए महिलाओं और पिछड़े जिलों के लोगों को 10-10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई। इसी तरह पांच फीसदी आरक्षण धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए और एक फीसदी दिव्यांग कोटा दिया गया। हालांकि, हिंसक आंदोलन के बीच 21 जुलाई को बांग्लादेश के शीर्ष न्यायालय ने सरकारी नौकरियों में अधिकतर आरक्षण खत्म कर दिया।

21 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने उस फैसले को पलट दिया, जिसके तहत सभी सिविल सेवा नौकरियों के लिए दोबारा आरक्षण लागू कर दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय के ताजा निर्णय में, यह निर्धारित किया गया कि अब केवल पांच फीसदी नौकरियां स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों के लिए आरक्षित होंगी। इसके अलावा दो फीसदी नौकरियां अल्पसंख्यकों या दिव्यांगों के लिए आरक्षित होंगी। वहीं बाकी बचे पदों के लिए अदालत ने कहा कि ये योग्यता के आधार पर उम्मीदवारों के लिए खुले होंगे। यानी 93 फीसदी भर्तियां अनारक्षित कोटे से होंगी। इसके बाद छात्र सड़कों पर उतर आए।

सरकार ने क्या किया?
इस बीच सरकार ने तीन दिन की सरकारी छुट्टी की घोषणा कर दी। यह आज से ही लागू हुईं। इसके अलावा गृह मंत्रालय ने कहा है कि चार अगस्त को शाम छह बजे से अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया। इससे पहले शनिवार की रात गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल ने सुबह छह बजे से 9 बजे रात तक कर्फ्यू में ढील देने की घोषणा की थी। ढाका में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया।  फिलहाल ढाका में 4जी इंटरनेट सेवाएं रोक दी गई हैं, लेकिन ब्रॉडबैंड सेवाएं जारी हैं।

शेख हसीना का छात्रों का आतंकवादी कहना पड़ा भारी
शेख हसीना ने आगजनी, हिंसा में शामिल लोग छात्रों को आतंकवादी करार दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक के दौरान उन्होंने रविवार को उपद्रवी तत्वों को कड़ाई से पीछे धकेलने का नागरिकों से आह्वान किया। इस दौरान सभी छात्रों और अभिभावकों को घर लौटने के लिए कहा गया। यह भी कहा गया कि कई जगहों पर आतंकी हमले हो रहे हैं। हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच अवामी लीग के नेता और कपड़ा एवं जूट मंत्री जहांगीर कबीर नानक ने कहा कि विरोध करने वाले नेताओं को देश में मौजूदा हिंसा और मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। सरकार को उखाड़ फेंकने का यह आंदोलन कोई सामाजिक आंदोलन नहीं है। यह बीएनपी-जमात की साजिश है।

छात्रों के समर्थन में उतरे पूर्व सेना प्रमुख
पूर्व सैन्य प्रमुखों और सैन्य अधिकारियों ने भी छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने सुरक्षा बलों से आग्रह किया कि वे छात्रों पर कार्रवाई न करें। उन्होंने ढाका में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संकट का हल निकालने के बारे में बात की।


भारतीय दूतावास ने जारी की एडवायजरी
भारत  ने बांग्लादेश में रह रहे भारतीयों और छात्रों के लिए एडवाइजरी जारी की। भारतीय उच्चायोग ने कहा कि छात्रों सहित सभी भारतीय नागरिक संपर्क में रहें और सतर्कता बरतें। दूतावास ने आपात नंबर भी जारी किया। आपात स्थिति में +88-01313076402 पर संपर्क करने को कहा गया। लोगों को सलाह दी गई कि जहां तक संभव है लोकल ट्रैवल से बचें। लोग जहां हैं वहीं रहें और बाहर न निकलें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed