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Bangladesh: बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध, हसीना बोलीं- विदेशी तकनीकी से कराई जाएगी मौतों की जांच

Tue, 30 Jul 2024 08:41 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 30 Jul 2024 08:41 PM IST
सार

बांग्लादेश में आरक्षण को लेकर हुए देशव्यापी हिंसा के बाद अब शेख हसीना सरकार एक्शन मोड में आ चुकी है। जहां कुछ दिन पहले कई छात्र नेताओं को हिरासत में लिया गया। वहीं अब एक देश में जमात-ए-इस्लामी संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया है।

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Bangladesh to ban fundamentalist Jamaat, Will take foreign technical assistance for probing deaths: Hasina
बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध - फोटो : ANI

विस्तार

बांग्लादेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर देश भर में हुए छात्रों के हिंसात्मक विरोध प्रदर्शन के बाद मंगलवार को जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। बांग्लादेश सरकार ने कट्टरपंथी पार्टी पर आंदोलन का फायदा उठाने का आरोप लगाया है, जिसमें कम से कम 150 लोग मारे गए थे।
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अवामी लीग की गठबंधन की बैठक के बाद फैसला
जानकारी के मुताबिक जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाने की बात सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग के नेतृत्व वाले 14-पार्टी गठबंधन की बैठक के एक दिन बाद सामने आई है, जिसमें एक प्रस्ताव पारित किया गया था कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) की सहयोगी जमात को राजनीति से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। 
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जमात के छात्र दल ने हिंसा को अंजाम दिया- कानून
मामले में बांग्लादेश के कानून मंत्री अनीसुल हक ने बताया कि यह एक कार्यकारी आदेश होगा, जो जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाएगा, जो ब्रिटिश शासन के तहत अविभाजित भारत में 1941 में स्थापित एक पार्टी है। मंत्री ने दावा किया कि आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने कहा कि उनका हिंसा से कोई संबंध नहीं है, जबकि इस बात के सबूत हैं कि जमात, इसकी छात्र शाखा इस्लामी छात्र शिबिर, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) और इसके छात्र मोर्चे की उग्रवादी पार्टी छात्र दल ने इस हिंसा को अंजाम दिया।
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विदेशी तकनीकी से होगी मौतों की जांच- हसीना
वहीं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार हाल ही में हुए आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान हुई मौतों की जांच करने वाली न्यायिक जांच समिति के लिए विदेशी तकनीकी सहायता लेगी ताकि गहन जांच सुनिश्चित की जा सके। एक स्थानीय समाचार पत्र ने पीएम हसीना के हवाले से कहा, हम न्यायिक जांच समिति को उचित, गुणवत्तापूर्ण और उच्च मानक बनाने के लिए विदेशी तकनीकी सहायता लेंगे।


सरकार ने स्वीकार किया हिंसा में मारे गए 150 लोग
वहीं देश की आधिकारिक समाचार एजेंसी ने उनके हवाले से कहा कि बांग्लादेश न्यायिक जांच के लिए सहायता लेने के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के संपर्क में है। बता दें कि प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यह टिप्पणी उस समय की जब बांग्लादेश में जर्मनी के राजदूत अचिम ट्रॉस्टर ने प्रधानमंत्री से उनके आधिकारिक आवास गणभवन में मुलाकात की। बांग्लादेश सरकार ने सोमवार को पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि कोटा को लेकर छात्रों के आंदोलन के दौरान देश भर में 150 लोग मारे गए थे।
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