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बांग्लादेश: सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारी को किया निलंबित, दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर की थी विवादित टिप्पणी

Mon, 15 Nov 2021 08:51 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 15 Nov 2021 08:51 PM IST
सार

बांग्लादेश की एक महिला न्यायाधीश ने अपने एक फैसले में दुष्कर्म की घटना में कोई मामला 72 घंटे बाद न दर्ज करने के लिए कहा था। अब यहां की सुप्रीम कोर्ट ने इस न्यायाधीश को निलंबित करने का फैसला लिया है। 

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Bangladesh Supreme Court relieves woman judge of court duties who said rape cases should not be registered after 72 hours news in Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में अपने फैसले के दौरान विवादित टिप्पणी करने वाली महिला न्यायाधीश को उनकी अदालती जिम्मेदारियों से मुक्त करने का फैसला लिया है। इस महिला न्यायाधीश ने एक मामले में कहा था कि पुलिस को दुष्कर्म के मामले घटना के 72 घंटे पूरे होने के बाद नहीं दर्ज करने चाहिए। 

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ढाका ट्रिब्यून ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि ढाका की सातवीं महिला एवं बाल दमन रोधी न्यायाधिकरण की न्यायाधीश बेहम मोसम्मत कमरुन्नहर नाहर ने साल 2017 के एक मामले में यह टिप्पणी की थी। इस मामले में पांच युवाओं पर विश्वविद्यालय की दो छात्राओं के साथ ढाका के होटल में दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था।
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'72 घंटे बाद न दर्ज किया जाए दुष्कर्म का कोई मामला'
11 नवंबर को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश कमरुन्नहर ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए पांचों आरोपियों को बरी कर दिया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि पुलिस ने जनता का समय बर्बाद किय है और किसी भी दुष्कर्म की घटना में कोई भी मामला घटना होने के 72 घंटे के बाद नहीं दर्ज किया जाना चाहिए।
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डेली स्टार अखबार ने लिखा कि रविवार को सुप्रीम कोर्ट के प्रवक्ता मोहम्मद सैफुर रहमान की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि न्यायाधीश कमरुन्नहर को उनकी अदालती दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है। न्यायाधीश को निलंबित करने का फैसला अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गलत संदेश देता है फैसला
उन्होंने यह भी कहा था कि मामले में साबित हुआ है कि छात्राओं ने घटना से पहले अपनी इच्छा से शारीरिक संबंध बनाए थे। कानून मंत्री अनीसुल हक ने इस पर कहा कि यह फैसला कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गलत संदेश देता है। इसलिए न्यायाधीश के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी था। यह पूरी तरह कानूनी रास्ते से किया जाएगा।


हक ने कहा, मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं कि मैं फैसले के बारे में बात नहीं करना चाहता। लेकिन उनका पुलिस से यह कहना कि दुष्कर्म के 72 घंटे बाद मामला दर्ज न किया जाए, यह पूरी तरह गैरकानूनी और असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर न्यायाधीश कमरुन्नहर को एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जाएगा

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