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बांग्लादेश में शेख हसीना के खिलाफ आरोप तय: जिस न्यायालय को अपदस्थ PM ने शुरू कराया, उसमें क्यों चलेगा केस?

Mon, 02 Jun 2025 08:03 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 02 Jun 2025 08:03 PM IST
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सार
बांग्लादेश में जिस अदालत में शेख हसीना के खिलाफ सुनवाई होगी, वह क्या है? यह कितनी ताकतवर है? इस कोर्ट में शेख हसीना पर क्या-क्या आरोप लगे हैं? शेख हसीना के प्रत्यर्पण के कितनी आसार हैं? आइये जानते हैं...
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Bangladesh Sheikh Hasina Charged Crimes against humanity International Crimes Tribunal 1971 East Pakistan War
बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में होगी शेख हसीना के मामले की सुनवाई। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांग्लादेश की एक अदालत ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ तय आरोपों पर सुनवाई के लिए हामी भर दी है। मौजूदा अंतरिम सरकार ने देश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में अपील दायर करके इसकी मांग की थी। शेख हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में केस चलेगा। अदालत ने जांचकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे शेख हसीना, पूर्व गृह मंत्री और एक पूर्व पुलिस प्रमुख को भी 16 जून को पेश करें। शेख हसीना अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। 


ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर बांग्लादेश में जिस अदालत में शेख हसीना के खिलाफ सुनवाई होगी, वह क्या है? यह कितनी ताकतवर है? इस कोर्ट में शेख हसीना पर क्या-क्या आरोप लगे हैं? शेख हसीना के प्रत्यर्पण के कितनी आसार हैं? आइये जानते हैं...

कैसे और क्यों अस्तित्व में आया अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण?
1971 के युद्ध अपराधियों को सजा देने के लिए 1973 में जब बांग्लादेश में कानून पारित किया गया, तब कुल 195 आरोपियों पर केस चलाने की तैयारी हुई। हालांकि, 1974 में पाकिस्तान ने बांग्लादेश को मान्यता दे दी। इसके चलते बांग्लादेश ने 195 युद्ध अपराध के आरोपियों को छोड़ने का फैसला किया और पाकिस्तान भेज दिया। इस तरह नए कानून को लागू करने की वजह का ही अंत हो गया और यह अगले तीन दशक निष्क्रिय रहा। 

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हालांकि, शेख हसीना ने सत्ता में आने के बाद इस कानून के तहत अपराध न्यायाधिकरण को फिर सक्रिय कर दिया। इसका मकसद युद्ध अपराध के केसों में फंसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को कठघरे तक पहुंचाने का था। इसके लिए शेख हसीना ने 1973 के कानून को 2009 में संशोधित किया। बदलाव के बाद इस कानून के तहत युद्ध अपराध के आरोपी सैन्य कर्मी ही नहीं, बल्कि आम लोगों (नेता, अधिकारियों) पर भी केस चलाया जा सकता था। इन मामलों की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण गठित किया गया। इसे ही अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण कहा गया। 

इस न्यायाधिकरण में किस-किस पर चल चुके हैं केस?

अब जानें- शेख हसीना पर इस कोर्ट में कौन से मामले चलेंगे?
  • बांग्लादेश में बीता साल सियासी उथल-पुथल वाला रहा। दरअसल, अदालत के आरक्षण से जुड़े एक फैसले के बाद देशभर में प्रदर्शन शुरू हो गए थे। छात्रों ने बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किए थे। शेख हसीना ने इस दौरान प्रदर्शनकारियों को लेकर कुछ ऐसा कह दिया, जिससे छात्रों का प्रदर्शन हिंसक हो उठा। देखते ही देखते आरक्षण विरोधी यह प्रदर्शन शेख हसीना विरोधी हो गया। 
  • इस दौरान जब पुलिस प्रशासन ने आंदोलनकारियों को रोकने की कोशिश की तो हिंसा और भड़क गई। इस हिंसा में तब बांग्लादेश में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भारत में शरण लेने के लिए आना पड़ा। छात्र आंदोलन में हुई इसी हिंसा और मौतों के मामले में अपदस्थ प्रधानमंत्री को आरोपी बनाया गया है। 

अपदस्थ पीएम पर कौन-कौन से आरोप?
शेख हसीना के खिलाफ पांच अलग-अलग आरोप तय किए गए हैं। बांग्लादेश के मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम ने न्यायाधिकरण को जो शिकायत सौंपी, उसमें अपदस्थ पीएम पर हत्याओं के मामले में, हत्या की कोशिश के मामलों में और अन्य अमानवीय कृत्यों में शामिल रहने के आरोप तय किए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि शेख हसीना ने न सिर्फ आम लोगों के खिलाफ हिंसा को भड़काया, बल्कि इसे बढ़ावा दिया। साथ ही उन पर आवामी लीग के सशस्त्र कार्यकर्ताओं और प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से किए गए अपराधों को रोकने में नाकाम रहने के भी आरोप तय किए गए हैं।

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शेख हसीना पर भड़काऊ भाषण देने और प्रदर्शनकारी छात्रों के आंदोलन को खत्म करने के लिए घातक हथियारों के इस्तेमाल की इजाजत देने का भी आरोप है। इसके अलावा उन्हें एक प्रदर्शनकारी छात्र अबु सैयद की हत्या के मामले में भी आरोपी बनाया गया है। अपदस्थ प्रधानमंत्री के खिलाफ जो दो और केसों का जिक्र किया गया है, उनमें ढाका के एक इलाके में छह निहत्थे लोगों और अशुलिया इलाके में छह छात्र प्रदर्शनकारियों को गोली मरवाने के आरोप हैं।
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