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Adani Bribery Case: अदाणी समूह पर आरोप के बाद बांग्लादेश का फैसला, समझौतों की जांच के लिए नियुक्त होगी एजेंसी

Sun, 24 Nov 2024 04:46 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Sun, 24 Nov 2024 04:46 PM IST
सार

अदाणी के गोड्डा थर्मल प्लांट की स्थापना विशेष रूप से बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति करने के लिए की गई थी, लेकिन भारत ने हाल ही में एक कानून में बदलाव किया है, जिससे भारतीय कंपनी को गोड्डा की बिजली घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति मिल गई है, जिससे यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या बांग्लादेश को प्लांट से समर्पित बिजली आपूर्ति मिलेगी।

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Bangladesh seeks to review major energy projects including one with India’s Adani Group
मोहम्मद यूनुस - फोटो : ANI

विस्तार

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की तरफ से गठित एक समीक्षा समिति ने रविवार को अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासन की तरफ से भारत के अदाणी समूह के साथ एक सहित कई व्यावसायिक समूहों के साथ हस्ताक्षरित बिजली समझौतों की जांच के लिए एक जांच एजेंसी को नियुक्त करने की सिफारिश की। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय की राष्ट्रीय समीक्षा समिति ने 2009 से 2024 तक शेख हसीना के निरंकुश शासन के दौरान हस्ताक्षरित प्रमुख बिजली उत्पादन समझौतों की समीक्षा के लिए एक प्रतिष्ठित कानूनी और जांच एजेंसी की नियुक्ति की सिफारिश की है।'
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सात प्रमुख ऊर्जा और बिजली परियोजनाओं की समीक्षा
मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि समिति वर्तमान में सात प्रमुख ऊर्जा और बिजली परियोजनाओं की समीक्षा कर रही है, जिसमें अदाणी (गोड्डा) बीआईएफपीसीएल 1234.4 मेगावाट कोयला आधारित संयंत्र, अदाणी  पावर लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी शामिल है।
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छह अन्य समझौतों में एक चीनी कंपनी के साथ हुआ है, जिसने 1320 मेगावाट का कोयला आधारित बिजली संयंत्र बनाया है, जबकि बाकी बांग्लादेशी व्यापारिक समूहों के साथ हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे पिछली सरकार के करीबी हैं।
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समझौतों को 'रद्द या पुनर्विचार' करने की गारंटी
बयान के अनुसार, समिति ने 'बहुत सारे सबूत' जुटाए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कानूनों और प्रक्रियाओं के अनुरूप समझौतों को 'रद्द या पुनर्विचार' करने की गारंटी देते हैं। इसने कहा कि समिति को अन्य मांगे गए और अनचाहे अनुबंधों का आगे विश्लेषण करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। बयान में सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मोईनुल इस्लाम चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति के एक पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है, 'ऐसा करने में, हम समिति की सहायता के लिए एक या अधिक शीर्ष-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय कानूनी और जांच एजेंसी या एजेंसियों की तत्काल नियुक्ति की सिफारिश करते हैं।'


भारत के विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भारत-बांग्लादेश संबंधों के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक बन गया है।

अदाणी समूह ने बांग्लादेश को भेजा बकाया बिल
हालांकि, अदाणी समूह ने हाल ही में बांग्लादेश सरकार को अपने बकाया 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बिजली आपूर्ति बिल के बारे में एक पत्र भेजा है, जबकि बांग्लादेश के सरकारी बिजली विकास बोर्ड ने कहा है कि उन्होंने संकट के बावजूद पहले ही 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान कर दिया है और पूरी राशि का भुगतान करने की उम्मीद कर रहे हैं। अंतरिम सरकार ने पहले बिजली और ऊर्जा आपूर्ति (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2010 (संशोधित 2021) के तहत किए गए अनुबंधों की जांच करने के लिए एक समिति बनाई थी। समिति को देश की बिजली और ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति एजेंसियों से संबंधित भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप की जांच करने का काम सौंपा गया था।
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