{"_id":"66bee8f011547e15b300b922","slug":"bangladesh-s-caretaker-government-vows-to-take-swift-action-against-people-attacking-minorities-news-updates-2024-08-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bangladesh: बांग्लादेश की कार्यकारी सरकार का वादा- अल्पसंख्यकों पर हमले करने वालों पर तेजी से कार्रवाई होगी","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Bangladesh: बांग्लादेश की कार्यकारी सरकार का वादा- अल्पसंख्यकों पर हमले करने वालों पर तेजी से कार्रवाई होगी
Fri, 16 Aug 2024 11:21 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 16 Aug 2024 11:21 AM IST
सार
रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल एम सखावत हुसैन का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में इस्कॉन के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मंत्रालय स्थित उनके दफ्तर में मुलाकात की।
विज्ञापन
बांग्लादेश में प्रदर्शनों के बीच अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद यूनुस।
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हुई हिंसा का मुद्दा दुनियाभर में तूल पकड़ चुका है। भारत के साथ-साथ कई अन्य देश और संगठन इसे लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं। वैश्विक शक्तियों के इस दबाव के बीच अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा है कि वह अल्पसंख्यकों पर हमले या उनका उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ तेज और कड़ी कार्रवाई करेगी। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाले शासन ने कहा देश में हिंसा-टकराव और नफरत के लिए कोई जगह नहीं है।
रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल एम सखावत हुसैन का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में इस्कॉन के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मंत्रालय स्थित उनके दफ्तर में मुलाकात की। हुसैन ने कहा कि बांग्लादेश सामाजिक सौहार्द वाला देश है, जहां सभी धर्मों के लोग बिना बंटवारे के रहते हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न करने वाले किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
गौरतलब है कि इस्कॉन प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान इस्कॉन बांग्लादेश के अध्यक्ष सत्यरंजन बरोई ने सरकार के सलाहकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की थी और इसके लिए आठ प्रस्ताव पेश किए थे। इनमें निगरानी सेल की स्थापना से लेकर अल्पसंख्यक आयोग के गठन तक की मांग की गई थी। साथ ही मंदिरों को अलग से सुरक्षा मुहैया कराने के लिए भी कहा गया था। इस पर हुसैन ने उन्हें सभी मुद्दों पर समर्थन देने की बात कही।
विज्ञापन
शेख हसीना के विरोध के दौरान बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई थी हिंसा
बांग्लादेश नेशनल हिंदू ग्रांड अलायंस ने कहा है कि पांच अगस्त को शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार गिरने के बाद से 48 जिलों में 278 स्थानों पर अल्पसंख्यक समुदाय को हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा है। संगठन ने इसे हिंदू धर्म पर हमला करार दिया है।
हिंदुओं के साथ हुआ व्यवहार चिंताजनक
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के इस बयान से पहले भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता राम माधव ने कहा, बांग्लादेश में प्रत्येक हिंदू उस देश की पहचान के लिए 100 प्रतिशत प्रतिबद्ध है और उसे अपनी बंगाली पहचान और संस्कृति पर उतना ही गर्व है जितना किसी अन्य बांग्लादेशी मुसलमान को है। लेकिन हाल में वहां पर हिंदुओं के साथ जो व्यवहार किया गया, उसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
पूर्वी बंगाल के लोग भारी उत्पीड़न और अपमान का शिकार
भारत के पड़ोसी देशों पर एक व्याख्यान में माधव ने बांग्लादेश में मंदिरों को तोड़े जाने, हिंदुओं पर अत्याचार व अन्य समस्याओं की खबरों को बहुत चिंताजनक करार दिया। उन्होंने कहा, धर्म पाकिस्तान को एक राष्ट्र के रूप में एकजुट नहीं रख सका और वह पाकिस्तान और बांग्लादेश में विभाजित हो गया। 1947 में पाकिस्तान के निर्माण के दिन से ही पूर्वी बंगाल के लोग भारी उत्पीड़न और अपमान का शिकार हुए।
भारत ही एकमात्र ऐसा देश था जो उनके साथ खड़ा रहा
माधव ने कहा कि बांग्लादेश किसी भाषा के आधार पर बनाया गया एशिया का पहला राष्ट्र है। बंगबंधु के नाम से मशहूर और पूर्वी बंगाल में आंदोलन के नेता शेख मुजीबुर्रहमान को 1969 में ही जेल में डाल दिया गया था। उसके बाद इस आंदोलन का कोई नेता नहीं था और दुनिया के सभी प्रमुख देश पाकिस्तान का समर्थन कर रहे थे। बंगालियों के अधिकारों के लिए खड़ा होने वाला कोई नहीं था, चाहे वह मुस्लिम हों या हिंदू। उस समय भारत ही एकमात्र ऐसा देश था जो उनके साथ खड़ा था।
विज्ञापन
रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल एम सखावत हुसैन का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में इस्कॉन के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मंत्रालय स्थित उनके दफ्तर में मुलाकात की। हुसैन ने कहा कि बांग्लादेश सामाजिक सौहार्द वाला देश है, जहां सभी धर्मों के लोग बिना बंटवारे के रहते हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न करने वाले किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
विज्ञापन
गौरतलब है कि इस्कॉन प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान इस्कॉन बांग्लादेश के अध्यक्ष सत्यरंजन बरोई ने सरकार के सलाहकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की थी और इसके लिए आठ प्रस्ताव पेश किए थे। इनमें निगरानी सेल की स्थापना से लेकर अल्पसंख्यक आयोग के गठन तक की मांग की गई थी। साथ ही मंदिरों को अलग से सुरक्षा मुहैया कराने के लिए भी कहा गया था। इस पर हुसैन ने उन्हें सभी मुद्दों पर समर्थन देने की बात कही।
विज्ञापन
शेख हसीना के विरोध के दौरान बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई थी हिंसा
बांग्लादेश नेशनल हिंदू ग्रांड अलायंस ने कहा है कि पांच अगस्त को शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार गिरने के बाद से 48 जिलों में 278 स्थानों पर अल्पसंख्यक समुदाय को हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा है। संगठन ने इसे हिंदू धर्म पर हमला करार दिया है।
हिंदुओं के साथ हुआ व्यवहार चिंताजनक
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के इस बयान से पहले भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता राम माधव ने कहा, बांग्लादेश में प्रत्येक हिंदू उस देश की पहचान के लिए 100 प्रतिशत प्रतिबद्ध है और उसे अपनी बंगाली पहचान और संस्कृति पर उतना ही गर्व है जितना किसी अन्य बांग्लादेशी मुसलमान को है। लेकिन हाल में वहां पर हिंदुओं के साथ जो व्यवहार किया गया, उसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
पूर्वी बंगाल के लोग भारी उत्पीड़न और अपमान का शिकार
भारत के पड़ोसी देशों पर एक व्याख्यान में माधव ने बांग्लादेश में मंदिरों को तोड़े जाने, हिंदुओं पर अत्याचार व अन्य समस्याओं की खबरों को बहुत चिंताजनक करार दिया। उन्होंने कहा, धर्म पाकिस्तान को एक राष्ट्र के रूप में एकजुट नहीं रख सका और वह पाकिस्तान और बांग्लादेश में विभाजित हो गया। 1947 में पाकिस्तान के निर्माण के दिन से ही पूर्वी बंगाल के लोग भारी उत्पीड़न और अपमान का शिकार हुए।
भारत ही एकमात्र ऐसा देश था जो उनके साथ खड़ा रहा
माधव ने कहा कि बांग्लादेश किसी भाषा के आधार पर बनाया गया एशिया का पहला राष्ट्र है। बंगबंधु के नाम से मशहूर और पूर्वी बंगाल में आंदोलन के नेता शेख मुजीबुर्रहमान को 1969 में ही जेल में डाल दिया गया था। उसके बाद इस आंदोलन का कोई नेता नहीं था और दुनिया के सभी प्रमुख देश पाकिस्तान का समर्थन कर रहे थे। बंगालियों के अधिकारों के लिए खड़ा होने वाला कोई नहीं था, चाहे वह मुस्लिम हों या हिंदू। उस समय भारत ही एकमात्र ऐसा देश था जो उनके साथ खड़ा था।