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Bangladesh: PM हसीना ने विश्वविद्यालय प्रमुखों के साथ आपात बैठक बुलाई, छात्र नेताओं ने मांगा इस्तीफा

Sun, 04 Aug 2024 02:33 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 04 Aug 2024 02:33 AM IST
सार

बांग्लादेश में हाल ही में पुलिस और ज्यादातर छात्र प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें देखी गईं, जो विवादास्पद कोटा प्रणाली को समाप्त करने की मांग कर रहे थे, जिसमें 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में लड़ने वाले दिग्गजों के रिश्तेदारों के लिए 30 प्रतिशत सरकारी नौकरियां आरक्षित थीं।

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Bangladesh protest updates PM Sheikh Hasina calls emergency meeting student leaders demand resignation
शेख हसीना और प्रदर्शन करते छात्र - फोटो : एएनआई/ रॉयटर्स

विस्तार

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में उग्र आंदोलन को देखते हुए शनिवार रात विश्वविद्यालय के कुलपतियों और कॉलेज के प्राचार्यों के साथ एक आपात बैठक बुलाई। क्योंकि, छात्र आंदोलन के नेताओं ने बातचीत के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया और 200 से अधिक लोगों की मौत के कुछ दिनों बाद पीएम हसीना के इस्तीफे की मांग की। 

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बांग्लादेश में हाल ही में पुलिस और ज्यादातर छात्र प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें देखी गईं, जो विवादास्पद कोटा प्रणाली को समाप्त करने की मांग कर रहे थे, जिसमें 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में लड़ने वाले दिग्गजों के रिश्तेदारों के लिए 30 प्रतिशत सरकारी नौकरियां आरक्षित थीं।
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पीएमओ के एक प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने छात्रों के आक्रोश और भारी तनाव के बीच गणभवन (पीएम के आधिकारिक निवास) में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, वरिष्ठ शिक्षकों और कॉलेज के प्राचार्यों के साथ बैठक की। इस दौरान छात्रों के अभियान के कारण पैदा हुई स्थिति और उससे निपटने के तरीकों पर चर्चा की गई। बैठक रात 8:15 बजे (बीएसटी) शुरू हुई जो करीब तीन घंटे तक चली। 
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हजारों छात्र, उनके अभिभावक और आम लोग नौकरियों में कोटा प्रणाली पर हत्याओं और सामूहिक गिरफ्तारियों के खिलाफ ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार में एक विशाल विरोध रैली में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए, कुछ ने प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग की, जबकि छिटपुट झड़पों की खबरों के बीच कई अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन किए गए। विरोध करने वाले नेताओं ने रविवार से संपूर्ण सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान किया। अधिकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से सरकार के बजाय उनके साथ खड़े होने को कहा।

प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने राजधानी के प्रमुख मार्गों को अवरुद्ध कर दिया, जिससे यातायात रुक गया, जबकि पुलिस और अर्धसैनिक बल निगरानी करते रहे। छात्र आंदोलन के समन्वयकों ने अपनी एक सूत्री मांग की घोषणा की और सभी विश्वविद्यालय छात्रावासों को फिर से खोलने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया, क्योंकि अधिकारियों ने सड़क पर अभियान को नियंत्रित करने के लिए सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का आदेश दिया।

सेना प्रमुख जनरल वेकर-उज-जमान ने कॉन्फ्रेंस कॉल के माध्यम से ढाका में व्यक्तिगत रूप से और बाहर छावनियों में सभी सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक की और उनसे धैर्य और संयम के साथ कर्तव्यों का पालन करने का आग्रह किया। वहीं, शुक्रवार को पीएम हसीना ने आंदोलनकारी छात्रों से सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली पर हिंसा को समाप्त करने के लिए बातचीत के लिए अपने गणभवन आधिकारिक आवास पर मिलने का आग्रह किया।

विभिन्न पेशेवर समूहों के नेताओं के साथ बैठक के दौरान पीएम हसीना ने कहा, मैं फिर से कह रही हूं, वे (छात्र नेता) बातचीत के लिए मेरे पास आ सकते हैं, अगर वे चाहें तो अपने अभिभावकों को भी किसी भी समय अपने साथ ला सकते हैं। गणभवन का दरवाजा (उनके लिए) खुला है। मैं उनकी बात सुनना चाहती हूं। मैं संघर्ष नहीं चाहती। 

हालांकि, भेदभाव-विरोधी छात्र आंदोलन के समन्वयकों ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार के साथ बातचीत करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने देशव्यापी सड़क विरोध और 'संपूर्ण असहयोग' या सविनय अवज्ञा अभियान का आह्वान किया।


समन्वयकों में से एक आसिफ महमूद ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा, 'जब हमें कार्यालय में हिरासत में लिया गया, तो हमें प्रधानमंत्री से मिलने और आंदोलन को निलंबित करने के लिए कहा गया। यहां तक कि हमें जबरन गणभवन ले जाने की भी योजना थी।' कहा कि हम समझौता न करने वाले रुख की कीमत चुकाने को तैयार हैं, भले ही इसका मतलब मौत हो। हम छात्र-नागरिक विद्रोह में बांग्लादेश के प्रत्येक नागरिक की भागीदारी का आह्वान करते हैं।

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