फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Bangladesh Prime Minister Tarique Rahman calls 1971 crackdown by Pakistan

पाकिस्तान से दूरी बना रहा बांग्लादेश?: पीएम तारिक रहमान ने 1971 को किया याद, बोले- बेगुनाहों पर चलाई गोलियां

Wed, 25 Mar 2026 11:42 PM IST
Rahul Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Rahul Kumar Updated Wed, 25 Mar 2026 11:42 PM IST
सार

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बुधवार को 'नरसंहार दिवस' (25 मार्च) के अवसर पर एक ऐसा संदेश जारी किया है, जो मुहम्मद यूनुस की पिछली अंतरिम सरकार द्वारा अपनाई गई  नीति से एकदम उलट मानी जा रही है। 

 

विज्ञापन
Bangladesh Prime Minister Tarique Rahman calls 1971 crackdown by Pakistan
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान - फोटो : ANI Photos

विस्तार

25 मार्च बांग्लादेश के इतिहास में 'नरसंहार दिवस' के रूप में दर्ज है, जो 1971 की उस भयावह रात की याद दिलाता है जब मानवता शर्मसार हुई थी। 25 मार्च, 1971 की उस काली रात में पाकिस्तानी सेना द्वारा शुरू की गई सैन्य कार्रवाई ने हजारों निर्दोष नागरिकों की जान ले ली थी। ढाका की सड़कों पर गूंजती गोलियों की आवाज़ों और मासूमों की चीख-पुकार ने उस भीषण नरसंहार की नींव रखी, जिसने अंततः बांग्लादेश के स्वाधीनता संग्राम को जन्म दिया। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 1971 के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बलिदान को याद किया है। 

विज्ञापन


पाकिस्तान के कृत्य की पीएम ने आलोचना की
इस दिन को याद करते हुए, पीएम रहमान ने अपने संदेश में लिखा, "25 मार्च, 1971 को नरसंहार दिवस के रूप में दर्ज है। नरसंहार दिवस के अवसर पर, मैं सभी शहीदों को अपनी गहरी श्रद्धांजलि देता हूं। आजादी पसंद बांग्लादेश के इतिहास में, 25 मार्च, 1971 सबसे शर्मनाक और क्रूर दिनों में से एक है। उस अंधेरी रात में, पाकिस्तानी कब्जा करने वाली सेनाओं ने 'ऑपरेशन सर्चलाइट' के नाम पर बांग्लादेश के निहत्थे लोगों के खिलाफ इतिहास के सबसे भयानक नरसंहारों में से एक को अंजाम दिया। उन्होंने ढाका यूनिवर्सिटी, पिलखाना और राजरबाग पुलिस लाइन समेत कई जगहों पर शिक्षकों, जानकारों और बेगुनाह लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें कई लोग मारे गए।"
विज्ञापन


पीएम रहमान ने लिखा, "25 मार्च का नरसंहार एक सुनियोजित नरसंहार था। इस सुनियोजित हत्याकांड का विरोध क्यों नहीं किया जा सका, यह उस समय के राजनीतिक नेतृत्व की साफ भूमिका के बारे में ऐतिहासिक शोध का विषय है। हालांकि, 25 मार्च की रात को, चटगांव में 8वीं ईस्ट बंगाल रेजिमेंट ने 'वी रिवोल्ट' का ऐलान करके नरसंहार के खिलाफ आधिकारिक हथियारबंद विरोध शुरू किया। नरसंहार के इस विरोध के जरिए, नौ महीने तक चलने वाला लंबा हथियारबंद लिबरेशन वॉर शुरू हुआ।"
विज्ञापन
विज्ञापन


बांग्लादेशी पीएम ने आज की युवा पीढ़ी को देश की आजादी और इसके लिए कुर्बानी देने वाले लोगों के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज और आने वाली पीढ़ियों को आजादी की कीमत और अहमियत बताने के लिए, 25 मार्च के नरसंहार के बारे में जानना भी जरूरी है। आइए हम सब मिलकर राज्य और समाज में महान मुक्ति संग्राम की बराबरी, इंसानी इज्जत और सामाजिक न्याय की भावना को स्थापित करके शहीदों की कुर्बानियों का सम्मान करने की कोशिश करें। आइए हम सब मिलकर एक न्यायपूर्ण, विकसित, खुशहाल, आत्मनिर्भर और लोकतांत्रिक बांग्लादेश बनाने के लिए काम करें।

आखिर में प्रधानमंत्री रहमान ने कहा कि मैं अल्लाह से दुआ करता हूं कि सभी शहीदों की आत्माओं को माफी और हमेशा के लिए शांति दे। 25 मार्च को नरसंहार दिवस के मौके पर, मैं इस दिन को मनाने के लिए आयोजित सभी प्रोग्राम की सफलता की कामना करता हूं।

ये भी पढ़ें:  सर्वदलीय बैठक: 'हम PAK जैसे दलाल देश नहीं', ईरान युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता के सवाल पर जयशंकर की दो टूक

क्या है घटना?
बता दें, पाकिस्तान ने 1971 में ऑपरेशन सर्चलाइट चलाया था और अपनी ही सेना द्वारा 400,000 महिला नागरिकों के नरसंहार और सामूहिक बलात्कार के एक व्यवस्थित अभियान को मंजूरी दी थी।दरअसल, 1970 के आम चुनाव में पूर्व पाकिस्तान में शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व वाली आवामी लीग ने 162 में से 160 सीटों पर जीत दर्ज की। शेख मुजीबुर रहमान की लोकप्रियता काफी ज्यादा थी, जिसकी वजह से पाकिस्तानी हुकूमत ने शेख मुजीबुर रहमान की इस जीत को मानने से इनकार कर दिया था।


धीरे-धीरे हालात खराब होते गए और अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। 25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी सेना ने दमनकारी अभियान चलाना शुरू किया, जिसमें भारी तादाद में लोगों ने खुद को बचाने के लिए भारत में शरण ली थी। बांग्लादेश ने 1971 में 'मुक्ति संग्राम' के तहत पाकिस्तान से स्वाधीनता हासिल की थी। 25 मार्च से लेकर 16 दिसंबर 1971 तक बांग्लादेश में पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा नरसंहार किया गया।

इसके बाद भारत ने 4 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया, जो 16 दिसंबर को खत्म हुआ। इस युद्ध में भारत की बड़ी जीत हुई और पाकिस्तान के करीब 82 हजार सैनिकों को भारत ने बंदी बना लिया। इसके अलावा करीब 11 हजार नागरिक भी भारत की चपेट में आए। 1974 में पाकिस्तान ने मजबूरी में बांग्लादेश को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी, जिसके बाद इन 195 लोगों के खिलाफ दायर मामले को खत्म कर वापस उनके देश भेज दिया।

इनपुट: आईएएनएस
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed