{"_id":"66c82885d3811c971a0caa1a","slug":"bangladesh-people-not-angry-but-hurt-top-bnp-leader-on-sheikh-hasina-stay-in-india-2024-08-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bangladesh: 'बांग्लादेशी नाराज नहीं, लेकिन उन्हें दुख हुआ है', शेख हसीना के भारत में रहने पर बोले बीएनपी नेता","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Bangladesh: 'बांग्लादेशी नाराज नहीं, लेकिन उन्हें दुख हुआ है', शेख हसीना के भारत में रहने पर बोले बीएनपी नेता
Fri, 23 Aug 2024 12:16 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 23 Aug 2024 12:16 PM IST
सार
बांग्लादेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री अब्दुल मोईन खान ने यह भी कहा कि 'उनका देश तीन तरफ से भारत के साथ सीमा साझा करता है और भारत एक विशाल देश है, इसलिए ऐसी कोई वजह नहीं है कि भारत हमारा सबसे अच्छा दोस्त न हो।'
विज्ञापन
बीएनपी नेता अब्दुल मोईन खान
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि शेख हसीना के भारत में रहने से बांग्लादेश के लोग नाराज नहीं हैं, लेकिन उन्हें दुख जरूर हुआ है। बीएनपी नेता ने कहा कि भारत को अपने इस कदम पर फिर से विचार करना चाहिए। बांग्लादेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री अब्दुल मोईन खान ने यह भी कहा कि 'उनका देश तीन तरफ से भारत के साथ सीमा साझा करता है और भारत एक विशाल देश है, इसलिए ऐसी कोई वजह नहीं है कि भारत हमारा सबसे अच्छा दोस्त न हो।'
उल्लेखनीय है कि आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान हिंसा भड़कने के चलते शेख हसीना ने बीती 5 अगस्त को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और वह बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं थी। फिलहाल उनके भारत में ही होने की खबरें हैं। बांग्लादेश में अब मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सत्ता में है और हालात को सामान्य करने की कोशिश कर रही है। देश में चुनाव कराने की जिम्मेदारी अंतरिम सरकार पर ही है।
'बांग्लादेश के साथ रिश्तों का भविष्य भारत के फैसलों पर निर्भर'
बीएनपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे अब्दुल मोईन खान ने शेख हसीना के भारत में होने पर भारत-बांग्लादेश के संबंधों पर होने वाले असर पर कहा कि 'यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत क्या फैसला करता है। शेख हसीना के भारत में होने से बांग्लादेशी नाराज नहीं हैं, लेकिन उन्हें दुख जरूर हुआ है, क्योंकि बांग्लादेश के लोगों ने कभी इसकी उम्मीद नहीं की थी।'
विज्ञापन
बीएनपी नेता ने कहा कि 'अवामी लीग पार्टी और शेख हसीना के प्रति भारत का जो व्यवहार है, उससे देश में भारत विरोधी भावना पैदा हो रही है।' बीएनपी नेता ने कहा कि 'यह हैरान करने वाली बात है कि भारी उथल-पुथल के बाद देश में बहुत जल्दी हालात वापस सामान्य हो रहे हैं।' 77 वर्षीय अब्दुल मोईन खान बीएनपी की राष्ट्रीय स्थायी समिति के सदस्य भी हैं। बीएनपी का गठन 1978 में हुआ था।
'भारत को इस मानसिकता से बाहर निकलना होगा'
खान ने कहा कि 'यह भारत के नीति नियोजकों, राजनेताओं और सुरक्षा रणनीतिकारों पर निर्भर करता है कि वे उन्हें (शेख हसीना) कब तक अपने यहां रखते हैं। उन्होंने कहा कि 'भारत को यह तय करना होगा कि वह 'बांग्लादेशी लोगों का मित्र' बनना चाहता है या सिर्फ लोगों के एक वर्ग, या एक पार्टी या एक नेता का ही दोस्त बनना चाहता है। मुझे यकीन नहीं होता कि भारत, बांग्लादेश के लोगों, उनके मनोविज्ञान को समझने में कैसे विफल रहा। भारत को इस मानसिकता से बाहर निकलना होगा।'
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान हिंसा भड़कने के चलते शेख हसीना ने बीती 5 अगस्त को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और वह बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं थी। फिलहाल उनके भारत में ही होने की खबरें हैं। बांग्लादेश में अब मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सत्ता में है और हालात को सामान्य करने की कोशिश कर रही है। देश में चुनाव कराने की जिम्मेदारी अंतरिम सरकार पर ही है।
विज्ञापन
'बांग्लादेश के साथ रिश्तों का भविष्य भारत के फैसलों पर निर्भर'
बीएनपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे अब्दुल मोईन खान ने शेख हसीना के भारत में होने पर भारत-बांग्लादेश के संबंधों पर होने वाले असर पर कहा कि 'यह इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत क्या फैसला करता है। शेख हसीना के भारत में होने से बांग्लादेशी नाराज नहीं हैं, लेकिन उन्हें दुख जरूर हुआ है, क्योंकि बांग्लादेश के लोगों ने कभी इसकी उम्मीद नहीं की थी।'
विज्ञापन
बीएनपी नेता ने कहा कि 'अवामी लीग पार्टी और शेख हसीना के प्रति भारत का जो व्यवहार है, उससे देश में भारत विरोधी भावना पैदा हो रही है।' बीएनपी नेता ने कहा कि 'यह हैरान करने वाली बात है कि भारी उथल-पुथल के बाद देश में बहुत जल्दी हालात वापस सामान्य हो रहे हैं।' 77 वर्षीय अब्दुल मोईन खान बीएनपी की राष्ट्रीय स्थायी समिति के सदस्य भी हैं। बीएनपी का गठन 1978 में हुआ था।
'भारत को इस मानसिकता से बाहर निकलना होगा'
खान ने कहा कि 'यह भारत के नीति नियोजकों, राजनेताओं और सुरक्षा रणनीतिकारों पर निर्भर करता है कि वे उन्हें (शेख हसीना) कब तक अपने यहां रखते हैं। उन्होंने कहा कि 'भारत को यह तय करना होगा कि वह 'बांग्लादेशी लोगों का मित्र' बनना चाहता है या सिर्फ लोगों के एक वर्ग, या एक पार्टी या एक नेता का ही दोस्त बनना चाहता है। मुझे यकीन नहीं होता कि भारत, बांग्लादेश के लोगों, उनके मनोविज्ञान को समझने में कैसे विफल रहा। भारत को इस मानसिकता से बाहर निकलना होगा।'
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन