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Bangladesh: 'हम साथ लड़े और साथ ही रहेंगे', हिंदुओं को लेकर मोहम्मद यूनुस ने छात्रों से की भावुक अपील
Sun, 11 Aug 2024 10:29 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 11 Aug 2024 10:29 AM IST
सार
Bangladesh Students Protests: मोहम्मद यूनुस ने आंदोलन कर रहे छात्रों से अल्पसंख्यक हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों को बचाने की अपील करते हुए लोगों से राष्ट्रीय एकता मजबूत करने की भावुक अपील की।
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मोहम्मद यूनुस और बांग्लादेश में विरोध करते अल्पसंख्यक
- फोटो : डीडी न्यूज/पीटीआई
विस्तार
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा के खिलाफ अब बांग्लादेश का हिंदू समुदाय और अन्य अल्पसंख्यक लोग एकजुट हो गए हैं। शनिवार को लाखों की संख्या में अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और अपनी एकजुटता दिखाई। बांग्लादेश की राजधानी ढाका और देश के दूसरे सबसे बड़े शहर चटगांव में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
मोहम्मद यूनुस ने की भावुक अपील
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के नेता मोहम्मद यूनुस ने भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा के प्रति नाराजगी जताई और इसे घृणित करार दिया। मोहम्मद यूनुस ने आंदोलन कर रहे छात्रों से अल्पसंख्यक हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों को बचाने की अपील करते हुए कहा कि 'क्या ये हमारे देश के लोग नहीं हैं? आपने देश बचाया तो क्या आप कुछ परिवारों को नहीं बचा सकते?...आपको कहना चाहिए कि किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। वे भी हमारे भाई हैं। हम साथ लड़े और हम साथ ही रहेंगे।'
शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से ही निशाने पर हैं अल्पसंख्यक
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से अल्पसंख्यकों के खिलाफ देश के 52 जिलों में हिंसा की 205 घटनाएं हो चुकी हैं। इन हिंसा की घटनाओं में सैंकड़ों अल्पसंख्यक घायल हुए हैं और कई के घर-मकान तबाह कर दिए गए हैं। कई हिंदू मंदिरों को भी निशाना बनाया गया है। हिंसा की घटनाओं में शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के दो हिंदू नेताओं की भी हत्या कर दी गई है। हजारों की संख्या में हिंदू समुदाय के लोग देश छोड़ने की फिराक में हैं।
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शनिवार को बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग ढाका की सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा करने वाले लोगों के खिलाफ जल्द और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही संसद में 10 प्रतिशत सीटें अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित होनी चाहिए। अल्पसंख्यक सुरक्षा कानून बनाया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने कई घंटे तक सड़कें जाम रखीं। इस दौरान कई मुस्लिमों और छात्रों ने भी अल्पसंख्यकों का समर्थन किया।
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मोहम्मद यूनुस ने की भावुक अपील
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के नेता मोहम्मद यूनुस ने भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा के प्रति नाराजगी जताई और इसे घृणित करार दिया। मोहम्मद यूनुस ने आंदोलन कर रहे छात्रों से अल्पसंख्यक हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों को बचाने की अपील करते हुए कहा कि 'क्या ये हमारे देश के लोग नहीं हैं? आपने देश बचाया तो क्या आप कुछ परिवारों को नहीं बचा सकते?...आपको कहना चाहिए कि किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। वे भी हमारे भाई हैं। हम साथ लड़े और हम साथ ही रहेंगे।'
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शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से ही निशाने पर हैं अल्पसंख्यक
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से अल्पसंख्यकों के खिलाफ देश के 52 जिलों में हिंसा की 205 घटनाएं हो चुकी हैं। इन हिंसा की घटनाओं में सैंकड़ों अल्पसंख्यक घायल हुए हैं और कई के घर-मकान तबाह कर दिए गए हैं। कई हिंदू मंदिरों को भी निशाना बनाया गया है। हिंसा की घटनाओं में शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के दो हिंदू नेताओं की भी हत्या कर दी गई है। हजारों की संख्या में हिंदू समुदाय के लोग देश छोड़ने की फिराक में हैं।
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शनिवार को बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग ढाका की सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा करने वाले लोगों के खिलाफ जल्द और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही संसद में 10 प्रतिशत सीटें अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित होनी चाहिए। अल्पसंख्यक सुरक्षा कानून बनाया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने कई घंटे तक सड़कें जाम रखीं। इस दौरान कई मुस्लिमों और छात्रों ने भी अल्पसंख्यकों का समर्थन किया।