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कौन हैं नाहिद इस्लाम?: बांग्लादेश में कराया हसीना का तख्तापलट, अब तारिक रहमान को दी कुर्सी की धमकी
Sun, 20 Sep 2026 10:55 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 20 Sep 2026 10:55 AM IST
सार
बांग्लादेश के छात्र आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल नाहिद इस्लाम ने देश की नई सत्ता को जनता की बुनियादी जरूरतों को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर नई सरकार जनता की मांगों को पूरा नहीं कर पाई, तो उसे भी सत्ता से बेदखल कर दिया जाएगा।
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नाहिद इस्लाम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बांग्लादेश में शेख हसीना की 15 साल पुरानी हुकूमत को उखाड़ फेंकने वाले छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरे और नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने अब देश की नई सत्ता को भी चेतावनी दे दी है। नाहिद ने दो-टूक कहा है कि अगर नई सरकार जनता की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं कर पाई, तो उसे भी सत्ता से बेदखल कर दिया जाएगा।
नाहिद ने नई सरकार को दी चेतावनी
नाहिद इस्लाम ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि सत्ता में बदलाव केवल चेहरों का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम जनता को बिजली, साफ पानी, पक्की सड़कें, बेहतर स्वास्थ्य-अस्पताल सेवाएं, सस्ती शिक्षा और महंगाई से राहत जैसी बुनियादी सुविधाएं तुरंत मिलनी चाहिए। नाहिद ने आगाह किया कि अगर नई हुकूमत भी जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, तो हम एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे और इस सरकार को भी पिछली सरकार की तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
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आंदोलन के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे नाहिद
गौरतलब है कि इससे पहले बांग्लादेश के बड़े राजनीतिक उथल-पुथल के केंद्र में नाहिद इस्लाम रहे थे। उनके नेतृत्व में ही छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूटा, जिसके दबाव में आकर प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देकर मुल्क छोड़ना पड़ा।
इस आंदोलन के दौरान नाहिद को दमन का भी सामना करना पड़ा था। आंदोलन के दौरान 20 जुलाई की सुबह उन्होंने पुलिस पर खुद को गैर-कानूनी तरीके से उठाने का आरोप लगाया था। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने ऐसी किसी भी कार्रवाई से इनकार किया।
उसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें पुलिसकर्मी उन्हें एक गाड़ी में बैठाते दिख रहे थे। इस घटना के लगभग 24 घंटे बाद नाहिद एक पुल के नीचे अचेत मिले। नाहिद ने बताया कि पुलिस ने उन्हें इतनी बेरहमी से पीटा था कि वे अपनी सुध-बुध खो बैठे थे।
साथियों को भी बनाया गया निशाना
नाहिद से पहले उनके दो करीबी साथियों- आसिफ महमूद और अबू बकर को भी 19 जुलाई को पकड़ा गया था। करीब छह दिनों तक कैद में रखने के बाद उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर उन्हें एक सुनसान इलाके में फेंक दिया गया। घायल होने के बाद ये सभी एक अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे थे। लेकिन 26 जुलाई को पुलिस ने अस्पताल से ही इन्हें फिर से पकड़ लिया। पुलिस का तर्क था कि यह कदम छात्रों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। नाहिद का आरोप है कि हिरासत में रहते हुए उनसे आंदोलन वापस लेने के वीडियो भी बनवाए गए।
जेल से निकलते ही तेज किया था विद्रोह
पुलिस की गिरफ्त से बाहर आते ही नाहिद ने कदम पीछे खींचने के बजाय प्रदर्शन को और अधिक उग्र कर दिया था। धीरे-धीरे छात्रों का यह सैलाब इतना विशाल हो गया कि शेख हसीना के पास कुर्सी छोड़ने और देश से भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। अब वही नाहिद इस्लाम एक बार फिर बांग्लादेश की नई सरकार को चेतावनी दे रहे हैं और सरकार की कार्यप्रणाली पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
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नाहिद ने नई सरकार को दी चेतावनी
नाहिद इस्लाम ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि सत्ता में बदलाव केवल चेहरों का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आम जनता को बिजली, साफ पानी, पक्की सड़कें, बेहतर स्वास्थ्य-अस्पताल सेवाएं, सस्ती शिक्षा और महंगाई से राहत जैसी बुनियादी सुविधाएं तुरंत मिलनी चाहिए। नाहिद ने आगाह किया कि अगर नई हुकूमत भी जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, तो हम एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे और इस सरकार को भी पिछली सरकार की तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
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आंदोलन के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे नाहिद
गौरतलब है कि इससे पहले बांग्लादेश के बड़े राजनीतिक उथल-पुथल के केंद्र में नाहिद इस्लाम रहे थे। उनके नेतृत्व में ही छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूटा, जिसके दबाव में आकर प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देकर मुल्क छोड़ना पड़ा।
इस आंदोलन के दौरान नाहिद को दमन का भी सामना करना पड़ा था। आंदोलन के दौरान 20 जुलाई की सुबह उन्होंने पुलिस पर खुद को गैर-कानूनी तरीके से उठाने का आरोप लगाया था। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने ऐसी किसी भी कार्रवाई से इनकार किया।
उसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें पुलिसकर्मी उन्हें एक गाड़ी में बैठाते दिख रहे थे। इस घटना के लगभग 24 घंटे बाद नाहिद एक पुल के नीचे अचेत मिले। नाहिद ने बताया कि पुलिस ने उन्हें इतनी बेरहमी से पीटा था कि वे अपनी सुध-बुध खो बैठे थे।
साथियों को भी बनाया गया निशाना
नाहिद से पहले उनके दो करीबी साथियों- आसिफ महमूद और अबू बकर को भी 19 जुलाई को पकड़ा गया था। करीब छह दिनों तक कैद में रखने के बाद उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर उन्हें एक सुनसान इलाके में फेंक दिया गया। घायल होने के बाद ये सभी एक अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे थे। लेकिन 26 जुलाई को पुलिस ने अस्पताल से ही इन्हें फिर से पकड़ लिया। पुलिस का तर्क था कि यह कदम छात्रों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। नाहिद का आरोप है कि हिरासत में रहते हुए उनसे आंदोलन वापस लेने के वीडियो भी बनवाए गए।
जेल से निकलते ही तेज किया था विद्रोह
पुलिस की गिरफ्त से बाहर आते ही नाहिद ने कदम पीछे खींचने के बजाय प्रदर्शन को और अधिक उग्र कर दिया था। धीरे-धीरे छात्रों का यह सैलाब इतना विशाल हो गया कि शेख हसीना के पास कुर्सी छोड़ने और देश से भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। अब वही नाहिद इस्लाम एक बार फिर बांग्लादेश की नई सरकार को चेतावनी दे रहे हैं और सरकार की कार्यप्रणाली पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।