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कट्टरपंथ हावी: बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों पर नियंत्रण नहीं, लालोन फकीर स्मृति समारोह रोका

Fri, 14 Feb 2025 06:51 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, ढाका
एजेंसी, ढाका Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Fri, 14 Feb 2025 06:51 AM IST
सार

केंद्र के महासचिव मोफिजुर रहमान लाल्टू ने कहा, 5 अगस्त को फासीवादी हसीना सरकार के पतन के बाद से कट्टरपंथी देश की सियासत और सांस्कृतिक मामलों में हावी हैं। अंतरिम सरकार इन जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने का संकेत नहीं दे रही है।

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Bangladesh Islamic fundamentalists stopped Lalon Fakir memorable ceremony
बांग्लादेश में हिंसा (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों पर सरकारी नियंत्रण नहीं है। इन गुटों ने  दार्शनिक व सूफी संत लालोन फकीर की स्मृति में आयोजित होने वाला समारोह रद्द करा दिया। बांग्लादेश के सबसे बड़े इस्लामी समूह हिफाजत-ए-इस्लाम की आपत्ति पर इसे रद्द करना पड़ा। फकीर लालोन सैजी की 134वीं पुण्यतिथि मनाई जानी थी। इनकी विचारधारा से रवींद्रनाथ टैगोर भी प्रभावित रहे हैं।

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बिबरतन सांस्कृतिक केंद्र ने भी घटना की निंदा की है। केंद्र के महासचिव मोफिजुर रहमान लाल्टू ने कहा, 5 अगस्त को फासीवादी हसीना सरकार के पतन के बाद से कट्टरपंथी देश की सियासत और सांस्कृतिक मामलों में हावी हैं। अंतरिम सरकार इन जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने का संकेत नहीं दे रही है।
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जातिवाद, नस्ली संघर्ष के विरुद्ध थे लालोन
फकीर लालोन के दर्शन में जाति, वर्ग और पंथ के सभी भेदों को खारिज किया गया है। वह धार्मिक संघर्षों और नस्लवाद के खिलाफ रहे थे। उनके अनुयायी भी कट्टरपंथ के खिलाफ हैं। इसी बात से बांग्लादेश के इस्लामी संगठन खफा हैं और उन्होंने ऐसे समारोह को ही रद्द करने का फरमान सुना दिया। वे लालोन फकीर का अस्तित्व खत्म करना चाहते हैं।
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मानवाधिकार समूह ने कहा, सरकारी एजेंसियां निष्पक्ष रहें
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निगरानी संस्था (एचआरडब्ल्यू) ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया है कि देश में सुरक्षा बलों को निष्पक्ष रूप से काम करने दिया जाए। उसने कहा कि सियासी हिंसा से निपटने में कानून का शासन को बनाए रखा जाए। संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए, एचआरडब्ल्यू ने कहा, अगस्त 2024 में पीएम शेख हसीना की सरकार को हटाने के बाद हुई अशांति के दौरान कई हत्याएं, यातनाएं और सामूहिक गिरफ्तारियां हुईं।

  • एचआरडब्ल्यू ने एक बयान में कहा, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में पाया गया है कि पुलिस, सीमा रक्षक, रैपिड एक्शन बटालियन और खुफिया एजेंसियां व कानून प्रवर्तन एजेंसियां अगस्त 2024 में विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन में लिप्त रहे। 
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