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Bangladesh: भारतीय जवानों के सम्मान में बनाया जा रहा स्मारक, 1971 के मुक्ति युद्ध में शहीद सैनिकों को समर्पित

Mon, 30 Oct 2023 03:14 PM IST
आदर्श शर्मा वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, ढाका Published by: आदर्श शर्मा Updated Mon, 30 Oct 2023 03:14 PM IST
सार

1971 को बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में जान न्यौछावर करने वाले भारतीय सैनिकों के सम्मान में बांग्लादेश सैन्य स्मारक का निर्माण कर रहा है। जिसमें शहीद सैनिकों के नामों को उकेरा जाएगा। 

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Bangladesh is building a memorial in honor of Indian soldiers
बांग्लादेश में बनाए जा रहे सैन्य स्मारक का डिजाइन - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत-पाकिस्तान 1971 युद्ध में प्राण न्यौछावर करने वाले भारतीय सैनिकों के सम्मान में बांग्लादेश स्मारक बना रहा है। जिसको लेकर सोशल मीडिया और विशेषज्ञों की तमाम प्रतिक्रियाएं सामने आई है। स्मारक का डिजाइन दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता का प्रतीक है। बता दें स्मारक के डिजाइन में कई मूल विषयों को समाहित किया गया है। आईये समझते है कि बांग्लादेश में बनाए जा रहे स्मारक में क्या है खास?
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मैत्रीय संबंध का प्रतीक सैन्य स्मारक
बांग्लादेश भारतीय सैनिकों को समर्पित अपने पहले युद्ध स्मारक की तैयारी में जुट चुका है। यह स्मारकीय भाव भारतीय सशस्त्र बलों के प्रति गहरा आभार व्यक्त करता है, जिनके अटूट प्रयासों ने 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस युद्ध स्मारक की आधारशिला मार्च 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना द्वारा रखी गई थी। भारत-बांग्लादेश सीमा के पास आशूगंज में चार एकड़ के विशाल विस्तार पर स्थित स्मारक स्थल ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह स्थान युद्ध के दौरान कई किस्सों को संजोए हुए हैं। 1,600 से अधिक शहीद भारतीय सैनिकों के नाम स्मारक की दीवारों पर उकेरे जाएंगे।
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स्मारक का डिजाइन मित्रता का प्रतीक
स्मारक का डिजाइन दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता का प्रतीक है। इसमें दोस्ती के मूल विषय का प्रतिनिधित्व करने वाली एक संरचना है, जो पसली पिंजरे की सुरक्षात्मक भूमिका, दिल और आत्मा की सुरक्षा का प्रतीक है। इस अवधारणा में 'उड़ने वाले कबूतरों' को भी शामिल किया गया है, जो इन बहादुर सैनिकों के बलिदान के माध्यम से प्राप्त शांति का प्रतीक है। स्मारक को धरातल पर बनाने के लिए कई अन्य प्रमुख ने सहयोग है जिनमें स्मारक के प्रमुख डिजाइनर आसिफुर रहमान भुइयां, बांग्लादेश के लिबरेशन युद्ध मामलों के मंत्री एकेएम मोजम्मेल हक, 1971 के युद्ध के दौरान स्वतंत्रता सेनानी और मुक्ति युद्ध मंत्रालय के सचिव इशरत जहां शामिल हैं।
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सैन्य स्मारक में क्या-क्या खास?
स्मारक परिसर में एक मैदान भी शामिल है। जिन्हें आगंतुको को एक शांत और जानकारी पूर्ण अनुभव देने के लिए डिजाइन किया है। शहीदों के सम्मान में ध्वजारोहण समारोह, एक संग्रहालय, एक किताबों की दुकान, एक बच्चों का पार्क और जनता की सुविधा के लिए एक फूड कोर्ट शामिल है। इस स्मारक की अवधारणा लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर द्वारा दी गई थी। जिन्होंने बांग्लादेशी प्रधानमंत्री को यह विचार प्रस्तावित किया, जिसमें बांग्लादेश की मुक्ति के लिए अंतिम बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों के सम्मान के महत्व पर जोर दिया गया।


इतिहास पर एक नजर
1971 का युद्ध बांग्लादेश, जिसे उस समय पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था, में सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के जवाब में शुरू किया गया था। स्थिति तब बिगड़ गई जब पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सर्चलाइट शुरू किया और नरसंहार के कृत्यों को अंजाम दिया। बढ़ती हिंसा के सामने भारत ने बांग्लादेश के लोगों के समर्थन में तीन दिसंबर 1971 को संघर्ष में प्रवेश किया। युद्ध 16  दिसंबर 1971 में खत्म हुआ। जिसमें पाकिस्तानी सेना का आत्मसमर्पण और बांग्लादेश की सफल मुक्ति शामिल थी। भारत में इस जीत को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो न केवल सैनिकों के बलिदान को दर्शाता है, बल्कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच गहरे साझा इतिहास और दोस्ती को भी उल्लेखित करता है।
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