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Bangladesh: 2004 में शेख हसीना की रैली पर हमले के मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सभी आरोपी बरी
Sun, 01 Dec 2024 04:54 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 01 Dec 2024 04:54 PM IST
सार
Bangladesh: बांग्लादेश की हाईकोर्ट ने रविवार को निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए 2004 में अवामी लीग की नेता शेख हसीना की रैली पर हुए ग्रेनेड हमले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारीक रहमान और पूर्व राज्य मंत्री लुत्फोज्जमान बाबर भी शामिल हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
बांग्लादेश की हाईकोर्ट ने रविवार को निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए 2004 में अवामी लीग की नेता शेख हसीना की रैली पर हुए ग्रेनेड हमले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारीक रहमान और पूर्व राज्य मंत्री लुत्फोज्जमान बाबर भी शामिल हैं। अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया और तारीक रहमान सहित सभी दोषियों को बरी कर दिया।
तारीक रहमान बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। उन्हें 2004 के इस हमले में आरोपी बनाया गया था। हमले में 24 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 300 लोग घायल हुए थे। यह हमला ढाका के बंगबंधु एवेन्यू पर अवामी लीग की रैली में हुआ था। जस्टिस ए.के.एम. असदुज्जमान और जस्टिस सैयद इनायत हुसैन की पीठ ने सभी 49 आरोपियों को बरी कर दिया और कहा कि निचली अदालत का फैसला 'गैरकानूनी' था।
हाईकोर्ट ने मौत और हमले से जुड़े मामलों में दायर अपीलों पर सुनवाई की, जिसके बाद यह फैसला दिया। निचली अदालत ने इस मामले में एक आरोपी मुंशी अब्दुल हन्नान के कबूलनामे पर फैसला सुनाया था, जो प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी (एचयूजेआई) से जुड़ा हुआ था। हन्नान को एक अन्य मामले में फांसी की सजा दी जा चुकी है। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी का कबूलनामा कोई प्रमाण नहीं है, क्योंकि यह दबाव दिया गया था और मजिस्ट्रेट ने इसकी ठीक से जांच नहीं की थी।
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21 नवंबर को पीठ ने मौत की सजा की पुष्टि के लिए निचली अदालत के दस्तावेज और मामले में दोषी अभियुक्तों की ओर से दायर अपीलों को क्यूरिया एडवाइजरी वल्ट (जिसका मतलब है कि फैसला किसी भी दिन सुनाया जाएगा) के तहत रखा। मौत की सजा की पुष्टि और अपीलों पर सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि निचली अदालत के फैसले को रद्द किया जाए, क्योंकि उनके खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं हैं।इस बीच, राज्य की ओर से पेश हुए उप अटॉर्नी जनरल मोहम्म जशिम सरकार और मोहम्मद रसेल अहमद ने हाईकोर्ट पीठ से अनुरोध किया कि निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा जाए, क्योंकि आरोपियों के खिलाफ आरोपी पूरी तरह से साबित किए जा चुके हैं।
हसीना उस समय विपक्ष की नेता थीं। 21 अगस्त 2004 को हुए इस हमले में वह बाल-बाल बची थीं। लेकिन इसमें 24 लोग मारे गए थे। हसीना आतंकवाद के खिलाफ रैली को संबोधित कर रही थीं, तभी कई ग्रेनेड रैली पर फेंके गए थे। ढाका की एक अदालत ने 10 अक्तूबर 2018 को हमलों से जुड़े दो मामलों में 19 लोगों को मौत की सजा सुनाई थी, जिनमें बार भी शामिल था। 19 अन्य लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी गई, जिनमें रहमान भी शामिल था, जब अब लंदन में हैं और 11 अन्य को विभिन्न कारावास की सजा दी गई।
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तारीक रहमान बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। उन्हें 2004 के इस हमले में आरोपी बनाया गया था। हमले में 24 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 300 लोग घायल हुए थे। यह हमला ढाका के बंगबंधु एवेन्यू पर अवामी लीग की रैली में हुआ था। जस्टिस ए.के.एम. असदुज्जमान और जस्टिस सैयद इनायत हुसैन की पीठ ने सभी 49 आरोपियों को बरी कर दिया और कहा कि निचली अदालत का फैसला 'गैरकानूनी' था।
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हाईकोर्ट ने मौत और हमले से जुड़े मामलों में दायर अपीलों पर सुनवाई की, जिसके बाद यह फैसला दिया। निचली अदालत ने इस मामले में एक आरोपी मुंशी अब्दुल हन्नान के कबूलनामे पर फैसला सुनाया था, जो प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी (एचयूजेआई) से जुड़ा हुआ था। हन्नान को एक अन्य मामले में फांसी की सजा दी जा चुकी है। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी का कबूलनामा कोई प्रमाण नहीं है, क्योंकि यह दबाव दिया गया था और मजिस्ट्रेट ने इसकी ठीक से जांच नहीं की थी।
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21 नवंबर को पीठ ने मौत की सजा की पुष्टि के लिए निचली अदालत के दस्तावेज और मामले में दोषी अभियुक्तों की ओर से दायर अपीलों को क्यूरिया एडवाइजरी वल्ट (जिसका मतलब है कि फैसला किसी भी दिन सुनाया जाएगा) के तहत रखा। मौत की सजा की पुष्टि और अपीलों पर सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि निचली अदालत के फैसले को रद्द किया जाए, क्योंकि उनके खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं हैं।इस बीच, राज्य की ओर से पेश हुए उप अटॉर्नी जनरल मोहम्म जशिम सरकार और मोहम्मद रसेल अहमद ने हाईकोर्ट पीठ से अनुरोध किया कि निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा जाए, क्योंकि आरोपियों के खिलाफ आरोपी पूरी तरह से साबित किए जा चुके हैं।
हसीना उस समय विपक्ष की नेता थीं। 21 अगस्त 2004 को हुए इस हमले में वह बाल-बाल बची थीं। लेकिन इसमें 24 लोग मारे गए थे। हसीना आतंकवाद के खिलाफ रैली को संबोधित कर रही थीं, तभी कई ग्रेनेड रैली पर फेंके गए थे। ढाका की एक अदालत ने 10 अक्तूबर 2018 को हमलों से जुड़े दो मामलों में 19 लोगों को मौत की सजा सुनाई थी, जिनमें बार भी शामिल था। 19 अन्य लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी गई, जिनमें रहमान भी शामिल था, जब अब लंदन में हैं और 11 अन्य को विभिन्न कारावास की सजा दी गई।
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