{"_id":"698c59e246056557fe0ca3f3","slug":"bangladesh-election-2026-former-ambassador-mohammed-haroon-al-rashid-raised-questions-on-polls-2026-02-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश के पूर्व राजदूत ने उठाए सवाल, कहा- इतिहास का सबसे खराब होगा ये चुनाव","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश के पूर्व राजदूत ने उठाए सवाल, कहा- इतिहास का सबसे खराब होगा ये चुनाव
Wed, 11 Feb 2026 03:58 PM IST
लव गौर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: लव गौर
Updated Wed, 11 Feb 2026 03:58 PM IST
सार
Bangladesh Election 2026: 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले पूर्व राजदूत (निर्वासित ) मोहम्मद हारून अल राशिद ने बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक थिंक टैंक से बात करते हुए दावा किया कि ये चुनाव बांग्लादेश के इतिहास का सबसे बदसूरत चुनाव साबित होगा।
विज्ञापन
मुहम्मद यूनुस
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने जा रहे हैं। शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद देश में यह पहला चुनाव है। जिस पर पूरी दुनिया की नजर है। इस बीच चुनावों से ठीक पहले निर्वासित पूर्व राजदूत मोहम्मद हारून अल राशिद ने बड़े आरोप लगाए हैं।
अनुभवी राजदूत (अब निर्वासित ) मोहम्मद हारून अल राशिद ने चुनावों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि बांग्लादेश के अब तक के इतिहास का ये 'सबसे बदसूरत' यानी खराब चुनाव होगा।
एक बड़े थिंक टैंक से बातचीत में मोहम्मद हारून अल राशिद ने चुनावों पर अपनी राय रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस, जो लंबे समय से खराब चीजों को अच्छाई के तौर पर रीपैकेज करके खुद को बचाए हुए हैं, अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते।
विज्ञापन
'इस बार यूनुस बच नहीं पाएंगे'
श्रीलंका के थिंक टैंक ट्रिंको सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (टीएसएसटी) के साथ बातचीत में राशिद ने कहा, 'यूनुस हर चीज को 'खूबसूरत' कहते हैं, लेकिन मैं मानता हूं यह चुनाव बांग्लादेश के इतिहास का सबसे बदसूरत चेहरा दिखाएगा। मैं ऐसा कोई बढ़ा-चढ़ाकर बोलने के लिए नहीं कर रहा। यूनुस लंबे समय से घटिया चीजों को अच्छाई के तौर पर रीपैकेज कर खुद को बचा रहे हैं। इस बार, वह बच नहीं पाएंगे।'
उन्होंने आगे कहा कि जो हो रहा है वह असली चुनाव नहीं है, बल्कि 2024 के 'जिहादी गठबंधन' के दो गुटों के बीच मुकाबला है, जिसने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाकर सत्ता पर कब्जा जमाया है। उन्होंने तर्क दिया कि एक तरफ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उसके सहयोगी हैं, जबकि दूसरी तरफ कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी और उसके साथी हैं।
बीएनपी और जमात की इनसे की तुलना
टीएसएसटी से बात करते हुए राशिद ने कहा कि विचारधारा के हिसाब से बीएनपी मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड जैसी है भले ही स्ट्रक्चर के हिसाब से नहीं, जबकि जमात फलस्तीन में हमास जैसी है। उन्होंने कहा कि दोनों में से कोई भी लोकतांत्रिक मूल्यों को सामने नहीं रखता और दोनों ही इस्लामिक कट्टरपंथ का प्रतिनिधित्व करते हैं।
राशिद ने आगे कहा, 'किसी भी असली लोकतांत्रिक पार्टी को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी गई है। यूनुस खुलेआम नतीजे को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वह अगली सरकार के केंद्र में बने रहें। उनके पसंदीदा साथी जमात और उससे जुड़े लोग हैं, जिसमें एनसीपी भी शामिल है। इसके कैडर ने 2024 की जिहादी हिंसा के दौरान तथाकथित कोटा मूवमेंट के नाम पर सुसाइड ऑपरेटिव के तौर पर काम किया था।'
बांग्लादेश की घटना को बताया पूरी इंसानियत के लिए झटका
उन्होंने जोर देकर कहा कि आप चाहें तो इसे इलेक्शन कह सकते हैं। यह ऐसा कुछ नहीं है। राशिद से जब पूछा गया कि एक ऐसा देश जो पहले धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र के तौर पर पहचाना जाता था, अब उसे आतंक के चश्मे से देखा जाने लगा है। ऐसे में वे बांग्लादेश की बदलती छवि को कैसे देखते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि यह बदलाव न सिर्फ बांग्लादेश के लिए बल्कि 21वीं सदी में पूरी इंसानियत के लिए एक झटका है।
ये भी पढ़ें: बांग्लादेश चुनाव की तैयारी: आधे से ज्यादा मतदान केंद्र संवेदनशील, कड़ी सुरक्षा के बीच लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा
उन्होंने आगे कहा, "यूनुस के हड़पे हुए अठारह महीनों के राज से हुई तबाही ने दशकों की तरक्की को खत्म कर दिया है। इसने शेख हसीना के राज में बड़ी मेहनत से बनाई गई अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है और बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष पहचान, ऐतिहासिक यादों और उसके मुक्ति संग्राम की नैतिक विरासत को एक प्रक्रिया के तहत खत्म कर दिया है। यह सिर्फ राजनीतिक गिरावट नहीं है; यह पूरी सभ्यता के खिलाफ बर्बरता है।"
अन्य वीडियो
विज्ञापन
अनुभवी राजदूत (अब निर्वासित ) मोहम्मद हारून अल राशिद ने चुनावों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि बांग्लादेश के अब तक के इतिहास का ये 'सबसे बदसूरत' यानी खराब चुनाव होगा।
विज्ञापन
एक बड़े थिंक टैंक से बातचीत में मोहम्मद हारून अल राशिद ने चुनावों पर अपनी राय रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस, जो लंबे समय से खराब चीजों को अच्छाई के तौर पर रीपैकेज करके खुद को बचाए हुए हैं, अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते।
विज्ञापन
'इस बार यूनुस बच नहीं पाएंगे'
श्रीलंका के थिंक टैंक ट्रिंको सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (टीएसएसटी) के साथ बातचीत में राशिद ने कहा, 'यूनुस हर चीज को 'खूबसूरत' कहते हैं, लेकिन मैं मानता हूं यह चुनाव बांग्लादेश के इतिहास का सबसे बदसूरत चेहरा दिखाएगा। मैं ऐसा कोई बढ़ा-चढ़ाकर बोलने के लिए नहीं कर रहा। यूनुस लंबे समय से घटिया चीजों को अच्छाई के तौर पर रीपैकेज कर खुद को बचा रहे हैं। इस बार, वह बच नहीं पाएंगे।'
उन्होंने आगे कहा कि जो हो रहा है वह असली चुनाव नहीं है, बल्कि 2024 के 'जिहादी गठबंधन' के दो गुटों के बीच मुकाबला है, जिसने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाकर सत्ता पर कब्जा जमाया है। उन्होंने तर्क दिया कि एक तरफ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उसके सहयोगी हैं, जबकि दूसरी तरफ कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी और उसके साथी हैं।
बीएनपी और जमात की इनसे की तुलना
टीएसएसटी से बात करते हुए राशिद ने कहा कि विचारधारा के हिसाब से बीएनपी मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड जैसी है भले ही स्ट्रक्चर के हिसाब से नहीं, जबकि जमात फलस्तीन में हमास जैसी है। उन्होंने कहा कि दोनों में से कोई भी लोकतांत्रिक मूल्यों को सामने नहीं रखता और दोनों ही इस्लामिक कट्टरपंथ का प्रतिनिधित्व करते हैं।
राशिद ने आगे कहा, 'किसी भी असली लोकतांत्रिक पार्टी को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी गई है। यूनुस खुलेआम नतीजे को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वह अगली सरकार के केंद्र में बने रहें। उनके पसंदीदा साथी जमात और उससे जुड़े लोग हैं, जिसमें एनसीपी भी शामिल है। इसके कैडर ने 2024 की जिहादी हिंसा के दौरान तथाकथित कोटा मूवमेंट के नाम पर सुसाइड ऑपरेटिव के तौर पर काम किया था।'
बांग्लादेश की घटना को बताया पूरी इंसानियत के लिए झटका
उन्होंने जोर देकर कहा कि आप चाहें तो इसे इलेक्शन कह सकते हैं। यह ऐसा कुछ नहीं है। राशिद से जब पूछा गया कि एक ऐसा देश जो पहले धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र के तौर पर पहचाना जाता था, अब उसे आतंक के चश्मे से देखा जाने लगा है। ऐसे में वे बांग्लादेश की बदलती छवि को कैसे देखते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि यह बदलाव न सिर्फ बांग्लादेश के लिए बल्कि 21वीं सदी में पूरी इंसानियत के लिए एक झटका है।
ये भी पढ़ें: बांग्लादेश चुनाव की तैयारी: आधे से ज्यादा मतदान केंद्र संवेदनशील, कड़ी सुरक्षा के बीच लोकतंत्र की अग्निपरीक्षा
उन्होंने आगे कहा, "यूनुस के हड़पे हुए अठारह महीनों के राज से हुई तबाही ने दशकों की तरक्की को खत्म कर दिया है। इसने शेख हसीना के राज में बड़ी मेहनत से बनाई गई अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है और बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष पहचान, ऐतिहासिक यादों और उसके मुक्ति संग्राम की नैतिक विरासत को एक प्रक्रिया के तहत खत्म कर दिया है। यह सिर्फ राजनीतिक गिरावट नहीं है; यह पूरी सभ्यता के खिलाफ बर्बरता है।"
अन्य वीडियो
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन