Bangladesh Economic Crisis: गहराया आर्थिक संकट, बांग्लादेश में दिखने लगा कुछ-कुछ श्रीलंका जैसा नजारा
Bangladesh Economic Crisis: संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक में काम कर चुके वरिष्ठ अधिकारी मार्क मेलोच ब्राउन ने फाइनेंशियन टाइम्स से कहा- ‘बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी हुई है। खास कर वह अपने वस्त्र निर्यात पर निर्भर है...
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बांग्लादेश में महंगाई और जरूरी चीजों के अभाव के खिलाफ लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखने लगा है। गुरुवार को देश के वामपंथी संगठनों आम हड़ताल आयोजित की। लेफ्ट डेमोक्रेटिक एलायंस (एलडीए) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल के दौरान जगह-जगह पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। एलडीए से जुड़े कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार लिया गया।
पिछले कुछ दिनों में बांग्लादेश में आर्थिक संकट गहरा गया है। ईंधन की महंगाई को देखते हुए सरकार ने बिजली का उपभोग घटाने के कई उपाय घोषित किए हैं। इसके तहत अब स्कूलों को हर हफ्ते एक दिन अतिरिक्त बंद रखने का फैसला किया गया है। बांग्लादेश में शुक्रवार को स्कूलों छुट्टी रहती है। अब वे शनिवार को भी बंद रहेंगे। सरकारी दफ्तरों और बैंकों में कामकाजी घंटे घटा दिए हैं। ये तमाम उपाय बुधवार से लागू हो गए। गुरुवार को इसके खिलाफ जन विरोध का नजारा देखने को मिला।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार आ रही गिरावट के कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद की सरकार को कमखर्ची लागू करने के ये उपाय अपनाने पड़े हैं। पिछले महीने बांग्लादेश के कच्चे तेल के आयात बिल में 50 फीसदी बढ़ोतरी हुई थी। अब सरकार ने कहा है कि वह रूस से सत्ता तेल हासिल करने की संभावना तलाश रही है। देश में महंगाई की दर भी काफी ऊंची हो गई है। इस कारण हाल के हफ्तों में पहले भी कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं।
अनाज की महंगाई पर काबू पाने के लिए हसीना सरकार ने रूस, वियतनाम और भारत से अनाज आयात करने का समझौता किया है। इसते तहत 83 लाख लाख टन गेहूं और चावल का आयात किया जाएगा। विश्लेषकों के मुताबिक इससे देश में अनाज की महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी, लेकिन साथ ही विदेशी मुद्रा का संकट और गहराने की आशंका है।
इस बीच मशहूर ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में बांग्लादेश में बन रही हालत की तुलना पिछले वर्ष की श्रीलंका की स्थिति से की है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी हाल तक बांग्लादेश ने कोरोना महामारी और यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया भर में लग रहे आर्थिक झटकों से अपने को बचा रखा था। इसकी वजह देश का मजबूत निर्यात सेक्टर है। लेकिन अब हालत बदल रही है। इसे देखते हुए शेख हसीना सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 4.5 बिलियन डॉलर का कर्ज मांगा है।
संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक में काम कर चुके वरिष्ठ अधिकारी मार्क मेलोच ब्राउन ने फाइनेंशियन टाइम्स से कहा- ‘बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी हुई है। खास कर वह अपने वस्त्र निर्यात पर निर्भर है। लेकिन ये सेक्टर दुनिया में दूसरी जगहों पर पैदा हुई स्थितियों के कारण संकट में फंस गया है।’
बन रही कठिन स्थिति को स्वीकार करते हुए बांग्लादेश के वित्त मंत्री एएचएम मुस्तफा कमाल ने कहा है- ‘सभी देश दबाव महसूस कर रहे हैं। लेकिन बांग्लादेश के अपने पड़ोसी देशों की तरह गहरी वित्तीय मुसीबत में फंसने का खतरा नहीं है।’ लेकिन पर्यवेक्षकों के मुताबिक देश की सड़कों पर जिस तरह का गुस्सा नजर आ रहा है, उसे देखते हुए नहीं लगता कि बांग्लादेश के लोग सरकार की ऐसी बातों से आश्वस्त हुए हैं।