फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Bangladesh: BRI has benefited or harmed Bangladesh? The country is divided on this question

Bangladesh: बीआरआई से बांग्लादेश को फायदा हुआ या नुकसान? इस सवाल पर बंटा हुआ है देश

Sun, 16 Jul 2023 04:10 PM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 16 Jul 2023 04:10 PM IST
सार

विश्लेषकों के मुताबिक गुजरे आठ वर्षों में चीन और बांग्लादेश के बीच व्यापार और वित्तीय संबंधों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इस कारण यह धारणा बन गई है कि बांग्लादेश का झुकाव चीन की तरफ हो गया है।

विज्ञापन
Bangladesh: BRI has benefited or harmed Bangladesh? The country is divided on this question
china bagladesh

विस्तार

चीन की महत्त्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनशिएटिव (बीआरआई) के दस साल पूरा होने के मौके पर बांग्लादेश में भी इसका हिस्सा बनने से हुए लाभ-हानि का आकलन किया जा रहा है। बीआरआई के तहत नेपाल में नौ परियोजनाओं पर काम होना है। इस बीच चीन बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार बन गया है। साथ ही जिन देशों से बांग्लादेश को सबसे ज्यादा विकास संबंधी सहायता मिलती है, उनमें भी चीन शामिल हो गया है। 2016 में दोनों देशों ने अपने संबंध को स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप (रणनीतिक भागीदारी) का दर्जा दे दिया था।

विज्ञापन


नेपाल में बीआरआई के तहत जिन परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ा है, उनमें पद्मा रेल लिंक, कर्णफूली नदी के अंदर बन रही बंगबंधु सुरंग और दाशेकरकांडी सिवेट ट्रीटमेंट प्लांट शामिल हैं। ये तीनों परियोजनाएं जल्द ही पूरी हो जाएंगी। बाकी छह परियोजनाओं में से कुछ पर काम चल रहा है, जबकि कुछ पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। ये तमाम परियोजनाएं चीन से मिलने वाली सहायता के तहत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में बनाई जा रही हैं। 
विज्ञापन


इन परियोजनाओं के लिए बांग्लादेश ने चीन से बड़े पैमाने पर कर्ज लिया है। इसको लेकर देश के कर्ज जाल में फंसने की आशंकाएं भी जताई गई हैँ। आलोचकों ने बांग्लादेश सरकार को आगाह किया है कि यहां बन रही परियोजनाओं का हाल भी श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह की तरह हो सकता है। श्रीलंका उस परियोजना के लिए जो कर्ज लिया, उसे नहीं चुका पाया था। इसलिए उसे 99 साल की लीज पर हंबनटोटा बंदरगाह को चीनी कंपनी को सौंपना पड़ा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


विश्लेषकों के मुताबिक गुजरे आठ वर्षों में चीन और बांग्लादेश के बीच व्यापार और वित्तीय संबंधों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इस कारण यह धारणा बन गई है कि बांग्लादेश का झुकाव चीन की तरफ हो गया है। इसको लेकर बांग्लादेश का अमेरिका समर्थक खेमा प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद की सरकार की आलोचना कर रहा है। जबकि हसीना सरकार का कहना है कि वह अमेरिका और चीन के टकराव के बीच तटस्थ रुख पर चल रही है। उसका यह भी दावा है कि बीआरआई और अन्य चीनी परियोजनाओं के कारण बांग्लादेश को काफी लाभ हुआ है। 

वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपे एक विश्लेषण के मुताबिक गुजरे दशक में बांग्लादेश का ध्यान मुख्य रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों के बीच सहज और कुशल संपर्क जोड़ना उसकी प्राथमिकता रही है। सरकार की राय है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में उचित वृद्धि के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण सबसे जरूरी है। इस मकसद में उसके लिए बीआरआई सहायक साबित हुआ है। 


नीदरलैंड्स की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिनजेन में बांग्लादेशी शोधकर्ता दोरीन चौधरी के मुताबिक चीन की सहायता के बिना बांग्लादेश के लिए अरबों डॉलर की परियोजनाओं को लागू करना संभव नहीं था। उन्होंने लिखा है कि बीआरआई के जरिए चीन अपने भू-राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इससे बांग्लादेश की अपनी जरूरत भी पूरी हुई है। इस परियोजना में शामिल होने से बांग्लादेश को अति आधुनिक टेक्नोलॉजी भी प्राप्त हुई है, जिसका कोई और जरिया उसके पास नहीं था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed