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Covid-19: सार्वजनिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध से 24 फीसदी तक कम की जा सकती है संक्रमण की दर

Mon, 26 Oct 2020 06:42 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, लंदन
पीटीआई, लंदन Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 26 Oct 2020 06:42 PM IST
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Ban on public events can reduce COVID19 transmission rate by 24 per cent, says Lancet study
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

सार्वजनिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा कर कोविड-19 संक्रमण की दर को एक महीने से भी कम समय में 24 फीसदी तक कम किया जा सकता है। यह दावा प्रसिद्ध लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक मॉडलिंग अध्ययन में किया गया है। इसके अनुसार ऐसे कार्यक्रमों पर रोक लगा कर कोविड रिप्रोडक्शन नंबर (R number) को कम किया जा सकता है। आर नंबर एक से अधिक होने का मतलब संक्रमण की अधिकता होता है और एक से कम संक्रमण में कमी को दर्शाता है।

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131 देशों से एकत्र किए गए डाटा के आधार पर किया गया यह शोध बताता है कि स्कूल और कार्यस्थलों की बंदी, सार्वजनिक कार्यक्रमों और एक स्थान पर 10 से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध, घर में रहने और आवागमन को सीमित करने जैसे व्यक्तिगत कदम कोविड-19 महामारी संक्रमण को कम करने में महत्वपूर्ण हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि कई कोरोना संक्रमण को रोकने वाले कई मानकों को अगर मिलाकर लागू किया जाए तो ये संक्रमण को रोकने में अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं। 
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ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के प्रोफेसर हरीश नायर ने कहा, 'हमें पता चला है कि विभिन्न मानकों को मिलाकर लागू करने से कोविड-19 संक्रमण को कम करने में सर्वाधिक प्रभाव देखने को मिला।' प्रोफेसर नायर ने कहा कि हमारा अध्ययन इस बात की जानकारी दे सकता है कि संक्रमण रोकने के लिए किस उपाय को लागू किया जाए या हटाया जाए और इसके प्रभाव देखने की उम्मीद कब तक की जाए। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह स्थानीय स्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
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प्रोफेसर हरीश नायर ने कहा, स्कूलों के दोबारा खुलने के बाद हमने आर नंबर में इजाफा देखा। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह वृद्धि विशेष आयु वर्ग के लिए जिम्मेदार है, जहां कक्षाओं के भीतर और बाहर सामाजिक दूरी के उपायों के पालन में पर्याप्त अंतर हो सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण से बचते हुए स्कूलों को दोबारा खोलने के लिए कक्षा में छात्रों की संख्या सीमित करनी चाहिए, लगातार सफाई, हाथ धुलना, फेस मास्क और तापमान की जांच अनिवार्य करना चाहिए। 

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