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चीन की सैन्य नियंत्रित कंपनियों में अमेरिकी निवेश पर प्रतिबंध के आदेश

Wed, 30 Dec 2020 01:25 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, वाशिंगटन।
एजेंसी, वाशिंगटन। Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 30 Dec 2020 01:25 AM IST
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ban on american investment in chinese companies
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Twitter

तिब्बत में दलाई लामा की नियुक्ति को लेकर चीन के दखल के खिलाफ विधेयक पर अमेरिकी राष्ट्रपति के दस्तखत करने के अगले ही दिन ट्रंप प्रशासन ने एक और चीन विरोधी कार्यकारी आदेश को मजबूती दे दी।

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इसके तहत अमेरिकी निवेशकों को चीन की सैन्य नियंत्रित कंपनियों की प्रतिभूतियों को खरीदने से रोक दिया गया है। चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे वैश्विक कारोबारी नियमों के विरुद्ध बताया है।
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ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई से चीन की कंपनियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में दिशा निर्देश प्रकाशित करते हुए स्पष्ट किया कि कार्यकारी आदेश नवंबर में जारी हुए थे जो कारोबारी आदान-प्रदान फंड और इंडेक्स फंड में निवेशकों के लिए भी लागू होंगे।
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इस आदेश में चीनी स्वामित्व वाली 20 कंपनियां भी नामित होंगी। विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि अमेरिकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष निवेश भी चीन की ऐसी कंपनियों में नहीं होना चाहिए जो अनजाने में ही सही लेकिन चीनी सैन्य संसाधनों का समर्थन करती हों।

इस बीच, चीन के विदेश मंत्रालय ने चीनी फर्मों में अमेरिकी निवेशकों द्वारा प्रतिभूतियां खरीदने पर लगाई रोक को अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून के खिलाफ बताया। चीन ने कहा, अमेरिका अर्थव्यवस्था और व्यापार का राजनीतिकरण करके ताकत का दुरुपयोग कर रहा है।

50 फीसदी से ज्यादा फर्में चीन से नियंत्रित
ट्रंप प्रशासन के नए दिशा-निर्देश कम्युनिस्ट चीन की सैन्य कंपनी की सहायक किसी भी फर्म पर लागू होंगे क्योंकि ऐसी सहायक कंपनी को सार्वजनिक रूप से वित्त मंत्रालय द्वारा सूचीबद्ध किया जाता है। इसमें कहा गया है कि चीनी सैन्य कंपनी के स्वामित्व वाली 50 फीसदी से अधिक फर्में चीन से ही नियंत्रित होती हैं और वे सिर्फ अपने देश का लाभ देखती हैं। 

चीन से मुकाबले को अंतरराष्ट्रीय गठबंधन जरूरी : बाइडन
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने अगले चार वर्षो के लिए अमेरिका-चीन रिश्तों को लेकर अपने फार्मूले का एलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन को बीजिंग का सामना करने के लिए समान विचारधारा वाले देशों का अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति की समीक्षा बैठक के बाद कहा कि ऐसा करके हम अपने आर्थिक लाभ को दोगुना कर सकेंगे।

चीन के विरुद्ध ‘छठी आंख’ बनने को तैयार जापान
क्योदो न्यूज के मुताबिक, जापान सरकार में इस बात को लेकर आवाजें उठ रही हैं कि देश को अंतरराष्ट्रीय रूप से खुफिया सूचनाएं साझा करने वाले गठबंधन ‘फाइव आइज’ में जुड़ना चाहिए और चीन में उइगरों पर हो रही सख्ती के खिलाफ अमेरिका व ब्रिटेन को इनपुट देना चाहिए।

फाइव आइज’ पांच देशों का नेटवर्क है जिसमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा व न्यूजीलैंड शामिल हैं जो उत्तर कोरिया और चीन के बढ़ते खतरों का जवाब देने के लिए आपसी सहयोग कर रहे हैं। संकेतों के मुताबिक यदि जापान इससे जुड़ता है तो वह ‘छठी आंख’ बन जाएगा।

उइगरों से फैक्ट्रियों में जबरन काम करा रहा है चीन
एक नई रिपोर्ट में पता चला है कि चीन ने अपने शिंजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों को परेशान करने के लिए 100 से ज्यादा यातना केंद्र बनाए हैं। इनमें उइगरों को कैद करने की रिपोर्टें पहले भी आई हैं।


जबकि नई रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन यहां पर बनी फैक्ट्रियों में उइगरों से जबरन काम भी करा रहा है और बदले में उन्हें एक माह में सिर्फ 100 रुपये के बराबर अपनी मुद्रा में पारिश्रमिक देता है। न्यूज वेबसाइट बडफीड ने सरकारी दस्तावेजों और सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से यह खुलासा किया है। इन फैक्ट्रियों का कुल एरिया 10 लाख वर्ग फुट तक फैला हुआ है।

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