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Pakistan: कंगाल पाकिस्तान की आईएमएफ वाली ‘उम्मीदों’ को नया झटका, क्या नई शर्त से बढ़ेंगी लोगों की मुश्किलें?
Thu, 16 Mar 2023 05:56 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Thu, 16 Mar 2023 05:56 PM IST
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आईएमएफ, पाकिस्तान
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
आर्थिक बदहाली से घिरे पाकिस्तान को आईएमएफ से मिलने वाली मदद का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। पाकिस्तान मीडिया ने दावा किया है कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्था ने ऋण देने के लिए नई शर्त जोड़ दी है। पाकिस्तान पहले ही आईएमएफ की पूरानी शर्तों को ही पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। अब तक ऋण नहीं मिलने के कारण प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को ही कहा था कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता पर और अधिक बोझ पड़ेगा।आईएमएफ के बेलआउट पैकेज को लेकर अभी क्या हुआ है? ऋण के लिए आईएमएफ ने नई शर्त क्या रखी है? पाकिस्तान सरकार क्या कर रही है? पहले कौन सी शर्तें थीं, क्या पाकिस्तान इन्हें पूरा कर सका? आईएमएफ के बेलआउट पैकेज की देरी से क्या होगा? आइये जानते हैं…
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष
आईएमएफ के बेलआउट पैकेज को लेकर अभी क्या हुआ है?
पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया है कि अंतरराष्ट्रीय ऋणदाता आईएमएफ ने कर्मचारी-स्तरीय समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले एक नई शर्त रख दी है। एक अरब डॉलर की किश्त को जारी करने के लिए, आईएमएफ ने 30 जून तक सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित पाकिस्तान के मित्र देशों से वित्तपोषण का लिखित आश्वासन मांगा है।
द न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब आईएमएफ पाकिस्तान के मित्र देशों और बहुपक्षीय लेनदारों से 200 फीसदी आश्वासन प्राप्त करने के लिए कह रहा है ताकि जून 2023 के अंत तक विदेशी ऋण पर 6-7 बिलियन डॉलर के वित्तीय अंतर की भरपाई की जा सके।
आईएमएफ के साथ चल रही बातचीत की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने खुलासा किया कि विदेशी ऋण का अंतर अब 7 अरब डॉलर से घटाकर 6 अरब डॉलर कर दिया गया है, लेकिन आईएमएफ ने इसे स्वीकार नहीं किया।
पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया है कि अंतरराष्ट्रीय ऋणदाता आईएमएफ ने कर्मचारी-स्तरीय समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले एक नई शर्त रख दी है। एक अरब डॉलर की किश्त को जारी करने के लिए, आईएमएफ ने 30 जून तक सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित पाकिस्तान के मित्र देशों से वित्तपोषण का लिखित आश्वासन मांगा है।
द न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब आईएमएफ पाकिस्तान के मित्र देशों और बहुपक्षीय लेनदारों से 200 फीसदी आश्वासन प्राप्त करने के लिए कह रहा है ताकि जून 2023 के अंत तक विदेशी ऋण पर 6-7 बिलियन डॉलर के वित्तीय अंतर की भरपाई की जा सके।
आईएमएफ के साथ चल रही बातचीत की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने खुलासा किया कि विदेशी ऋण का अंतर अब 7 अरब डॉलर से घटाकर 6 अरब डॉलर कर दिया गया है, लेकिन आईएमएफ ने इसे स्वीकार नहीं किया।
शहबाज शरीफ
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
पाकिस्तान सरकार क्या कर रही है?
कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय मित्र देशों से लिखित आश्वासन प्राप्त करने के लिए सक्रिय हो गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री इशाक डार ने इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी राजनयिकों के साथ संपर्क साधा है और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की मदद से गतिरोध को खत्म करने में मदद करने का अनुरोध किया है।
उधर वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में लिखित आश्वासन संबंधित मित्र देशों के कार्यकारी निदेशकों द्वारा मिल जाना चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तीय संस्था को समझाने में विफल रहने के बाद, पाकिस्तान के पास अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों से मदद लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय मित्र देशों से लिखित आश्वासन प्राप्त करने के लिए सक्रिय हो गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री इशाक डार ने इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी राजनयिकों के साथ संपर्क साधा है और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की मदद से गतिरोध को खत्म करने में मदद करने का अनुरोध किया है।
उधर वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में लिखित आश्वासन संबंधित मित्र देशों के कार्यकारी निदेशकों द्वारा मिल जाना चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तीय संस्था को समझाने में विफल रहने के बाद, पाकिस्तान के पास अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों से मदद लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
पहले कौन सी शर्तें थीं, क्या पाकिस्तान इन्हें पूरा कर सका था?
आईएमएफ ने ऋण देने के लिए पाकिस्तान के सामने बिजली सब्सिडी खत्म करने, गैस टैरिफ नियमित करने जैसी शर्तें रखीं थीं। आईएमएफ ने स्थायी आधार पर बिजली क्षेत्र की सब्सिडी को खत्म करने की भी शर्त रखी थी। पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उसने आईएमएफ द्वारा निर्धारित सभी शर्तों के कार्यान्वयन को पूरा कर लिया है, जिसमें वित्त विधेयक 2023 और बिजली और गैस टैरिफ में वृद्धि शामिल हैं। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तान ने वाणिज्यिक बैंकों से सीधे कर्ज नहीं लेने की आईएमएफ की अंतिम शर्त को भी माना है।
आईएमएफ ने ऋण देने के लिए पाकिस्तान के सामने बिजली सब्सिडी खत्म करने, गैस टैरिफ नियमित करने जैसी शर्तें रखीं थीं। आईएमएफ ने स्थायी आधार पर बिजली क्षेत्र की सब्सिडी को खत्म करने की भी शर्त रखी थी। पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उसने आईएमएफ द्वारा निर्धारित सभी शर्तों के कार्यान्वयन को पूरा कर लिया है, जिसमें वित्त विधेयक 2023 और बिजली और गैस टैरिफ में वृद्धि शामिल हैं। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तान ने वाणिज्यिक बैंकों से सीधे कर्ज नहीं लेने की आईएमएफ की अंतिम शर्त को भी माना है।
पाकिस्तान आया आईएमएफ का एक प्रतिनिधिमंडल
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
पिछले महीने से अटका पड़ा है कर्मचारी स्तर का समझौता
पिछले महीने की शुरुआत में पाकिस्तान सरकार और आईएमएफ के कर्मचारियों ने स्टाफ स्तर के समझौते के बिना 6.5 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की नौवीं समीक्षा पूरी की थी। पाकिस्तानी सरकार को उम्मीद थी कि वह आईएमएफ को धीरे-धीरे शर्तों को लागू करने के बारे में समझा देगी। हालांकि, आईएमएफ मिशन की 10 दिवसीय पाकिस्तान यात्रा के दौरान इस्लामाबाद की उम्मीदों पर पानी फिर गया। तब से संकट से जूझ रहा देश वार्ता को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगी है।
पिछले महीने की शुरुआत में पाकिस्तान सरकार और आईएमएफ के कर्मचारियों ने स्टाफ स्तर के समझौते के बिना 6.5 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की नौवीं समीक्षा पूरी की थी। पाकिस्तानी सरकार को उम्मीद थी कि वह आईएमएफ को धीरे-धीरे शर्तों को लागू करने के बारे में समझा देगी। हालांकि, आईएमएफ मिशन की 10 दिवसीय पाकिस्तान यात्रा के दौरान इस्लामाबाद की उम्मीदों पर पानी फिर गया। तब से संकट से जूझ रहा देश वार्ता को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगी है।
शहबाज शरीफ, आईएमएफ
- फोटो :
अमर उजाला
आईएमएफ के बेलआउट पैकेज की देरी से क्या होगा?
आईएमएफ के बेल आउट पैकेज की देरी पाकिस्तान की मुश्किलें हर दिन बढ़ा रही है। सबसे ज्यादा प्रभाव आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर पड़ रहा है। पाकिस्तान अपने दैनिक उपयोग की अधिकांश चीजों का निर्यात करता है। इसमें पेट्रोलियम, गैस, दवाएं, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, वाहन, मशीनरी और यहां तक कि खाद्य पदार्थ भी शामिल हैं। बकाये का भुगतान न करने की स्थिति में इन सामानों की उपलब्धता बाधित होती है। इससे पाकिस्तान के आम लोगों का जीवन प्रभावित होगा।
आईएमएफ के बेल आउट पैकेज की देरी पाकिस्तान की मुश्किलें हर दिन बढ़ा रही है। सबसे ज्यादा प्रभाव आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर पड़ रहा है। पाकिस्तान अपने दैनिक उपयोग की अधिकांश चीजों का निर्यात करता है। इसमें पेट्रोलियम, गैस, दवाएं, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, वाहन, मशीनरी और यहां तक कि खाद्य पदार्थ भी शामिल हैं। बकाये का भुगतान न करने की स्थिति में इन सामानों की उपलब्धता बाधित होती है। इससे पाकिस्तान के आम लोगों का जीवन प्रभावित होगा।
आगे क्या होगा?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने निजी मीडिया चैनल को दिए एक इंटरव्यू में कहा, आईएमएफ की सबसे कठिन शर्तों को पूरा किया गया है और हम कुछ दिनों के भीतर कर्मचारी स्तर के समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। वहीं, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि आईएमएफ ने सोमवार को स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) के अधिकारियों के साथ अंतिम बैठक की और अब उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।
आईएमएफ के ऋण में देरी से पाकिस्तान के लिए भविष्य में मुश्किलें ही बढ़ेंगी। पिछले दिनों ही अमेरिका के यूनाइटेड स्टेट्स बैंक ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने जल्द ही अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से धन सुरक्षित नहीं किया तो उसे ऋण अदायगी को रोकना होगा। बैंक ने यह भी कहा कि चीन, जिसे पाकिस्तान का करीबी सहयोगी कहा जाता है, देश के साथ घनिष्ठ संबंधों के कारण देश को बचा सकता है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने निजी मीडिया चैनल को दिए एक इंटरव्यू में कहा, आईएमएफ की सबसे कठिन शर्तों को पूरा किया गया है और हम कुछ दिनों के भीतर कर्मचारी स्तर के समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। वहीं, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि आईएमएफ ने सोमवार को स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) के अधिकारियों के साथ अंतिम बैठक की और अब उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।
आईएमएफ के ऋण में देरी से पाकिस्तान के लिए भविष्य में मुश्किलें ही बढ़ेंगी। पिछले दिनों ही अमेरिका के यूनाइटेड स्टेट्स बैंक ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने जल्द ही अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से धन सुरक्षित नहीं किया तो उसे ऋण अदायगी को रोकना होगा। बैंक ने यह भी कहा कि चीन, जिसे पाकिस्तान का करीबी सहयोगी कहा जाता है, देश के साथ घनिष्ठ संबंधों के कारण देश को बचा सकता है।