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Bangladesh: बांग्लादेश में शेख हसीना की जीत के बाद उठ रहा बड़ा सवाल, अब संसद में कौन होगा विपक्ष?

Mon, 08 Jan 2024 09:00 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: काव्या मिश्रा Updated Mon, 08 Jan 2024 09:00 AM IST
सार

अवामी लीग ने 155 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की है, जबकि जातीय पार्टी ने महज आठ सीटें हासिल की हैं। इसमें कहा गया है कि 45 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। यही आंकड़े अब विपक्ष की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं। 

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Awami League gets a fourth term, but who gets to be the opposition in parliament?
shaikh haseena - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बांग्लादेश में एक बार फिर शेख हसीना प्रधानमंत्री बनने जा रहीं हैं। रविवार को हुए आम चुनाव में उनकी पार्टी आवामी लीग ने 300 में से दो-तिहाई सीटें जीत ली हैं। इसबार, एकतरफा चुनाव में वह लगातार चौथा कार्यकाल हासिल करने वाली हैं। उनका अब तक का यह पांचवां कार्यकाल होगा। वह पांचवीं बार प्रधानमंत्री बनेंगी। हालांकि, शेख हसीना की जीत कोई चौंकाने वाली बात नहीं है, क्योंकि कहीं न कहीं इसका अंदाजा सभी को था। पर इन सबके बीच ध्यान जाता है विपक्ष पर। छिटपुट हिंसा और मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) तथा उसके सहयोगी दलों के बहिष्कार के बीच हुए चुनाव में देखा जा सकता है कि जातीय पार्टी से आगे निर्दलीय उम्मीदवार रहे। 

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बता दें, अवामी लीग ने 155 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की है, जबकि जातीय पार्टी ने महज आठ सीटें हासिल की हैं। इसमें कहा गया है कि 45 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। 
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26 निर्वाचन क्षेत्रों में से आधे पर हार
यह आंकड़े संसद में विपक्ष की ताकत और भूमिका के बारे में सवाल उठाते हैं। खासकर तब जब सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बीएनपी ने चुनाव का बहिष्कार किया हो। सत्तारूढ़ पार्टी के निर्दलीय उम्मीदवारों ने अवामी लीग और जातीय पार्टी के मौजूदा सांसदों सहित दर्जनों दिग्गजों पर चौंकाने वाली जीत हासिल की है। जातीय पार्टी सिर्फ आठ सीटों के साथ संसद में फिर से आधिकारिक विपक्ष बनने के लिए तैयार है। जबकि आवामी लीग को उन्हीं सीटों पर नुकसान हुआ, जो सीटों के बंटवारे के समझौते के तहत छोड़ी गई थीं। सीटों के बंटवारे के समझौते में द्वारा छोड़ी गई 26 निर्वाचन क्षेत्रों में से आधे पर उसके उम्मीदवार हार गए हैं।
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जीत ने राजनीतिक परिदृश्य को बदला
अवामी लीग के बागी उम्मीदवारों ने जातीय पार्टी की 61 सीटों की तुलना में लगभग छह गुना अधिक सीटें जीती हैं। अवामी लीग ने 299 निर्वाचन क्षेत्रों में से 211 के साथ पूर्ण बहुमत हासिल किया है। इन निर्दलीय उम्मीदवारों की अप्रत्याशित जीत ने राजनीतिक परिदृश्य को काफी बदल दिया है, जो सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर आंतरिक प्रतिस्पर्धा के एक नए युग का संकेत देता है। अवामी लीग के शासन के तहत बांग्लादेश नए कार्यकाल में कदम रख रहा है। वहीं, विपक्ष का नया रूप देश की संसदीय गतिशीलता और राजनीतिक संतुलन के भविष्य के बारे में महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।

इस पार्टी को मिली इतनी सीट
अवामी लीग के सहयोगी जातीय समाजतांत्रिक दल और वर्कर्स पार्टी को एक-एक सीट मिली है। कभी बीएनपी के नेतृत्व वाले गठबंधन में रही कल्याण पार्टी ने भी एक सीट पर जीत हासिल की। बीएनपी देश की राजनीति में एक बड़ी ताकत होने के बावजूद संसद से बाहर रही है, ठीक उसी तरह जैसे 2014 के चुनावों के बाद 10वीं संसद का पार्टी ने बहिष्कार किया था। कम मतदान के बीच बीएनपी के वरिष्ठ नेता अब्दुल मोयिन खान ने दावा किया कि उनका बहिष्कार सफल रहा।

मोहरे के रूप में...
चुनाव के नतीजे आने से पहले, अवामी लीग और उसके निर्दलीय उम्मीदवारों की करारी हार को भांपते हुए जातीय पार्टी के अध्यक्ष जीएम कादर ने चिंता जताई थी कि उनकी पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए इसलिए राजी किया गया होगा ताकि बांग्लादेश में 'एकल पार्टी शासन' स्थापित करने में उसे मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।

अवामी लीग ने अपने बागी उम्मीदवारों को इस बार स्वतंत्र रूप से लड़ने की अनुमति दी थी ताकि संतोषजनक वोटिंग के लिए मतदाताओं के बीच समर्थन जुटाया जा सके। अवामी लीग के जो उम्मीदवार निर्दलीय उम्मीदवारों से हार गए हैं, उनमें राज्य के तीन मंत्री महबूब अलीम, एनामुर रहमान और स्वपन भट्टाचार्य शामिल हैं।

विपक्ष का नया संकट
रिपोर्ट के अनुसार, अवामी लीग के पूर्ण बहुमत के बीच निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत देश की राजनीति में संकट पैदा कर सकती है।यह अवामी लीग के सहयोगियों के बीच भी संकट पैदा कर सकता है। राजनीतिक में समझ रखने वालों का कहना है कि उन्हें लगता है कि अवामी लीग हमेशा अपनी रणनीति के कारण आगे रहती है, न कि वैचारिक रुख के लिए। एक मजबूत विपक्ष होना चाहिए था। सिर्फ नाम के लिए नहीं। ऐसा नहीं लगता कि निर्दलीय उम्मीदवार संसद में विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। 

सूत्रों का कहना है कि कुछ निर्दलीय अवामी लीग में शामिल नहीं हो सकते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर शामिल होंगे। इसलिए, यह वास्तव में एक दलीय संसद होगी।

पीएम हसीना गोपालगंज-3 निर्वाचन क्षेत्र से चुनी गईं
छिटपुट हिंसा और मुख्य विपक्षी बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के बहिष्कार के बीच हुए आम चुनावों में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री और अवामी लीग प्रमुख शेख हसीना रविवार को गोपालगंज-3 निर्वाचन क्षेत्र से फिर से संसद के लिए चुनी गई हैं। 76 वर्षीय हसीना को 249,965 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी बांग्लादेश सुप्रीम पार्टी के एम निजाम उद्दीन लश्कर को सिर्फ 469 वोट मिले। गोपालगंज के उपायुक्त और रिटर्निंग ऑफिसर काजी महबुबुल आलम ने नतीजे की घोषणा की। हसीना ने 1986 के बाद से आठवीं बार गोपालगंज-3 सीट जीती है।

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