ऑकुस का असर: अब चीन से बात करने को उतावला हो गया है यूरोपियन यूनियन!
शंघाई स्थित फुदान यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर यूरोपियन स्टडीज के निदेशक डिंग चुन के मुताबिक दोनों पक्षों में शिखर वार्ता होगी या नहीं, यह ईयू काउंसिल की बैठक से कैसा माहौल बनता है, उस पर निर्भर करेगी। जानकारों के मुताबिक चीन इसी महीने होने वाली ईयू परिषद की शिखर बैठक का इंतजार कर रहा है। वह देखना चाहता है कि उसमें ईयू नेता चीन को लेकर क्या चर्चा करते हैं...
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यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत की पहल की है, ताकि दोनों पक्षों में तनाव घटाया जा सके। यूरोपीय राजनयिकों के हवाले से ये खबर हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने दी है। हाल में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के बीच हुए रक्षा समझौते (ऑकुस) के बाद ईयू में पैदा हुई नाराजगी को देखते हुए इस पहल को अहम समझा जा रहा है।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक दोनों पक्षों की बातचीत इसी महीने हो सकती है। संभावना है कि उस दौरान शी जिनपिंग और यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल बातचीत करेंगे। इस बातचीत के बाद चीन से जुड़े विवादित मसलों पर दोनों पक्षों के बीच वार्ता की शुरुआत हो सकती है।
ईयू के सदस्य सभी 27 देशों के राज्य/सरकार प्रमुख यूरोपियन काउंसिल के सदस्य हैं। उनके अलावा काउंसिल के अध्यक्ष और यूरोपियन आयोग के अध्यक्ष काउंसिल के सदस्य होते हैं। शी और मिशेल के बीच आखिरी बातचीत पिछले साल के आखिर में हुई थी। उसके बाद दोनों पक्षों के संबंध बिगड़ गए। ईयू ने चीन में मानव अधिकारों के कथित हनन और उसके अनुचित व्यापार व्यवहार का मुद्दा उठाया। इसको लेकर दोनों पक्षो में तनाव बढ़ गया। उसी सिलसिले में दोनों पक्षों ने एक दूसरे के कई अधिकारियों पर प्रतिबंध भी लगाए। इसका नतीजा यह हुआ कि दोनों पक्षों के बीच हुआ व्यापक निवेश समझौता अधर में लटक गया।
हाल में चीन और ईयू के बीच संबंध तब और बिगड़ गए, जब ईयू के सदस्य देश लिथुआनिया ने अपने ताइवान के प्रतिनिधि का दर्जा बढ़ा दिया। ईयू ने इस मामले में लिथुआनिया का समर्थन किया, जबकि चीन ने इसको लेकर लिथुआनिया के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक अब यूरोपीय राजनयिक इस बात को लेकर इच्छुक हैं कि ईयू के साथ बातचीत में खुद शी जिनपिंग शामिल हों। ईयू के मुताबिक इस मामले में प्रोटोकॉल की कोई समस्या नहीं है, क्योंकि ईयू परिषद के अध्यक्ष मिशेल का दर्जा 27 सदस्य देशों के नेताओं से ऊंचा है। इसके अलावा राजनयिकों का कहना है कि जब शी ने पिछले साल मिशेल से तीन बार मुलाकात की थी, तो अब वे ऐसा क्यों नहीं कर सकते।
इस साल शी जिनपिंग की जर्मनी की निवर्तमान चांसलर अंगेला मैर्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ दो बार वीडियो वार्ता हो चुकी है। इस दौरान दोनों पक्षों ने सहयोग बढ़ाने और ईयू-चीन संबंधों का दायरा बढ़ाने की इच्छा जताई। इस बीच बीजिंग स्थित नीदरलैंड्स के राजदूत विम गीर्ट्स ने भी अपील की है कि शी और ईयू नेताओं के बीच सीधी बातचीत हो। उन्होंने कहा कि जब सामने पेचीदा हालात हों, तब आमने-सामने बैठ कर बात करने की जरूरत और बढ़ जाती है।
विश्लेषकों का कहना है कि ऑकुस की खबर आने से ईयू अचंभित रह गया। शंघाई स्थित फुदान यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर यूरोपियन स्टडीज के निदेशक डिंग चुन के मुताबिक दोनों पक्षों में शिखर वार्ता होगी या नहीं, यह ईयू काउंसिल की बैठक से कैसा माहौल बनता है, उस पर निर्भर करेगी। जानकारों के मुताबिक चीन इसी महीने होने वाली ईयू परिषद की शिखर बैठक का इंतजार कर रहा है। वह देखना चाहता है कि उसमें ईयू नेता चीन को लेकर क्या चर्चा करते हैं।