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चीन में निजी सूचना को लेकर नया कानून: क्या सचमुच अब सुरक्षित हो जाएगी लोगों की प्राइवेसी?

Mon, 23 Aug 2021 02:48 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 23 Aug 2021 02:48 PM IST
सार

नया कानून अगले एक नवंबर से लागू हो जाएगा। इसमें किसी व्यक्ति की निजी सूचनाओं का कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है, इस बारे में नियम तय किए गए हैं। इसमें प्रावधान है कि किसी व्यक्ति की निजी सूचनाओं के इस्तेमाल के पहले किसी कंपनी या संस्था को उस व्यक्ति को सूचित करना होगा। साथ ही उस व्यक्ति की सहमति उसे प्राप्त करनी होगी...

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As part of the ongoing series of reforms in China, now the government has taken steps to protect the personal information of the people
चीन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

चीन में सुधारों के जारी सिलसिले के तहत अब सरकार ने लोगों की निजी सूचना को सुरक्षित करने का कदम उठाया है। इसके लिए एक कानून पारित किया गया है। हालांकि इस कानून को बीते शुक्रवार को ही हरी झंडी दे दी गई, लेकिन इस बारे में ब्योरा चीन के सरकारी अखबार द चाइना डेली ने रविवार को दिया। अखबार ने कहा कि चीन में लोगों की निजता के हनन की समस्या पुरानी है। हाल में ये और बढ़ गई है। इसीलिए सरकार ने नए कानून को मंजूरी दी है।

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नए कानून को ‘निजी सूचना संरक्षण अधिनियम’ नाम दिया गया है। सरकारी तौर पर दी गई जानकारी के मुताबिक चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति ने कानून के मसविदे की तीन बार समीक्षा की। उसके बाद उसे पारित कर दिया गया। इस कानून में ‘निजी डाटा’ और ‘संवेदनशील निजी डाटा’ को परिभाषित किया गया है। इसके तहत बायोमेट्रिक पहचान, धार्मिक आस्था, मेडिकल और स्वास्थ्य संबंधी अन्य सूचनाएं, वित्तीय खाते, और कहीं आने-जाने संबंधी विवरण को ‘संवेदनशील’ निजी सूचना की श्रेणी में रखा गया है।
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नया कानून अगले एक नवंबर से लागू हो जाएगा। इसमें किसी व्यक्ति की निजी सूचनाओं का कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है, इस बारे में नियम तय किए गए हैं। इसमें प्रावधान है कि किसी व्यक्ति की निजी सूचनाओं के इस्तेमाल के पहले किसी कंपनी या संस्था को उस व्यक्ति को सूचित करना होगा। साथ ही उस व्यक्ति की सहमति उसे प्राप्त करनी होगी। ऐसे किए बिना किसी व्यक्ति की सूचना का संग्रहण, भंडारण, प्रोसेसिंग, ट्रांसफर, उसके बारे में किसी और को बताना या उसे देना, और उस डाटा को डिलीट करना गैर-कानूनी होगा।

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कानून में प्रावधान है कि जो भी कंपनी या संस्था किसी व्यक्ति से उसकी निजी सूचना मांगेगी, उसे अपने सिद्धांत, उद्देश्य और डाटा प्रोसेसिंग की विधि के बारे में उस व्यक्ति को पूरी जानकारी देनी होगी। चीन में ये शिकायत बड़े पैमाने पर है कि जगह-जगह कैमरे लगा कर लोगों की निजी सूचनाओं को रिकॉर्ड किया जाता है। कानून में प्रावधान है कि सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की तस्वीर उतारने या चेहरा पहचानने का उपकरण लगाना गैर-कानूनी होगा। लेकिन इसमें यह प्रावधान भी है कि सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए ऐसा किया जा सकेगा। हालांकि यह प्रावधान जरूर किया गया है कि ऐसे कैमरों पर स्पष्ट निशान लगा होना चाहिए, ताकि लोगों को उसके वहां मौजूद होने की जानकारी मिल सके।

विश्लेषकों का कहना है कि चीन में निजता हनन की असल शिकायत सरकारी तंत्र से है। चूंकि इस कानून में सार्वजनिक सुरक्षा के लिए चेहरा पहचानने के उपकरण लगाने की इजाजत दी गई है, इसलिए लोगों को राहत मिलने की संभावना कम है। विश्लेषकों के मुताबिक ये संभव है कि ये कानून लागू होने के बाद लोगों की निजी जिंदगी में प्राइवेट कंपनियों का दखल कम हो जाए, लेकिन सरकारी दखल से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। फिर भी इसे एक सकारात्मक बात समझा गया है कि लोगों के निजी डाटा के संग्रहण के लिए अब वैधानिक व्यवस्था की गई है। पहले इस संबंध में कोई कानून नहीं था।

चीन में 2020 के अंत तक लगभग 99 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे थे। देश में 44 लाख से ज्यादा वेबसाइट और लगभग 35 लाख एप थे। इन सबसे निजी सूचनाओं का संग्रहण किया जा रहा था।

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