Azerbaijan-Armenia: अजरबैजान व आर्मेनिया के बीच संघर्ष पर विराम, ट्रंप ने किया समझौते का एलान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति पर बीते कुछ हफ्ते से अधिक चर्चा हो रही है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि बीते 10 मई के बाद से उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर कई बार बयान दिए हैं। भारत ट्रंप की टिप्पणियों का खंडन कर चुका है, लेकिन उन्होंने एक बार फिर 'शांति प्रिय' होने का दावा करते हुए चौंकाने वाला बयान दिया है। जानिए ट्रंप ने अब ऐसा क्या कहा?
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में अजरबैजान व आर्मेनिया ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। शांति समझौते के तहत विवादित क्षेत्र में अमेरिका 99 वर्षों तक के लिए एक ट्रांजिट गलियारा विकसित करेगा। इसका नाम ट्रंप रूट फॉर इंटरनेशनल पीस एंड प्रॉस्पैरिटी होगा, जो अजरबैजान को उसके नखचिवान एंक्लेव इलाके से जोड़ेगा और आर्मेनिया से होकर गुजरेगा।
अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव व आर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान ने स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को हुए इस समझौते का श्रेय ट्रंप व उनकी टीम को दिया। दोनों नेताओं ने राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने का एलान किया। ट्रंप प्रशासन ने साल की शुरुआत में दोनों देशों के साथ वार्ता शुरू की थी। समझौते के बाद अगले हफ्ते से ट्रांजिट मार्ग पर रेल, तेल-गैस पाइपलाइन व फाइबर ऑप्टिक लाइन विकसित करने पर बातचीत शुरू होगी। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि शांति समझौते के बाद यह क्षेत्र ऊर्जा उत्पादक क्षेत्र में तब्दील होगा। यह क्षेत्र तेल व गैस उत्पाद देश रूस, यूरोप, तुर्किये व ईरान का सीमावर्ती है।
35 साल लड़े, अब लंबे समय तक रहेंगे दोस्तः ट्रंप
व्हाइट हाउस में समारोह के दौरान ट्रंप ने कहा, दोनों 35 साल तक लड़ते रहे और अब दोस्त हैं। वे लंबे समय तक दोस्त बने रहेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि यह शिखर सम्मेलन दक्षिण काकेशस क्षेत्र की संभावनाओं को पूरी तरह खोलने में मदद करेगा। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने दोनों देशों के साथ ऊर्जा, तकनीक, एआई और अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाने के लिए अलग-अलग समझौते किए हैं।
ईरान ने किया स्वागत
ईरान ने अजरबैजान व आर्मेनिया के बीच समझौते का स्वागत किया, लेकिन अपने देश की सीमा के निकट किसी विदेशी दखल को लेकर चेतावनी भी दी। एक बयान में ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेहरान द्विपक्षीय चैनलों और क्षेत्रीय ढांचे के माध्यम से दोनों देशों के साथ काम करने के लिए तैयार है।
संभवतः एक परमाणु संघर्ष...
अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान की मौजूदगी में परमाणु संघर्ष के खतरे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, वे (भारत और पाकिस्तान) इस पर काम कर रहे थे। वे (दोनों देश) इसे बड़े पैमाने पर कर रहे थे। दोनों देशों के नेतृत्व का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा, वे महान नेता थे जो भीषण संघर्ष, से ठीक पहले साथ आए थे। जैसा कि आप जानते हैं, ये संभवतः एक परमाणु संघर्ष में बदलने वाला था।
ट्रंप भारत-पाकिस्तान पर लगातार दे रहे हैं बयान#WATCH | Washington, DC | US President Donald Trump says, "As president, my highest aspiration is to bring peace and stability to the world. Today's signing follows our success with India and Pakistan. They were going at it. They were going at it big. And, they were great leaders… pic.twitter.com/uLQA3lsHYl
— ANI (@ANI) August 8, 2025
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति आज के इस बयान से पहले करीब 30 मौकों पर भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के स्थगित किए जाने से जुड़ी टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच गोलाबारी रोके जाने का श्रेय लेते हुए कई बार कहा है कि उन्होंने व्यापार रोकने की चेतावनी दी, जिसके बाद दोनों देश सीजफायर पर सहमत हुए। हालांकि, भारत सरकार ने कई बार इसका खंडन किया है।
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दोनों देशों के बीच ऐसे रुकी गोलाबारी
गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में लोकसभा और राज्यसभा के पटल पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर समेत कई शीर्ष मंत्री बता चुके हैं कि भारत और पाकिस्तान के सैन्य महानिदेशकों (DGMO) के बीच हुई बातचीत के बाद गोलाबारी रोकने का फैसला हुआ। सरकार के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकी और सैन्य ठिकानों पर भारतीय सेना की कार्रवाई से घबराए पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने संघर्ष रोकने की पहल की, इसके बाद ही दोनों देशों के बीच गोलाबारी रोकी गई।