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जलवायु संकट: गर्त में खड़े रहकर खुदाई रोकनी होगी, नहीं तो...

Tue, 03 Dec 2019 01:35 AM IST
संजीव कुमार झा यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 03 Dec 2019 01:35 AM IST
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Antonio Guterres says about global climate crisis
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश - फोटो : un

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जोर देकर कहा है कि विश्व स्तर पर मौजूद जलवायु संकट का मुकाबला करने के लिए दुनिया को ज्यादा जवाबदेही, जिम्मेदारी और प्रभावशाली नेतृत्व की जरूरत है। इसके लिए उन्होंने सोमवार को मैड्रिड में शुरू हो रहे जलवायु सम्मेलन कॉप-25 में तमाम देशों से और ज्यादा महत्वाकांक्षाएं व संकल्पों का भी आहवान किया है।

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महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सम्मेलन शुरू होने से एक दिन पहले रविवार को स्पेन की राजधानी में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जलवायु संबंधी प्राकृतिक आपदाएं अब बहुत जल्दी-जल्दी आ रही हैं और ज्यादा विनाशकारी और जानलेवा हो रही हैं। जिनसे जानमाल का नुकसान भी बढ़ता जा रहा है।
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कहने का मतलब है कि जलवायु परिवर्तन अब कोई भविष्य की समस्या नहीं है, बल्कि हम वैश्विक स्तर पर जलवायु संकट का सामना अभी कर रहे हैं। महासचिव का कहना था ''मेरा आज संदेश है – मायूस ना हों, उम्मीद बनाए रखें।”
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इस मौके पर उन्होंने विश्व मौसम संगठन द्वारा जलवायु की स्थिति पर आई ताजा रिपोर्ट के मुख्य बिन्दुओं का भी जिक्र किया जो कॉप-25 के दौरान प्रकाशित होने वाली है।

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, “पिछले पाँच वर्ष रिकॉर्ड पर मौजूद अभी तक के सबसे गर्म साल रहे हैं। समुद्री जल स्तर मानव इतिहास में सबसे ऊंचे स्तर पर है।

रास्ता खत्म होने का मुकाम अब क्षितिज पर नहीं बचा है, बल्कि ये अब हमें साफ-साफ नजर आ रहा है और ये हमारी तरफ बढ़ रहा है।

लेकिन वैज्ञानिकों ने उस मुकाम से दूरी बनाए रखने का रोडमैप भी मुहैया कराया है जिसके जरिए वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखी जा सकती है।

साथ ही यह रोडमैप वर्ष 2050 तक कार्बन शून्यता और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को वर्ष 2010 के स्तर से कटौती करके वर्ष 2030 तक 45 फीसदी पर लाने में मददगार साबित होगा।

1.5 डिग्री का लक्ष्य पहुँच में

यूएन प्रमुख ने कहा कि अभी तक पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए हैं, और पेरिस समझौते के तहत किए गए संकल्प भी पूरे कर लिए जाएं तो भी तापमान वृद्धि 3.2 डिग्री सेल्सियस तक होगी, बशर्ते कि बहुत असाधारण कार्रवाई ना की जाए। साथ ही तापमान वृद्धि को 1.5 तक सीमित रखना अभी पहुँच के दायरे में है।

एंतोनियो गुटेरेश का कहना था, “इस लक्ष्य को संभव बनाने के लिए जिन प्रोद्योगिकियों की आवश्यकता है, वो पहले से ही मौजूद हैं। आशाओं के संकेत ते जी से बढ़ रहे हैं। हर जगह जनमत रफ्तार पकड़ रहा है। युवा लोग कमाल का नेतृत्व व सक्रियता दिखा रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि सबसे  जयादा कारक जो ग़ायब न जर आता है, वो है राजनैतिक इच्छाशक्ति, “कार्बन की  कीमत निर्धारित करने के लिए राजनैतिक इच्चाशक्ति। जीवाश्म ईंधन पर दी जाने वाली वित्तीय सहायता को रोकने के लिए राजनैतिक इच्छाशक्ति।”

या फिर आमदनी पर टैक्स लगाने से हटकर कार्बन पर टैक्स लगाया जाए यानी “लोगों पर टैक्स लगाने के बजाय प्रदूषण पर टैक्स लगे।”

रोकनी होगी खुदाई व ड्रिलिंग

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का कहना था कि जलवायु परिवर्तन की रफ्तार को धीमा करने के लिए खनन व ड्रिलिंग को रोकना होगा और उनके स्थान पर नवीकृत ऊर्जा व प्रकृति आधारित समाधानों का विकल्प अपनाना होगा।

आगे आने वाले 12 महीनों के दौरान ये बहुत  जरूरी होगा कि राष्ट्रीय स्तरों पर और भी  जयादा महत्वाकांक्षी संकल्प निर्धारित किए जाएं – मुख्य रूप से वहाँ जहाँ कार्बन उत्सर्जन बहुत  जयादा होता है।

“साथ ही कार्बन उत्सर्जन में इस स्थाई गति से कटौती की जाए जिससे 2050 तक कार्बन शून्यता कि स्थिति हासिल की जा सके।” 

एंतोनियो गुटेरेश का कहना था कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने और आपदाओं का सामना करने व राहत कार्यों के मामले में सहनशक्ति बढ़ाने के लिए समुचित अपेक्षाएँ रखने के वास्ते विकासशील देशों को कम से कम 100 अरब डॉलर की र कम की व्यवस्था करने की  जरूरत है।

उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन के सामाजिक पहलू पर भी गहरी न जर रहनी चाहिए ताकि राष्ट्रीय स्तर पर तमाम सरकारें ऐसे इरादों पर काम करें जिनमें जलवायु परिवर्तन से प्रभावित क्षेत्रों में रो जगार कमाने वाले लोगों को हरित अर्थव्यवस्था की तरफ स्थानांतरित किया जा सके।” 

पत्रकारों को संबोधित करते हुए आख़िर में उन्होंने कहा: “हम पहले से ही एक गहरे गड्ढे में पहुँच चुके हैं लेकिन फिर भी खुदाई किए जा रहे हैं। जल्दी ही ये गड्ढा इतना गहरा हो जाएगा कि उससे बाहर निकलना असंभव हो जाएगा।”

मार्क कार्नी - जलवायु कार्रवाई के लिए नए विशेष दूत

महासचिव ने रविवार को ये भी घोषणा की कि बैंक ऑफ इंग्लैंड के मौजूदा गवर्नर मार्क कार्नी जलवायु कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र के नए विशेष दूत होंगे।

कनाडा मूल के मार्क कार्नी को वित्तीय क्षेत्र को जलवायु पर ठोस उपाय करने के लिए बाध्य करने में असाधारण भूमिका निभाने वाले अदभुत नेता बताते हुए महासचिव ने कहा कि नए दूत जलवायु कार्रवाई को अमल में लाने के लिए महत्वाकांक्षी  कदम उठाएंगे।

इनमें ख़ासतौर से वैश्विक तापमान बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए बा जारों में बड़े बदलाव वाना और निजी वित्ती क्षेत्र को सक्रिय बनाना शामिल होगा।  

मार्क कार्नी जलवायु कार्रवाई के मौजूदा अध्यक्ष और न्यूयॉर्क के पूर्व मेयर माइकल ब्लूमबर्ग का स्थान लेंगे। अरबपति और समाज सेवी माइकल ब्लूमबर्ग अब अमरीकी राष्ट्रपति पद के लिए चुनावी दौड़ में हैं।

यूएन महासचिव के प्रवक्ता द्वारा जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि  मार्क कार्नी के मुख्य काम होंगे - जलवायु परिवर्तन  के प्रभावों के मद्देन जर निजी वित्तीय क्षेत्रों में निर्णय प्रक्रिया में प्रमुख जगह दिलाने के लिए वित्तीय रिपोर्टिंग, आपदा प्रबंधन व फायदों का फ्रेमवर्क तैयार करना होगा। साथ ही शून्य कार्बन वाली अर्थव्यवस्था  की तरफ बढ़ने के प्रयासों में मददगार ढाँचा भी मुहैया कराना। 

बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर वित्तीय क्षेत्रों में बहुत महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं जिनमें निजी व सरकारी दोनों क्षेत्र शामिल हैं। इस पद पर नियुक्ति घोषित होने के बाद जब वो बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर का पद छोड़ देंगे तो संयुक्त राष्ट्र के स्टाफ बन जाएंगे।

मार्क कार्नी 2011 से 2018 तक कनाडा में वित्तीय स्थिरता बोर्ड के चैयरमैन और 2008 से 2013 तक बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर भी रहे हैं। 

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