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कनिष्क विमान हादसे की बरसी: केंद्रीय मंत्री ने मृतकों को दी श्रद्धांजलि, हमले में 329 यात्रियों की हुई थी मौत
Mon, 23 Jun 2025 01:42 PM IST
बशु जैन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कॉर्क
Published by: बशु जैन
Updated Mon, 23 Jun 2025 01:42 PM IST
सार
1985 में हुए कनिष्क विमान हादसे में एअर इंडिया के विमान में सवार 329 यात्रियों की मौत हुई थी। आयरलैंड में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मृतकों को श्रद्धांजलि दी।
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मृतकों को श्रद्धांजलि देते केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी।
- फोटो : ANI/वीडियो ग्रैब
विस्तार
आयरलैंड में कनिष्क विमान हादसे की बरसी पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मृतकों को श्रद्धांजलि दी। कॉर्क में अहाकिस्ता मेमोरियल में आयरलैंड के कई नेता मौजूद रहे। 1985 में हुए इस हमले में एअर इंडिया के विमान में सवार 329 यात्रियों की मौत हुई थी।
हादसे की बरसी पर हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अलावा आयरिश प्रधान मंत्री माइकल मार्टिन, कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसांगरी और अन्य लोग शामिल हुए। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में अरविंदर सिंह लवली (दिल्ली विधायक), बलदेव सिंह औलाख (उत्तर प्रदेश के मंत्री), गुरवीर सिंह बराड़ (राजस्थान के विधायक), त्रिलोक सिंह चीमा (उत्तराखंड के विधायक) और नरिंदर सिंह रैना (जम्मू और कश्मीर के विधायक) भी शामिल हैं।
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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह त्रासदी कोई दुर्घटना नहीं थी। यह एक जानबूझकर किया गया जघन्य हमला था, जो कट्टरपंथी आंदोलनों से जुड़े चरमपंथी तत्वों द्वारा किया गया था। वे आज भी आतंक के माध्यम से देशों को कमजोर करना चाहते हैं। आतंकवाद और उग्रवाद आज भी एक बहुत बड़ा खतरा बना हुआ है, जिसे हमारे कई देश बहुत अच्छी तरह से जानते हैं।
उन्होंने कहा कि अक्सर यह बात भुला दी जाती है कि आतंकवादी सबसे बुनियादी अधिकार, जीवन के अधिकार को छीन लेते हैं। चाहे 9/11, 26/11 या पहलगाम की घटना हो, प्रभाव बिल्कुल एक जैसे ही होते हैं। ऐसे निर्दोष लोगों की जान चली जाती है, जिनका मतभेदों से कोई लेना-देना नहीं होता। भारत की ओर से मैं वैश्विक समुदाय से हमारी साझा जिम्मेदारी को याद रखने का आह्वान करता हूं। मैं विशेष रूप से हमारे कनाडाई मित्रों से इस समस्या का मुकाबला करने में हमारे द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने का आह्वान करता हूं।
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#WATCH | Cork, Ireland: Union Minister Hardeep Singh Puri, Irish Prime Minister, Micheál Martin and others, to pay homage to the victims of the Kanishka bombing at the Ahakista Memorial in Cork, Ireland
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On 23 June 1985, Air India Flight 182 was blown up by the Canada-based… pic.twitter.com/OOCjQ1iUFP — ANI (@ANI) June 23, 2025
हादसे की बरसी पर हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अलावा आयरिश प्रधान मंत्री माइकल मार्टिन, कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसांगरी और अन्य लोग शामिल हुए। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में अरविंदर सिंह लवली (दिल्ली विधायक), बलदेव सिंह औलाख (उत्तर प्रदेश के मंत्री), गुरवीर सिंह बराड़ (राजस्थान के विधायक), त्रिलोक सिंह चीमा (उत्तराखंड के विधायक) और नरिंदर सिंह रैना (जम्मू और कश्मीर के विधायक) भी शामिल हैं।
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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह त्रासदी कोई दुर्घटना नहीं थी। यह एक जानबूझकर किया गया जघन्य हमला था, जो कट्टरपंथी आंदोलनों से जुड़े चरमपंथी तत्वों द्वारा किया गया था। वे आज भी आतंक के माध्यम से देशों को कमजोर करना चाहते हैं। आतंकवाद और उग्रवाद आज भी एक बहुत बड़ा खतरा बना हुआ है, जिसे हमारे कई देश बहुत अच्छी तरह से जानते हैं।
उन्होंने कहा कि अक्सर यह बात भुला दी जाती है कि आतंकवादी सबसे बुनियादी अधिकार, जीवन के अधिकार को छीन लेते हैं। चाहे 9/11, 26/11 या पहलगाम की घटना हो, प्रभाव बिल्कुल एक जैसे ही होते हैं। ऐसे निर्दोष लोगों की जान चली जाती है, जिनका मतभेदों से कोई लेना-देना नहीं होता। भारत की ओर से मैं वैश्विक समुदाय से हमारी साझा जिम्मेदारी को याद रखने का आह्वान करता हूं। मैं विशेष रूप से हमारे कनाडाई मित्रों से इस समस्या का मुकाबला करने में हमारे द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने का आह्वान करता हूं।
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श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और आयरलैंड के प्रधानमंत्री मार्टिन।
- फोटो : ANI/वीडियो ग्रैब
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि कनाडा एक मूल्यवान साझेदार और भारत का मित्र है। हम जीवंत सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध साझा करते हैं। हम लोकतांत्रिक परंपराओं से बंधे हैं। उन आदर्शों के लिए हमें सभी प्रकार के उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करना होगा। जब अलगाववादी हिंसा और अलगाववादी आवाजों को पनाह मिलती है, जब चरमपंथी लोग हिंसा का महिमामंडन करते हैं और वे न केवल उन लोगों को धमकाते हैं जिनकी जान वे लेते हैं, बल्कि वे पूरे समाज को धमकाते हैं। साथ मिलकर काम करके, खुफिया जानकारी साझा करके, फंडिंग चैनल बंद करके और कट्टरपंथ का मुकाबला करके, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जो लोग नफरत और आतंक को बढ़ावा देना जारी रखते हैं, वे सफल न हो सकें।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और भी बहुत कुछ करने के लिए तैयार है। हमारी सुरक्षा एजेंसियां, खुफिया तंत्र और कूटनीतिक चैनल कनाडा और अन्य सभी देशों के साथ साझेदारी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आइए हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयासों को दोगुना करें कि 23 जून 1985 को जो हुआ वह कभी दोहराया न जाए। न यहां, न भारत में, न ही दुनिया में कहीं भी।
उन्होंने कहा कि दुनिया को न केवल इस तरह के गंभीर शोक की घटनाओं में एक साथ आने की जरूरत है, बल्कि इस आतंकवाद से निपटने के लिए सामूहिक, सक्रिय प्रयासों की भी जरूरत है। विचारधाराएं अलग-अलग हो सकती हैं, राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हमें सतर्क रहने की जरूरत है। हमें इन खतरनाक प्रवृत्तियों को पहचानने की जरूरत है, जो गायब होने के बजाय और अधिक मजबूत होती जा रही हैं।
आयरिश प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन ने कहा कि उस सुबह आयरलैंड के आसमान में 329 निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवा दी और समय बीतने के साथ इस क्षति और इस अत्याचार का महत्व कम नहीं हुआ है। जबकि इस भयावह कृत्य का महत्व वैश्विक है। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि यह एक अत्यंत व्यक्तिगत त्रासदी है।
ये भी पढ़ें: अमेरिका के हमले का क्या असर, क्यों इस एक केंद्र को US-इस्राइल ने छुआ भी नहीं?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और भी बहुत कुछ करने के लिए तैयार है। हमारी सुरक्षा एजेंसियां, खुफिया तंत्र और कूटनीतिक चैनल कनाडा और अन्य सभी देशों के साथ साझेदारी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आइए हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयासों को दोगुना करें कि 23 जून 1985 को जो हुआ वह कभी दोहराया न जाए। न यहां, न भारत में, न ही दुनिया में कहीं भी।
उन्होंने कहा कि दुनिया को न केवल इस तरह के गंभीर शोक की घटनाओं में एक साथ आने की जरूरत है, बल्कि इस आतंकवाद से निपटने के लिए सामूहिक, सक्रिय प्रयासों की भी जरूरत है। विचारधाराएं अलग-अलग हो सकती हैं, राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हमें सतर्क रहने की जरूरत है। हमें इन खतरनाक प्रवृत्तियों को पहचानने की जरूरत है, जो गायब होने के बजाय और अधिक मजबूत होती जा रही हैं।
आयरिश प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन ने कहा कि उस सुबह आयरलैंड के आसमान में 329 निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवा दी और समय बीतने के साथ इस क्षति और इस अत्याचार का महत्व कम नहीं हुआ है। जबकि इस भयावह कृत्य का महत्व वैश्विक है। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि यह एक अत्यंत व्यक्तिगत त्रासदी है।
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आयरलैंड में कनिष्क हादसे के मृतकों की याद में बना स्मारक।
- फोटो : ANI/वीडियो ग्रैब
कनिष्क बम विस्फोट मामला क्या था?
23 जून 1985 को एअर इंडिया की फ्लाइट 182 ने मॉन्ट्रियल से लंदन के लिए उड़ान भरी। इसे नई दिल्ली जाना था। एअर इंडिया का यह विमान एक बोइंग 747 जंबो जेट था। जिसे सम्राट कनिष्क के नाम पर कनिष्क नाम दिया गया था। वैंकूवर में एक सूटकेस कार्गो में चेक इन किया गया। इस सूटकेस में बम रखा हुआ था।
विमान आयरिश हवाई क्षेत्र में था। तभी एक जोरदार धमाका हुआ। जमीन से 31 हजार फीट की ऊंचाई पर हुए इस धमाके में विमान सवार 22 क्रू मेंबर और सभी 307 यात्री मारे गए। इनमें 268 कनाडाई, 27 ब्रिटिश और 24 भारतीय नागरिक मारे गए। कनाडाई नगारिकों में कई भारतीय मूल के लोग भी थे।
धमाके के मारे गए लोगों में से केवल 132 शव ही बरामद किए जा सके थे। बाकी 197 शवों का पता तक नहीं चल पाया। धमाके में मारे गए लोगों में नदिया के पार फिल्म में एक्टर सचिन के बड़े भाई की भूमिका निभाने वाले इंद्र ठाकुर भी शामिल थे। इंद्र के साथ उनकी पत्नी प्रिया और उनके बेटे की भी जान इस आतंकी हमले में चली गई थी। धमाके के वक्त विमान हीथ्रो एयरपोर्ट से महज 45 मिनट की दूरी पर था। धमाके के बाद विमान टुकड़े-टुकड़े हो गया। विमान के टुकड़े अटलांटिक महासागर में जा गिरे।
कनाडा और भारतीय जांच में पता चला कि इस बम धमाके की योजना बनाने का काम और उसका क्रियान्वयन कनाडा में रहने वाले सिख अलगावादियों ने किया था। ये अलगावादी पंजाब में सक्रिय उग्रवादियों के निर्देश पर काम कर रहे थे। जांचकर्ताओं ने बताया कि बम धमाकों को आतंकवादी समूह बब्बर खालसा ने ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेने के लिए अंजाम दिया था।
23 जून 1985 को एअर इंडिया की फ्लाइट 182 ने मॉन्ट्रियल से लंदन के लिए उड़ान भरी। इसे नई दिल्ली जाना था। एअर इंडिया का यह विमान एक बोइंग 747 जंबो जेट था। जिसे सम्राट कनिष्क के नाम पर कनिष्क नाम दिया गया था। वैंकूवर में एक सूटकेस कार्गो में चेक इन किया गया। इस सूटकेस में बम रखा हुआ था।
विमान आयरिश हवाई क्षेत्र में था। तभी एक जोरदार धमाका हुआ। जमीन से 31 हजार फीट की ऊंचाई पर हुए इस धमाके में विमान सवार 22 क्रू मेंबर और सभी 307 यात्री मारे गए। इनमें 268 कनाडाई, 27 ब्रिटिश और 24 भारतीय नागरिक मारे गए। कनाडाई नगारिकों में कई भारतीय मूल के लोग भी थे।
धमाके के मारे गए लोगों में से केवल 132 शव ही बरामद किए जा सके थे। बाकी 197 शवों का पता तक नहीं चल पाया। धमाके में मारे गए लोगों में नदिया के पार फिल्म में एक्टर सचिन के बड़े भाई की भूमिका निभाने वाले इंद्र ठाकुर भी शामिल थे। इंद्र के साथ उनकी पत्नी प्रिया और उनके बेटे की भी जान इस आतंकी हमले में चली गई थी। धमाके के वक्त विमान हीथ्रो एयरपोर्ट से महज 45 मिनट की दूरी पर था। धमाके के बाद विमान टुकड़े-टुकड़े हो गया। विमान के टुकड़े अटलांटिक महासागर में जा गिरे।
कनाडा और भारतीय जांच में पता चला कि इस बम धमाके की योजना बनाने का काम और उसका क्रियान्वयन कनाडा में रहने वाले सिख अलगावादियों ने किया था। ये अलगावादी पंजाब में सक्रिय उग्रवादियों के निर्देश पर काम कर रहे थे। जांचकर्ताओं ने बताया कि बम धमाकों को आतंकवादी समूह बब्बर खालसा ने ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेने के लिए अंजाम दिया था।