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चीन में कब्र से मिली 2000 साल पुरानी पांडुलिपियां, मानव शरीर के बारे में देती हैं जानकारियां
Thu, 03 Sep 2020 04:20 AM IST
योगेश साहू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग।
Published by: योगेश साहू
Updated Thu, 03 Sep 2020 04:20 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
चीन में एक कब्र में करीब 2,000 साल पुरानी पांडुलिपियां पाई गई हैं। इनमें मानव शरीर और अंगों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। दावा है कि यह दुनिया की सबसे पुरानी मानव शरीर के बारे में जानकारी देने वाली पांडुलिपियां हैं।
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वैज्ञानिकों ने साल 1970 के दशक में पहली बार चांग्शा के मवांगडुई में स्थित एक कब्रगाह से इन पांडुलिपियों को खोज निकाला था। परंतु उस समय इन्हें पढ़ा और समझा नहीं जा सका था। अब वैज्ञानिकों की एक टीम ने इनकी व्याख्या की है।
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शोधकर्ताओं ने इनकी व्याख्या करने के लिए प्राचीन भाषा का अध्ययन किया। इसके बाद मवांगडुई लिपि को पढ़ा। शोधकर्ताओं ने बताया कि इनमें मानव शरीर और अंगों के बारे में जानकारी दी गई है। इनमें शरीर के अंगों और उनसे जुड़े रोगों के बारे में विस्तार से बताया गया है कि किस प्रकार से रोग उत्पन्न हो सकते हैं।
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इस खोज से पहले मानव शरीर संरचना विज्ञान के बारे में प्राचीन ग्रीक में उल्लेख मिलता है। हालांकि ताजा शोध के माध्यम से चीनी इतिहास के बारे में नई जानकारी सामने आई है। वैज्ञानिकों का निष्कर्ष है कि यह खोज चीनी इतिहास को फिर से लिखे जाने के लिए एक कुंजी की तरह है।
मवांगडुई चिकित्सा ग्रंथ केवल 40 साल पहले खोजे गए थे। किसी ने अभी तक इनके मानव शरीर संरचना का एक एटलस होने का प्रस्ताव पेश नहीं किया है। बहरहाल, बांगोर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का यह नया अध्ययन द एनाटोमिकल रिकॉर्ड में प्रकाशित किया गया है।
अपने निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने कहा है कि हम सुझाव देते हैं कि इसका मुख्य कारण यह नहीं है कि कन्फ्यूशीवाद अंतर्निहित विच्छेदन के माध्यम से शारीरिक अध्ययन का प्रतिपादन करता है। इसके बजाय हम यह प्रस्तावित करते हैं कि इन ग्रंथों को पढ़ने के बाद शारीरिक रचना को एक अलग चश्मे से देखने की जरूरत है, जो हमारे आधुनिक विज्ञान और चिकित्सा की धारणा से काफी अलग है।
इसके अतिरिक्त इससे साबित होता है कि प्राचीन चीन में चिकित्सा क्षेत्र में एक अलग विशेषज्ञ कौशल था। इन पांडुलिपियों को 168 ईसा पूर्व में लिखा गया था और इसमें विभिन्न चीनी भाषाओं और बोलियों को शामिल किया गया था। जो हान युग के दौरान चीन में रह रहे लोगों के इतिहसा एक हिस्सा थीं। इन्हें समझना उन वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती था, जिन्होंने इनको उन कब्रों से खोज निकाला।
शोधकर्ताओं ने कहा कि 'इन ग्रंथों को पढ़ने के लिए न केवल पारंपरिक लिपि को पढ़ने की क्षमता के साथ-साथ आधुनिक सरलीकृत लिपि को भलीभांति जानने की भी आवश्यकता होती है। यह उन विद्वानों के लिए एक पुख्ता सुबूत हैं जो आधुनिक पश्चिमी विज्ञान के आधार पर ब्रह्मांड की व्याख्या करने के आदी हैं।'
बता दें कि चांग्शा के मवांगडुई की कब्रगाह में एक हान राजवंशीय महिला दाई की कब्र के भीतर पांडुलिपियां साल 1973 में पाई गई थीं। बंगोर विश्वविद्यालय के विवियन शॉ और उनकी टीम ने रेशम के टुकड़े पर लिखे गए शब्दों को एक दिन पढ़ने में सक्षम होने की आशा के साथ प्राचीन भाषा सीखने का प्रयास शुरू किया था।
शॉ ने कहा कि हमें शरीर के धमनियों, नसों और तंत्रिकाओं की अलग-अलग प्रणालियों के अपने वर्तमान पश्चिमी चिकित्सा दृष्टिकोण से अलग दृष्टिकोण से इन ग्रंथों को देखना होगा।
इनके लेखकों के पास हमारे जैसी समझ नहीं थी। उन्होंने मानव शरीर की संरचना को पारंपरिक चीनी चिकित्सा के दृष्टिकोण से देखा, जो कि यिन और यांग के पूरक विरोधियों की दार्शनिक अवधारणा पर आधारित है। इससे पश्चिम के वह लोग परिचित हैं, जो पूर्वी आध्यात्मवाद का पालन करते या मानते हैं।