जो बिडेन जीते तो विश्व में उदारता लौटने की उम्मीद, ट्रंप आए तो दुनिया लेगी करवट
- डोनाल्ड ट्रंप के हारने के बाद हो जाएगा एक युग का अंत
- बिडेन जीते तो एशिया, यूरोप, अमेरिका में आएंगे बड़े बदलाव
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विस्तार
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना जारी है। अभी तक की मतगणना में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन का पलड़ा भारी है, वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड़ ट्रंप अपनी जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं। खबर आ रही है कि व्हाइट हाउस में 400 मेहमानों के लिए शानदार पार्टी का आयोजन किया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के अमेरिका में तैनात सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक व्हाइट हाउस की स्टील के रॉड से बैरिकेटिंग की गई है। राष्ट्रपति के इस चुनाव नतीजे का इंतजार न केवल अमेरिका के नागरिकों को है, बल्कि यूरोप, एशिया, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया समेत पूरी दुनिया इस पर नजरें गड़ाए है।
क्या है जो बिडेन के जीतने का अर्थ?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप ने अपने कार्यकाल में किसी देश पर कोई बड़ा सैन्य हमला नहीं किया। उन्होंने 'प्रोटेक्शनिज्म' की नीति अपनाई। अमेरिका के इस कदम ने चार साल में दुनिया में उथल-पुथल मचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लक्ष्य हमेशा अमेरिका, अमेरिका के लोगों और अर्थव्यवस्था के हितों पर रहा। इसका अमेरिका को एक मायने में लाभ मिला।
दूसरी तरफ अमेरिका की दुनिया में बनी बादशाहत भी काफी प्रभावित हुई। वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडे का मानना है कि कदाचित चुनाव नतीजे में जो बिडेन के विजयी होने की खबर आती है तो पूरी दुनिया में उदारवाद की स्थापना को बल मिलेगा। माना जा रहा है कि अमेरिका फिर से विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र संगठन की संस्थाओं में अपनी भूमिका बढ़ा सकता है।
अमेरिका दुनिया के स्तर पर लीडरशिप स्थापित करने की पहल कर सकता है। अर्थव्यवस्था से लेकर हर क्षेत्र में प्रोटेक्शनिज्म के दौर को बड़ा झटका लगेगा, उदारवाद के दौर की वापसी हो सकती है। यह होना भी चाहिए, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पद की अविश्वसनीयता बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
और अगर डोनाल्ड ट्रंप जीते तो...
अश्वेत अमेरिकी तो मना रहे हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनाव न जीतने पाएं। राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया के देशों को अमेरिकी प्रतिबंधों की धमकियां देकर डरा रखा है। इसके अलावा राष्ट्रपति ने डब्ल्यूएचओ, संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं से भी अमेरिका के हाथ खींच लिए हैं। अमेरिका, एशिया, यूरोप समेत पूरी दुनिया में नए तरीके से सारे समीकरण बैठाए हैं।
ट्रंप अमेरिका की उदारवादिता, सैन्य ताकत, प्रभुत्व के सहारे बनी लीडरशिप को प्रोटेक्शनिज्म की राह पर ले गए। माना जा रहा है राष्ट्रपति ट्रंप सत्ता में वापसी के बाद विश्व की जिओपॉलिटिक्स को इसके दूसरे चरण में ले जाएंगे। इस नीति को ट्रंप के समर्थक ट्रंपवाद, अमेरिकी राष्ट्रवाद की संज्ञा देते हैं। वह चाहते हैं कि ट्रंप को एक कार्यकाल और मिलना ही चाहिए।
भारत के लिए क्या अच्छा रहेगा
विदेश मंत्रालय के जानकारों और कूटनीतिज्ञों का कहना है कि चाहे ट्रंप के रूप में रिपब्लिकन आएं या बिडेन के रूप में डेमोक्रेट, भारत की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। सब अच्छा ही रहना है, क्योंकि अमेरिका को वहां की एक व्यवस्था चलाती है।
अमेरिका के एशिया और दक्षिण एशिया के हितों में भारत काफी महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति ट्रंप भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना अच्छा मित्र बताते हैं। राष्ट्रपति चुनाव के इस साल में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की दोस्ती का असर भी दिखा है। लेकिन इसके साथ-साथ ट्रंप के काल में भारत को कई मोर्चे पर तमाम असंगतियों का सामना करना पड़ा है।
मसलन रूस के साथ संबंध पर अमेरिका के प्रतिबंधों या रजामंदी की छाया, अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की वापसी, चीन के साथ अंतराष्ट्रीय व्यापार तकरार में भारत, ईरान पर प्रतिबंध का भारत पर असर। माना जा रहा है कि बिडेन के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद भारत को इस तरह की चुनौतियों का रास्ता मिल सकता है।
क्या राष्ट्रपति ट्रंप आसानी से गद्दी छोड़ देंगे?
दुनिया में यह सवाल मौजूं है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले इस आशंका को काफी बल दे दिया है। जो बिडेन से मामूली अंतर से अभी पीछे चल रहे राष्ट्रपति ने डाक से आए वोट पर निशाना साधा है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में मामला दाखिल करने की चेतवानी भी आने लगी है। ऐसे में इस तरह की आशंका काफी प्रबल है कि राष्ट्रपति ट्रंप हार के बाद पद त्यागने में कानूनी दांव-पेंच का सहारा ले सकते हैं। वह सुप्रीम कोर्ट की शरण लेकर चुनाव नतीजे को चुनौती दे सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति इस नतीजे में घपला होने का सहारा ले सकते हैं। फिलहाल अभी वह अपनी जीत का दावा कर रहे हैं और मतगणना के दौरान वह डांस करते भी दिखाई दे रहे हैं।
विकसित अमेरिका में काफी पिछड़ी है चुनाव प्रणाली
अमेरिका दुनिया का सबसे विकसित राज्य है, लेकिन वहां कोई भारतीय चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संवैधानिक निकाय नहीं है। भारतीय निर्वाचन आयोग देश में न केवल चुनाव कराता है, बल्कि वह विजयी प्रत्याशियों को प्रमाण पत्र देकर उन्हें विजयी घोषित करता है। चुनाव आयोग बाकायदा अधिसूचना जारी करता है। अमेरिका में इस तरह की व्यवस्था नहीं है। वहां मत पत्रों (बैलट पेपर) के जरिए मतदान होता है। वहां चुनाव की घोषणा, चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने, विजयी उम्मीदवार की घोषणा और इसकी अधिसूचना जारी होने जैसी व्यवस्था न होने के कारण राष्ट्रपति ट्रंप कानूनी दांव-पेंच की आड़ ले सकते हैं। हालांकि अमेरिका में मूल्य, मान्यता, परंपरा का खासा महत्व है। इसलिए अभी तक वहां की चुनाव प्रक्रिया में इस तरह का उदाहरण मिलने की संभावना नहीं रही है।
कैसा है मतगणना के समय वातावरण?
वॉशिंगटन से निलेश सिंह बताते हैं कि अमेरिका में व्हाइट हाउस के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी है। अमेरिका में लोगों को मतगणना के नतीजे आने के बाद प्रबल हिंसा की आशंका दिखाई दे रही है। मंगलवार तीन नवंबर को अमेरिका में अश्वेतों ने भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया है। अमेरिका की तमाम बाजारों में मॉल, रेस्तरां, दुकानें बंद हैं। जिन दुकानों के फ्रंट गेट शीशे के हैं, हिंसा की आशंका को देखते हुए लोगों ने लकड़ी की दीवारें खड़ी कर रखी हैं। हालांकि अभी यह मतगणना अभी लंबे वक्त तक चलने के आसार हैं।