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अमेरिका: जज ने माता-पिता से अलग हुए बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने के लिए मदद का किया आग्रह
Sat, 24 Oct 2020 02:52 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, सैन डिएगो/ वाशिंगटन
एजेंसी, सैन डिएगो/ वाशिंगटन
Published by: देव कश्यप
Updated Sat, 24 Oct 2020 02:52 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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एक अमेरिकी जज ने ट्रंप प्रशासन से 2017 में सैकड़ों लोगों को यहां से मैक्सिको भेजे जाने के दौरान अपने माता-पिता से अलग हुए बच्चों के परिवारों का पता लगाने के लिए अदालत द्वारा नियुक्त टीम की मदद करने का आग्रह किया। अदालत ने कहा कि टीम 545 बच्चों के माता-पिता का पता लगाने में असमर्थ रही है।
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अवैध तरीके से अमेरिका में घुसे अधिकांश लोगों को 2017 में मध्य अमेरिका भेज दिया गया था। जबकि उनके बच्चों को अमेरिका में उनके रिश्तेदारों और अभिभावकों के साथ रखा गया था। जज दाना सब्रा ने सैन डिएगो में सुनवाई के दौरान कोई आदेश जारी करने के बजाय न्याय विभाग के वकीलों से कहा कि वे ऐसे तरीके निकालें, जिससे प्रशासन को माता-पिता को खोजने में आसानी हो।
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अपने बच्चों से अलग हुए परिवारों को खोजने के प्रयास के दौरान सब्रा ने अवैध रूप से सीमा पार करने वाले लोगों के प्रति सरकार की असहिष्णु नीति को 2018 में समाप्त करने का आदेश दिया था। सब्रा ने शुरू में सरकार को 2,700 से अधिक बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने का आदेश दिया था।
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अमेरिका में 11 भारतीय छात्र गिरफ्तार
अमेरिका में अवैध तरीके से रहने के आरोप में 15 विदेशी छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें 11 भारतीय छात्र हैं। आव्रजन एवं सीमा शुल्क अधिकारियों ने इन छात्रों के बोस्टन, वाशिंगटन, ह्यूस्टन समेत अमेरिका के दूसरे शहरों से गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार छात्रों में भारत के अलावा लीबिया के दो, सेनेगल का एक और बांग्लादेश का एक नागरिक है। अधिकारियों के मुताबिक, अवैध तरीके से अमेरिका में रह रहे इन छात्रों को ऑप्टिकल इल्यूजन अभियान के तहत गिरफ्तार किया गया है। इस अभियान के तहत वैसे गैर आव्रजक छात्रों को गिरफ्तार किया जाता है, जो ऑप्टिकल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) कार्यक्रम का इस्तेमाल करके अमेरिका में बने रहते हैं।
कार्यक्रम के तहत गैर आव्रजक छात्रों को एक साल तक उनके शिक्षा से जुड़े क्षेत्र में काम करने की अनुमति दी जाती है। उन्हें इस एक साल के अलावा 24 महीने तक देश में काम करने की अनुमति भी दी जाती है, बशर्ते छात्र एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स) वैकल्पिक प्रैक्टिकल प्रशिक्षण में हिस्सा लें। अधिकारियों ने बताया कि पकड़े गए छात्र वैसी कंपनियों में काम करने का दावा कर रहे थे, जो कंपनी वास्तव में हैं ही नहीं।