ट्रंप को पता था कि रूस ने चुनाव के दौरान कराई थी हैकिंग : व्हाइट हाउस
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अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन से जुड़ी हुई दस्तावेजों और ईमेल की हैकिंग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन खुद शामिल थे। रिपोर्ट्स के अनुसार पुतिन ने खुद निर्देश दिए थे कि हैकिंग को कैसे अंजाम देना है और इसे डेमोक्रेट उम्मीदवार के खिलाफ कैसे इस्तेमाल करना है।
वहीं, व्हाइट हाउस का कहना है कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जानते थे कि उनकी प्रतिद्वंद्वी हिलेरी के अभियान और डेमोक्रेटिक पार्टी के सर्वर की हैकिंग में रूस का हाथ था। एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक दो सीनियर अधिकारियों ने माना है कि पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट उम्मीदवार के खिलाफ सूचना लीक करने में अहम भूमिका निभाई थी।
अधिकारियों का मानना है कि केवल रूस के सबसे वरिष्ठ अधिकारी इन गतिविधियों के लिए अधिकृत हो सकते हैं। यह खुफिया रूसी प्रणाली पुतिन के नियंत्रण में हैं। इस आधार से पता चलता है कि पुतिन के निर्देश पर ही ये सब हुआ है। यह पूछे जाने पर कि आरोपों का आधार क्या था तो पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि यह हास्यास्पद है, बकवास है, कोई आधार नहीं हो सकता। पिछले सप्ताहअंत में ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सीआईए ने पाया है कि रूस ने अमेरिका में कई ईमेल हैक किए हैं ताकि डोनाल्ड ट्रंप को जिताया जा सके।
हिलेरी से बदला लेना चाहते थे पुतिन
सनद रहे कि साल 2011 में अमेरिका की तत्कालीन विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने रूस में हुए संसदीय चुनावों पर सवाल उठाए थे। इसके बाद रूस की सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हो गए थे। खुफिया अधिकारियों ने एनबीसी को बताया कि हैकिंग के पीछे पुतिन का इरादा कथित तौर पर हिलेरी क्लिंटन से बदला लेना था।
वहीं, व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जोश इर्नेस्ट ने कहा कि पर्याप्त सबूत नहीं है कि चुनाव से पहले लंबे समय से हैकिंग हो रही थी और कई मामलों में अक्तूबर से पहले ट्रंप के अभियान के समय इसे लेकर चर्चा थी और रूस के बार में काफी चीजें कहीं गईं।
रिपब्लिकन उम्मीदवार खुद ने रूस पर यह आरोप लगाया था कि रूस ने उनकी प्रतिद्वंद्वी का अकाउंट हैक किया है ताकि उन्हें जिताया जा सके। यह हो सकता है कि वह इससे वाकिफ थे कि इस हैकिंग के पीछे रूस का हाथ है और इसका नकारात्मक असर उनकी प्रतिद्वंद्वी के अभियान पर पड़ेगा।