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पेरिस जलवायु समझौते पर ट्रंप का यू-टर्न, कहा- अमेरिका फिर बन सकता है सदस्य

Thu, 11 Jan 2018 12:50 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 11 Jan 2018 12:50 PM IST
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Donald trump could go back to Paris Climate deal
donald trump

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका पेरिस के जलवायु समझौते पर "अव्यवस्थित रूप से" वापस लौट सकता है। हालांकि, उन्होंने इस दिशा में किसी भी कदम को उठाने के संकेत देने से मना कर दिया।

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ट्रंप ने एक संवाददात सम्मेलन में कहा कि, 'यह एक ऐसा समझौता है जिसमें मुझे कोई समस्या नहीं है, लेकिन उन समझौते में मुझे एक समस्या थी, जिस पर उन्होंने हस्ताक्षर किया था, उन्होंने एक बुरा सौदा किया था जिसके पक्ष में मैं नहीं था, हालांकि, अब हम फिर से इस समझौते पर अव्यवस्थित रूप से लौट सकते हैं।'
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ट्रंप ने कहा कि, इस समझौते को छोड़ने की प्रक्रिया लंबी और जटिल है। ट्रंप की इस टिप्पणी से यह सवाल भी उठता है कि क्या ट्रंप वास्तव में वापस इस समझौते पर वापस जाने का इरादा रखते हैं या बस अमेरिका के उत्सर्जन के लक्ष्य को आसान करना चाहते हैं। 
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ट्रंप ने इस कॉन्फ्रेंस में नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर खुद को पर्यावरणवाद के चैंपियन के रूप में  प्रस्तुत किया।

ट्रंप ने कहा कि, मैं पर्यावरण के बारे में बड़ी संजीदगी से सोचता हूं। हम स्वच्छ पानी चाहते हैं, स्वच्छ हवा चाहते हैं लेकिन इन सबके अलावा हम व्यवसाय भी चाहते हैं। ट्रंप ने नॉर्वे के बारे में बोलते हुए कहा कि, पानी नॉर्वे की महान संपत्तियों में से एक हैं। उनके पास जबरदस्त हाइड्रो पावर है। नॉर्वे की ज्यादातर एनर्जी और बिजली इसी हाइड्रो पावर द्वारा उत्पादित की जाती है। हम आशा करते हैं कि हम भी भविष्य में कुछ ऐसा कर पाएं।'


क्या है पेरिस समझौता?
2015 में हुआ था पेरिस क्लाइमेट समझौता। इस समझौते में 195 देश एक साथ आए थे। इस समझौते का मकसद कार्बन एमिशन में कमी लाना है साथ ही ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस तक नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है। बाद में इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक ले जाने के लिए प्रयास किया जाना था। अमेरिका को 26% कार्बन एमिशन कम करने के लक्ष्य दिया गया था साथ ही अमेरिका को गरीब देशों इसपर अमल के लिए 3 बिलियन डॉलर देने पर सहमति भी दी गई थी। 



 
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