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ट्रंप के पद संभालने से ठीक पहले कई देश अशांकित

Wed, 18 Jan 2017 05:57 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ लंदन
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ लंदन Updated Wed, 18 Jan 2017 05:57 AM IST
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As Donald Trump Era Arrives, a Sense of Uncertainty Grips the World

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दफ्तर में शपथ लेने के महज दो दिन पहले जर्मन गुस्से में हैं, चीन एकदम आपे से बाहर है, नाटो देशों के नेता नर्वस हैं और यूरोपीय यूनियन के सभी जोड़ीदार आशंकित हैं। इस बीच ट्रंप पूरी दुनिया के बारे में क्या सोचते हैं इसकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। उनकी विवादित टिप्पणियों और परस्पर विरोधी साक्षात्कारों के चलते चीन के साथ तनाव पैदा हो चुका है। सिर्फ रूस और वहां के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बारे में ट्रंप ने कोई आलोचना नहीं की है। इसके अलावा ट्रंप वास्तव में क्या करना चाहते हैं, यह कोई नहीं जानता।

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वास्तव में देखा जाए तो ट्रंप की अस्थिरता ही शायद उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। दुनिया को उनकी अधिकांश बातें ट्विटर के संदेशों द्वारा ही मिल रही हैं, लेकिन इनसे यह स्पष्ट नहीं होता है कि ये उनकी नई नीतियों का प्रतिनिधित्व करती हैं अथवा निजी राय है। 
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मध्य-पूर्व देशों में आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे नाटो देशों में अमेरिका शामिल है, जबकि रूस इसके खिलाफ है ऐसे में रूस के साथ यदि अमेरिका संबंध बनाता है तो नाटो देशों को अपनी रणनीति दोबारा बनानी पड़ेगी। उधर इस्राइल को लेकर भी ट्रंप का रुख मध्य-पूर्व के देशों को प्रभावित करेगा।
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चीन पहले ही वन चायना पॉलिसी को लेकर भी ट्रंप के बयानों से नाराज था, जबकि ताइवान को लेकर ट्रंप के रवैये से चीन और भी आग बबूला हो गया है। ट्रंप ने अपने पुराने नजरिए को दोहराते हुए एक बार फिर कहा है कि नाटो ‘अप्रासंगिक’ हो चुका है।

हालांकि उन्होंने जोड़ा कि नाटो मेरे लिए महत्वपूर्ण जरूर है। नाटो में राजदूत रह चुके और अमेरिकी विदेश मंत्रालय के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी आर. निकोलस बर्न्स ने कहा कि - ‘ट्रंप के ये बयान 1945 से अमेरिका द्वारा पश्चिमी नेतृत्व के साथ विकसित होने वाले सौहार्दपूर्ण संबंधों पर चोट करने वाले हैं।’ 

शरणार्थियों पर ट्रंप को जर्मनी की चांसलर ने दिया तीखा जवाब

As Donald Trump Era Arrives, a Sense of Uncertainty Grips the World

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यूरोपियन यूनियन के बारे में कहा कि वह मूलत: जर्मनी द्वारा संचालित है। उन्होंने इससे आगे जाकर यह भी कहा कि जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने यूरोप में शरणार्थियों को बसाने की अनुमति देकर ‘विनाशकारी गलती’ की थी। ट्रंप के इस बयान का मर्केल ने सोमवार को तीखा जवाब दिया और कहा कि - ‘मैं समझती हूं कि यूरोपियन लोग अपना भाग्य खुद नियंत्रित कर सकते हैं।’

ट्रंप को झटका, सुरक्षा सलाहकार पर पर नामित क्राउले ने नाम वापस लिया
वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में शीर्ष संवाद पद के लिए नामित रूढ़िवादी लेखिका व अध्यापिका मोनिका क्राउले ने उन पर लगे साहित्यिक चोरी के आरोपों के चलते पद स्वीकार नहीं करने का फैसला लिया है। 

फॉक्स न्यूज की पूर्व कमेंटेटर क्राउले ने वाशिंगटन टाइम्स से कहा कि काफी सोच-विचार के बाद मैंने न्यूयॉर्क में रहकर अन्य मौकों को भुनाने का निर्णय लिया है। उन्हें एनसीएस के सामरिक संचार में वरिष्ठ निदेशक सेवा देने के लिए नामित किया गया था। हालांकि क्राउले ने खुद पर लगे कथित साहित्यिक चोरी के आरोपों पर बात करने से इंकार कर दिया। ट्रंप के भावी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल फ्लिन ने क्राउले की नाम वापसी की पुष्टि की।

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