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शून्य से 50 डिग्री नीचे कुछ इस तरह चल रही है बेपरवाह जिंदगी

Tue, 26 Jan 2016 06:36 AM IST
Updated Tue, 26 Jan 2016 06:36 AM IST
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Americans living in minus 50 degree temperature

उत्तर भारत इन दिनों सर्दी से ठिठुर रहा है। आम लोगों का जन जीवन प्रभावित हुआ है। हजारों मील दूर अमरीका में भी भारी बर्फबारी से 11 राज्यों में आपातकाल की स्थिति पैदा हो गई और कई लोगों की मौत भी हो गई है। इन हालात में ऐसे शहर के बारे में जानकर हैरानी होगी जहाँ अमूममन तापमान शून्य से 50 डिग्री नीचे तक चला जाता हो, लेकिन शहर की रफ्तार धीमी नहीं पड़ती है।

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शहर की रफ्तार, भागमभाग और औद्योगीकरण का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ये दुनिया का सातवां सबसे प्रदूषित शहर है। ये शहर है नॉरलिस्क, जो रूस का ओद्यौगिक शहर है। यह सुदूर उत्तर पूर्व में बसा शहर है, एकदम आर्कटिक सर्किल के ऊपर बसा हुआ। यह शहर मुख्य रूप से निकल, तांबा और पलैडियम की खदानों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। लिहाजा खनन और इन खनिजों को तराशने के उद्योग यहां बड़े पैमाने पर हैं।
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जनवरी-फरवरी के महीने में यहां का तापमान शून्य से 45-50 डिग्री नीचे तक चला जाता है और यहां रहना खासा मुश्किल होता है। इसके बावजूद यहां नौकरी करने के लिए रूस के दूसरे हिस्सों से लोग आते रहते हैं।

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इस ठंड में राहत दे रहे हैं गरम कपड़े

Americans living in minus 50 degree temperature

मोटे तौर पर यहां की आबादी पौने दो लाख के आसपास है। इसी शहर की खूबसूरत तस्वीरों को अपने कैमरे में कैद किया है फोटोग्राफर इलिना चेरनाश्वो ने।इस शहर की उनकी तस्वीरों की एक प्रदर्शनी न्यूयार्क सिटी के हाफकिंग स्टूडियो में ‘डेज ऑफ नाइट – नाइट्स ऑफ डे’ नाम से चल रही है।

इस शहर की फोटोग्राफी करते हुए उन्होंने इसे समझने के लिए स्थानीय युवती डैन डैमोन से भी बातचीत की है। सवाल ये है कि इन मुश्किल हालात में, इतनी ठंड में घर से बाहर कैसे निकलते हैं लोग? डैन बताती हैं, “हम लोग ठंड में खूब बाहर निकलते हैं, बस हमें अच्छी गुणवत्ता वाले ऊनी कपड़े पहनने होते हैं।”

डैन इस शहर की खासियतों के बारे में बताती हैं, “सोवियत संघ के जमाने ये शहर आर्थिक रूप में काफी संपन्न था, लोग यहां की सपन्नता को देखते हुए यहां आते थे। बेहतरीन स्कूल, शानदार अस्पताल, रहने के लिए प्राकृतिक जगहें, ये सब मौजूद थे।" वो आगे बताती हैं, "आज भी कमोबेश हालात वैसे ही हैं। लोग यहां बेहतर क्वालिटी ऑफ लाइफ के कारण चले आते हैं।” डैन ये भी बताती हैं कि यहां से कुछ लोग रिटायर होने के बाद एकाध साल के लिए दूसरी जगहों पर गए लेकिन आखिर में यहीं लौट आए।

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