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Hindi News ›   World ›   America The court fined Rs 74 crore for giving birth to a disabled girl due to wrong injection

गलत इंजेक्शन के चलते पैदा हुई विकलांग बच्ची, दंपति को मिले 74 करोड़ रुपये

Fri, 20 Nov 2020 01:33 AM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Fri, 20 Nov 2020 01:33 AM IST
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America The court fined  Rs 74 crore for giving birth to a disabled girl due to wrong injection
(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pixabay

जरा सी लापरवाही के चलते बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।इसका सटीक उदाहरण अमेरिका के सिएटल में सामने आया है। यहां एक नर्स की जरा सी लापरवाही ने एक महिला की परेशानियां बढ़ा दीं। महिला एक कम्युनिटी क्लिनिक में बर्थ कंट्रोल इंजेक्शन लगवाने के लिए गई थी, लेकिन उसे फ्लू शॉट लगा दिया गया था। गलत इंजेक्शन लगाए जाने से दंपति के घर विकलांग बेटी का जन्म हुआ। यह मामला जब अदालत पहुंचा, तो जज ने महिला को 10 मिलियन डॉलर (74 करोड़ रुपये से अधिक) की राशि दिए जाने का फैसला सुनाया है। 

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रिपोर्ट के मुताबिक, येसेनिआ पचेको नाम की महिला मां नहीं बनना चाहती थी, लेकिन नर्स के गलत इंजेक्शन लगाने की वजह से वह गर्भवती हो गईं। महिला ने सरकारी क्लीनिक में इंजेक्शन लगवाया था, इसलिए अमेरिका की संघीय सरकार को गलती के लिए जिम्मेदार माना गया।
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येसेनिआ पचेको एक रिफ्यूजी के रूप में 16 साल की उम्र में अमेरिका आई थी। घटना के वक्त वह दो बच्चों की मां थी और परिवार बढ़ाना नहीं चाहती थी। नर्स ने पचेको का चार्ट देखे बिना ही फ्लू की वैक्सीन दे दी थी। गलत इंजेक्शन लगाए जाने के चलते दंपति के विकलांग बेटी पैदा हुई। 
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बच्ची के इलाज और पढ़ाई के लिए मिला खर्च 
इसके बाद दंपति ने इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां जज ने पिछले हफ्ते बच्ची के लिए 55 करोड़ रुपये, जबकि कपल की क्षतिपूर्ति के लिए 18 करोड़ रुपये दिए जाने का आदेश दिया है। जज ने कहा कि बच्ची को इलाज, पढ़ाई और अन्य खर्च के लिए पैसे दिए जा रहे हैं। हालांकि, न्याय के लिए दंपति को करीब पांच साल लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी।


लंबी लड़ाई के बाद मिला न्याय 
इस दंपति के वकील माइक मैक्सवेल और स्टीव अल्वारेज ने कहा कि यह लड़ाई पांच साल तक चली क्योंकि सरकार ने नर्स की गलती की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया था। उन्होंने बताया कि बच्ची के जन्म के तीन साल बाद वर्ष 2015 में मुकदमा दायर किया गया था। देर से ही सही लेकिन इस दंपति को न्याय मिला। 

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